अपने ही रिश्तेदार को दिल दे बैठे थे वीरेंद्र सहवाग, शादी के लिए तैयार नहीं थी फैमिली

लाइव सिटीज पटना: वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) का नाम जेहन में आते ही क्रिकेटप्रेमियों को उनकी आक्रामक शैली याद आ जाती है. फॉर्मेट चाहे कोई भी हो टेस्ट, वनडे या टी20 बस गेंद वीरू के रडार में आ गई तो वह बाउंड्री के बाहर ही जाकर रुकेगी. उसकी यही आक्रामता ने उन्हें क्रिकेट में शोहरत भी दिलाई है. लेकिन क्या आपको पता है वीरेंद्र सहवाग मैदान में जितने आक्रामक रहे हैं वहीं उनकी लव स्टोरी (Virender Sehwag Love Story) उतनी ही स्लो रही है. 17 साल की दोस्ती को प्यार में बदलते बदलते 14 साल लग गए. यानि कि मैदान पर अपनी बल्लेबाजी से गेंदबाजों की नींद उड़ाने वाले वीरेंद्र सहवाग प्यार की पिच पर काफी स्लो रहे हैं.

वीरेंद्र सहवाग की लव स्टोरी (Virender Sehwag Love Story) बहुत मजेदार रही है. यह उस तरह की कहानी है जिसे सुनकर हम सभी बड़े हुए हैं. क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे, जब वीरेंद्र सहवाग पहली बार आरती अहलावत (Aarti Sehwag) से मिले थे तब उसकी उम्र महज सात साल थी. वीरेंद्र सहवाग जब 21 साल के थे तब उन्होंने आरती को बस मजाक में प्रपोज किया था. लेकिन आरती के हां कहते ही सहवाग इतने सीरियस हो गए कि वह आरती को तीन साल तक डेट करने के बाद आखिरकार शादी करने का फैसला कर लिया.

वीरेंद्र सहवाग और आरती की पहली मुलाकात

वीरेंद्र सहवाग का जन्म एक संयुक्त परिवार में हुआ था. जिसमें उनके कई चाची, चाचा और चचेरे भाई थे. 1980 के दशक के दौरान सहवाग के चचेरे भाई की शादी जिस लड़की से हुई वह आरती अहलावत की चाची थी. लेकिन उस समय सहवाग केवल सात साल के थे और आरती महज पांच साल की. इस शादी में वे पहली बार बच्चों के रूप में मिले. उसी समय से उन्होंने एक साथ खेलना शुरू किया और अच्छे दोस्त बन गए. जैसे-जैसे दोनों बड़े होते गए, यह दोस्ती और मजबूत होती गई और यह दोस्ती कब प्यार बदल गई दोनों को पता ही नहीं चला.

प्रपोज फिर शादी और बच्चे

वीरेंद्र सहवाग और आरती बचपन से ही एक दूसरे को चाहते थे लेकिन दोनों ने कभी इसका इजहार नहीं किया. जब वीरेंद्र सहवाग 21 साल के हुए तो उन्होंने फैसला किया कि अब बहुत हो गया, अब इस रिश्ते को आगे बढ़ाने का समय आ गया है. फिर पूरे 14 साल तक आरती को जानने के बाद सहवाग ने मई 2002 में आरती को प्रपोज करने का फैसला किया. सहवाग ने बस मजाक में ही आरती को प्रपोज किया था लेकिन आरती ने इसे सच मान लिया और उन्होंने तुरंत हां कर दी.

आरती को लगभग तीन साल तक डेट करने के बाद वीरेंद्र सहवाग ने शादी करने का सोचा. अब तक उनके माता-पिता को दोनों के अफेयर के बारे में कुछ पता नहीं था. जब सहवाग-आरती के परिवार को इसकी खबर लगी तो उन्होंने शादी से मना कर दिया. हालांकि दोनों के प्यार के आगे उनके माता-पिता को झुकना ही पड़ा और आख़िरकार 22 अप्रैल 2004 को वीरेंद्र सहवाग और आरती शादी के बंधन में बंध गए. वीरेंद्र सहवाग और आरती के दो बेटे हैं. 2007 में सहवाग और आरती के पहले बच्चे का जन्म हुआ था, जिसका नाम आर्यवीर है, फिर 2010 में दोनों के घर में दूसरे बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम वेदांत है.

वीरेंद्र सहवाग और आरती अहलावत

वीरेंद्र सहवाग ने एक इंटरव्यू में बताया है कि हमारी फैमिली में क्लोज रिश्तेदारी में शादियां नहीं होती. हमारी शादी के लिए भी परिवार वाले तैयार नहीं थे, थोड़ा वक्त लगा, लेकिन वो शादी के लिए मान गए. उनके लिए इस शादी को रजामंदी देना काफी कठिन रहा. जबकि आरती ने बताया कि हमारे घर में कई ऐसे लोग थे, जो इस शादी से खुश नहीं थे. ऐसा नहीं था कि वो केवल मेरे घर के ही लोग थे, वीरू के परिवार से भी कई लोग इस शादी से नाराज थे. एक इंटरव्यू में वीरेंद्र सहवाग ने अपनी पत्नी के बारे में बताया था कि आरती बहुत सिंपल है और वह सब कुछ समझती है. सहवाग ने कहा कि कई बार वह (आरती) बहुत भावुक हो जाती है, लेकिन यह उसके स्वभाव का एक हिस्सा है. मैं बहुत खुश हूं कि मैंने जिस महिला से प्यार किया है, उससे शादी की है.

एक इंटरव्यू ( इस इंटरव्यू में सहवाग भी थे मौजूद) में आरती ने बताया था कि मुझे अभी भी याद है जब उसने (सहवाग) मुझे प्यारा सा टेडीबियर गिप्ट में दिया था. यह हमारी शादी से पहले की बात है. अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करना बहुत अच्छा लगता है. आरती ने बताया कि वह (सहवाग) बहुत सिंपल आदमी हैं, जमीन से जुड़े हुए और बेहद समझदार इंसान हैं. उसके बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वह बहुत कमिटेट व्यक्ति हैं. वो एक बार जो प्रॉमिस कर देते हैं उसे पूरा जरूर करते हैं.