पहले स्वास्थ्य की क्या हालत थी, किसी से छिपा है क्या?, आज कर लीजिए आंकलन- नीतीश कुमार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार में चुनाव के मद्देनजर सीएम नीतीश कुमार लगातार प्रचार कर रहे हैं. आज वे दानापुर पहुंचे. जहां उन्होंने एनडीए प्रत्याशी आशा देवी और निखिल आनंद के लिए वोट मांगा. इस दौरान मंच पर सांसद रामकृपाल यादव सहित एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद थे.

सीएम ने कहा कि पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने के लिए एक महीना में मात्र 39 लोग ही इलाज कराने जाया करते थे. पहले तो डॉक्टर का इंतजार और दवा के लिए लाइन और तो और कहीं भी बेड की सुविधा नहीं होती थी. लेकिन जब आपलोगों ने हमें काम करने का मौका दिया तब से आज का अस्पताल देख लीजिए. हमने दवा का प्रबंध किया, डॉक्टरों को हॉस्पिटल में लाया और नर्सेस को भी काम पर लगाया. साल 2006 से यही तो काम करते आ रहे हैं. आज आपको जानकर हैरानी होगी कि एक महीने में औसतन 10 हजार से अधिक लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करने आते हैं.



अपने भाषण के दौरान सीएम ने कहा कि पहले स्कूल का कितना बुरा हाल था. कहां बच्चे पढ़ पाते थे. पहले प्राथमिक स्कूलों के बाहर काफी संख्या में बच्चे बाहर रह जाते थे. जब हमने पता कराया तो मालूम चला कि जितने भी बच्चे थे, वे या तो महादलित समुदाय से थे या फिर अल्पसंख्यक समुदाय से थे. इसके बाद हमने टोला सेवक सहित चार लोगों को काम पर लगाया. ताकि बच्चे पढ़ सके. उन्होंने कहा कि अब ना के बराबर बच्चे स्कूल के बाहर दिखते हैं. वहीं लड़कियां स्कूलों में कितनी पढ़ती थी. लेकिन हमने पोशाक योजना, साईकिल योजना लाकर लड़कियों की पढ़ाई में रुचि जगाया. आज देख लीजिए लड़कों से ज्यादा लड़कियां स्कूलों में पढ़ने जा रही हैं.

सीएम ने कहा कि जिन लोगों को पहले 15 साल राज करने का मौका मिला, उन्होंने महिलाओं के क्या काम किया? हमने जीविका समूह के तहत महिलाओं को जोड़ा. इसके लिए हमने विश्व बैंक से कर्ज लिया. आज देख लीजिए कि कितना काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि जब यूपीए की सरकार थी तो उनलोगों ने भी आकर देखा कि जीविका समूह मे कितना काम हो रहा है.