बिहार में ‘पीला सोना’ के लिए क्या पशुपति बन पाएंगे ‘पारस’, फूड प्रोसेसिंग का सूबे के उद्योगों को मिल पाएगा फायदा!

लाइव सिटीज, राजेश ठाकुर : केंद्रीय कैबिनेट का विस्तार हो गया. इस बार बिहार से दो नए मंत्री बने हैं. इसमें लोजपा से पशुपति कुमार पारस भी शामिल हैं. पशुपति कुमार पारस अब केंद्रीय मंत्री बन गए हैं. उन्हें फूड प्रोसेसिंग डिपार्टमेंट की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी मिली है. पशुपति कुमार पारस अब केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री हो गए हैं. इससे बिहार को बड़ी उम्मीद जगी है. बिहार में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए बहुत कुछ करने को है. सबसे बड़ा क्षेत्र ‘पीला सोना’ यानी मक्का का है. इससे अब सवाल भी उठने लगा है कि क्या पशुपति कुमार पारस बिहार के इस ‘पीला सोना’ के लिए सच में ‘पारस’ बन पाएंगे? मक्का के अलावा लीची, मखाना, मशरूम, केला, प्याज आदि के क्षेत्र में भी फूड प्रोसेसिंग के लिए वे कुछ करेंगे? बिहार में इससे जुड़ी कोई फैक्ट्री खुलेगी?

बिहार फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की अपार संभावनाएं हैं. यहां के उद्योगपति भी मानते हैं कि फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के बड़े उत्पादक के रूप में राज्य आगे बढ़ सकता है. फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री बनाए जाने की मांग आज की नहीं है, बल्कि वर्षों से हो रही है. सरकार की ओर से भी टाइम टू टाइम कहा जा रहा है कि बिहार फूड प्रोसेसिंग का हब बनेगा. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि यह हब कब बनेगा? हालांकि, बिहार के नए उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन के प्रयास से बिहार में इथनॉल उत्पादन के क्षेत्र में काफी कुछ हो रहा है. कई निवेशकों ने यहां इथनॉल फैक्ट्री के लिए निवेश भी कर रहे हैं. वहीं शहनवाज हुसैन अब टेक्सटाइल उद्योग पर फोकस कर रहे हैं. लेकिन लोग मान रहे हैं कि यदि केंद्र का सहयोग बिहार को मिले तो यह राज्य फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित हो सकता है.

खास बता कि बिहार मक्का के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान है. हनी में चौथे स्थान पर तो सब्जी के मामले में 7वें स्थान पर है. इसी तरह, फल एवं डेयरी उत्पादन में अपना राज्य आठवें स्थान पर है. हाल ही में सरकार की ओर से कहा गया था कि बिहार में जापानी औद्योगिक एरिया का निर्माण कराया जाएगा. यह फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में होगा. इसी को लेकर बिहार में औद्योगिक नौति-2016 लागू की गई है. इसमें सिंगल विंडो के तहत 30 दिनों में निवेश प्रस्ताव की स्वीकृति दी जाती है. औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 के तहत सभी अनुदान स्वीकृत किए जाते हैं. बिहार के लिए तो यह खुशी की बात है कि यहां के ही सांसद पशुपति कुमार पारस अब केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री बन गए हैं. अब वे अपने राज्य के लिए कितने फायदेमंद होते हैं, यहां कितनी फैक्ट्रियां लगती हैं या मंत्रालय केवल झुनाझुना साबित होगा, यह आने वाला समय बताएगा?

मक्का का है बड़ा क्षेत्र, उत्पादन में अमेरिका भी पस्त
बिहार में मक्का का बड़ा क्षेत्र है. 38 में से लगभग दर्जन भर जिलों में मक्के की जबर्दस्त खेती होती है. इस साल अप्रैल में तो चौंकाने वाले आंकड़े आए थे. सूबे के सात जिलों पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया और समस्तीपुर में मक्के का उत्पादन प्रति एकड़ 50 क्विंटल के रेशियो से हो रहा है. इन सात जिलों ने मक्का उत्पादन में अमेरिका को भी पछाड़ दिया है. अमेरिका में इलिनोइस, आयोवा और इंडियाना में यह आंकड़ा 48 क्विंटल के आसपास है. ऐसे में यहां मक्का से जुड़े इलाकों में मक्का प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का काम हो तो यहां के किसानों को फायदे ही फायदे होंगे.

