चिल्‍ला रहे थे लालू प्रसाद, ललन सिंह को घसीट के बाहर फेंक देने का दे रहे थे हुक्‍म

-निहारिका सिंह-

पटना : लालू प्रसाद फिर से जेल में हैं. चारा घोटाले का पीछा अभी छूटने वाला नहीं दिख रहा. और तो और बिहार से अलग झारखंड राज्‍य बनने की टीस अभी उन्‍हें सबसे अधिक कष्‍ट दे रही होगी. कारण कि झारखंड में मौजूदा शासन भाजपा का है. ऐसे में, जेल का कानून लालू प्रसाद के लिए बहुत कड़ा हो गया है. जेल मैनुअल के पन्‍ने पलटे गये हैं. कह दिया गया है कि हफ्ते में तीन लोग से अधिक नहीं मिल सकते. मुलाकात भी मात्र दस मिनटों की होगी.



चारा घोटाले में लालू प्रसाद को घेरने में सबसे बड़ी भूमिका सरयू राय, शिवानंद तिवारी, ललन सिंह और सुशील कुमार मोदी की रही. दूसरी बात है कि अभी शिवानंद तिवारी राजनीतिक कारणों से लालू प्रसाद के साथ खड़े हैं. सरयू राय झारखंड में मंत्री हैं. सुशील कुमार मोदी बिहार के डिप्‍टी सीएम. ललन सिंह संघर्ष के दिनों से नीतीश कुमार के भरोसेमंद रहे हैं. बीच में, कुछ समय के लिए अलग हुए थे, पर जल्‍द ही फिर से साथ हो गये.

बचा रहे थे
ललन सिंह. फाइल फोटो

मंत्री ललन सिंह को ‘कागजों का डाक्‍टर’ कहा जाता है. वे दूसरों के लिए बिना मतलब-सा दिखने वाले कागज को भी संभाल कर रखते हैं. पता नहीं, कब काम आ जाए. चारा घोटाले के पर्दाफाश में भी कागजों को जुटाने-सहेजने का सबसे बड़ा काम ललन सिंह और सरयू राय ने ही किया था.

लेकिन आज की जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रही हूं, वह चारा घोटाले के भांडा फूटने के पहले सन् 1992 की है. लालू प्रसाद 1990 में मुख्‍यमंत्री बने थे. दो वर्षों के भीतर ही लालू प्रसाद ने जैसा चाल-ढ़ाल अख्तियार कर लिया था, नीतीश कुमार का मन विद्रोही बन गया था. पर, अभी खुले तौर पर नहीं. हां, जानने को जरुरी यह कि इस वक्‍त तक केन्‍द्र में प्रधानमंत्री विश्‍वनाथ प्रताप सिंह की सरकार का पतन हो चुका था. ऐसे में, नीतीश कुमार भी देवी लाल के अधीन कृषि राज्‍य मंत्री की कुर्सी खो पैदल चुके थे.

सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
बिहार भवन पहुंचे थे नीतीश कुमार

आगे की पुरानी कहानी बताने का आधार देश के सीनियर जर्नलिस्‍ट संकर्षण ठाकुर की बुक Single Man : The Life And Times Of Nitish Kumar Of Bihar है. बात 1992 के अंतिम महीनों में किसी समय की है. लालू प्रसाद से नीतीश कुमार का मतभेद सतह पर आने लगा था. तब भी नीतीश कुमार गुड गवर्नेंस की बात पर ही लालू प्रसाद से लड़ रहे थे.

नई दिल्ली का बिहार भवन (फाइल फोटो)

लालू प्रसाद मुख्‍यमंत्री की हैसियत से दिल्‍ली के बिहार भवन में आए हुए थे. ऐसे में, नीतीश कुमार बिहार के एक गुट के नेताओं के साथ लालू प्रसाद से मिलने को गये. वे अपने साथ कुछ ऐसे कार्यों की सूची ले गए, जो वह चाहते थे कि होने चाहिए. वहां शिवानंद तिवारी, वृष्णि पटेल और ललन सिंह मौजूद थे. भाजपा नेता सरयू राय भी दूसरे कमरे में थे. सरयू राय तब नालंदा और सोन क्षेत्र के किसानों के सिंचाई तथा बिजली मुद्दे को तेजी से उठा रहे थे. इन मुद्दों पर बिहार में किसान महीनों से शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, पर कोई नतीजा नहीं निकल रहा था. नीतीश कुमार इसका समाधान भी लालू प्रसाद से चाहते थे.

सरयू राय मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद से मिलने को नीतीश कुमार के साथ कमरे के भीतर नहीं गये. वे नीतीश कुमार तथा अन्‍य लोगों का मीटिंग से लौटने का इंतजार कर रहे थे.

और अब चिल्‍ला रहे थे लालू प्रसाद

किसी को ठीक से याद नहीं कि अचानक क्‍या हुआ कि बिहार भवन में मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद के कमरे में नीतीश कुमार की चल रही बैठक में कुछ मिनटों के भीतर ही सब कुछ गाली-गलौज में बदल गया और मुक्‍केबाजी होने लगी. ललन सिंह को भी गुस्‍सा बहुत आता है. वे जवाब देने से नहीं चूकते हैं.

   लालू प्रसाद (फाइल फोटो)

लालू प्रसाद की चीख-चिल्‍लाहट सबसे ऊपर थी. उनका सारा गुस्‍सा ललन सिंह पर फूट रहा था , जिसे उन्‍होंने बड़े आक्रोश के साथ इशारा करते हुए कहा – ‘निकल बाहर, बाहर निकल.’ हल्‍ला – गुल्‍ला बिहार भवन के ग्राउंड फ्लोर पर वीवीआईपी गलियारे में किसी विस्‍फोट की तरह गूंजने लगा. सीन कुछ ऐसा था कि गालियां गोलियों की माफिक छूट रही थी.

जैसा भाजपा नेता सरयू राय ने देखा

दूसरे कमरे में नीतीश कुमार की वापसी का इंतजार कर रहे भाजपा नेता सरयू राय यह देखने के लिए बाहर निकल आए कि माजरा क्‍या है. उन्‍होंने वीवीआईपी दरवाजे पर धक्‍का-मुक्‍की होती देखी. लालू प्रसाद को अपने सभी सिक्‍योरिटी को आवाज लगाते सुना गया, जो कॉरिडोर के आगे कहीं सो रहे थे. ‘ पकड़ के फेंक दो बाहर, ले जाओ घसीट के ! ‘ मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद शायद ललन सिंह को ही बाहर ले जाने के लिए चीख रहे थे.

झारखंड सरकार में मंत्री सरयू राय (फाइल फोटो)

लेकिन इससे पहले कि लालू प्रसाद किसी को भी जिस्‍मानी रुप से बाहर उठवाकर फेंकवा पाते, नीतीश कुमार अपने साथ आए लोगों को लेकर वहां से हट गए और यह कहते, बड़बड़ाते हुए कि ‘अब साथ चल पाना मुश्किल है’…. बिहार भवन से बाहर हो गए.

लालू प्रसाद ने भेजा है संदेश, बताया है कि कौन देखेगा अब उनका ट्विटर हैंडल
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