2016 में मिला था बिहार को कृषि कर्मण पुरस्कार
2016 में तो मक्के का उत्पादन चरम पर था. इसके लिए केंद्र सरकार ने बिहार को कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया था. सरकार फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को सीधे किसानों से मक्का खरीदने की इजाजत देकर इसकी खेती को बढ़ावा दे सकती है. बता दें कि मक्के का जीडीपी की बढ़ोतरी में भी अहम योगदान है. बदलते हुए समय में इसकी प्रोसेसिंग बड़े पैमाने पर करायी जाए तो इससे इनकम भी अच्छा-खासा होगा. सबसे बड़ी बात कि यह अभी के समय में खान-पान भी फिट बैठता है. स्टार्च और पोल्ट्री उद्योग की ओर से भी मक्के की जबर्दस्त डिमांड है. ऐसे में इन दोनों उद्योगों को भी बढ़ाने की जरूरत है.

लीची प्रोसेसिंग से चमक सकता है उत्तर बिहार
बिहार में लीची प्रोसेसिंग का बड़ा स्कोप है. यहां यूनिट भी लगी है. लेकिन सही से काम नहीं हो रहा है. यदि सही से काम किया जाए और यूनिट की संख्या बढ़ायी जाए तो मुजफ्फरपुर समेत पूरा उत्तर बिहार चमक सकता है. लीची को तो जियो टैग भी मिल चुका है. यहां की ​लीची विदेश भी जाती है. इस बार तो जम्मू-कश्मीर में भी बिहार से लीची और आम के पौधे मंगाए गए हैं, ताकि घाटी के लोग भी यहां की​ मिठास का टेस्ट ले सके. लीची से कई प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. इनमें लुगदी, रस, लुगदी स्लैब, जैम, जेली, ड्रिंक्स आदि शामिल हैं. यदि ऐसा होता है तो सूबे के स्थानीय उत्पादकों के लिए काफी फायदेमंद होगा.

मैंगो प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भी हैं सभावनाएं
लीची की तरह मैंगो प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भी यदि सरकार ध्यान दे तो यहां के स्थानीय उत्पादकों को काफी फायदा मिलेगा. आम के क्षेत्र में भी भागलपुर का जर्दालू, मालदह समेत पटना के दीघा का दुधिया मालदह, मुंगेर का मालदह का काफी नाम है. यदि लुगदी, रस, लुगदी स्लैब, पाउडर, जैम, जेली, पेय आदि प्रोडक्ट के लिए प्रोसेसिंग यूनिट को बढ़ावा दिया जाए तो आमों की स्थानीय किस्म को लाभ मिल सकता है. इससे पूर्व बिहार का इलाका चमक सकता है. यूनिट बनने से मार्केट में डिमांड होगी और लोग इसकी खेती से भी जुड़ेंगे. स्थानीय लोग रोजी-रोजगार से जुड़ेंगे तो पलायान की समस्या भी खत्म होगी.

मिथिलांचल में पनप सकता है मखाना उद्योग
राज्य सरकार भी चाहती है कि बिहार में मखाना उद्योग को बढ़ावा मिले. शहद और शाही लीची की तरह ही मखाना की ब्रांडिंग पर भी जोर दिया जाए. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मखाना प्रोसेसिंग व इसके प्रोडक्ट्स के लिए मार्केट को बढ़ावा देने को कहा था. उन्होंने यह भी कहा था कि मखाना का व्यापार बिहार से ही हो, इसकी योजना बनाएं. इससे राज्य की इकनॉमी भी मजबूत होगी. इसके लिए क्लस्टर तैयार करने पर भी जोर दिया गया था. बता दें कि मखाना प्रोसेसिंग के तहत मखाना पॉप, भुना हुआ मखाना स्नैक्स, बेबी फूड आदि प्रोडक्ट्स की जबर्दस्त मार्केटिंग हो सकती है. इससे मिथिलांचल के साथ ही पूरे बिहार को फायदा होगा. रोजगार के साथ ही राजस्व का भी लाभ होगा.