सौ साल का हो गया पटना जीपीओ, शनिवार को मनेगा शताब्दी समारोह

लाइव सिटीज डेस्क: पटना का जीपीओ हैरिटेज बिल्डिंग की सूची में शामिल है. शनिवार को इसकी शताब्दी मनायी जा रही है. बता दें कि अंग्रेजों ने 1 जुलाई, 1917 को इसका निर्माण करवाया था. इस ऐतिहासिक भवन का निर्माण ब्रिटिश आर्किटेक्ट ने किया था. पहले इसका नाम बांकीपुर डाकघर था. बता दें कि बांकीपुर पटना का पुराना नाम भी है. एक सौ साल पहले इस भवन का निर्माण 2 लाख 67 हजार 667 रुपये की लागत से कराया गया था.

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पटना से जारी हुआ था पहला प्रीपेड टिकट

सबसे खास बात तो यह है कि दुनिया का पहला प्रीपेड टिकट वर्ष 1773 में राजधानी पटना में शुरू हुआ था. इसे ‘तांबे की टिकट’ या ‘अजीमाबाद इकन्नी’ या ‘अजीमबाद अटेंनमी’ के रूप में जाना जाता है. राज्य में जीपीओ सबसे पहला नाइट पोस्ट ऑफिस बना था, जहां सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच काम होता है.

आधुनिकता के साथ हेरिटेज भी…

बदलते समय के साथ पटना जीपीओ में अब बहुत कुछ बदल गया है. लेकिन पुराने दिनों की याद दिलाने यहां ब्रिटिया महारानी विक्टोरिया के शासनकाल का लेटर बॉक्स आज भी रखा हुआ है. हालांकि यह 1874 से 1911 ई. के बीच चलन में था. लोहे से बने 4 फीट लंबाई के इस लेटरबॉक्स के सबसे ऊपरी भाग में विक्टोरिया शासन का प्रतीक चिह्न बना हुआ है. उसके नीचे लेटर डालने के लिए जगह बनाई गई है. इसे इतिहास के रूप में रखा गया है.

जब विदेशी भी चले आए थे पटना

पटना जीपीओ में असिस्टेंट डायरेक्टर (तकनीकी) के पद पर तैनात उमेश चंद्र प्रसाद (यूसी प्रसाद) ने बिहार में खास तौर से पटनावासियों की माई स्टाम्प के प्रति खूब जागरूक किया. इसके लिए उन्होंने विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह काम किया. उन्होंने पटना जीपीओ, मॉल्स और कई अन्य डाकघरों में विशेष कैंप लगवाया. इसमें यहां के अलावा विदेशियों ने भी अपना डाक टिकट बनवाया.

किताब में समेटा जीपीओ का इतिहास

उन्होंने पटना जीपीओ के ऊपर एडवांस फेस ऑफ पटना जर्नी के नाम से एक किताब भी लिखी है. इस किताब में पटना जीपीओ का इतिहास यानी कब बना, समय-समय पर उसमें क्या बदलाव हुए, कब कौन से आयोजन आदि हुए, इन सब के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है.

खुशी है, लेकिन फण्ड नहीं…!

वहीं चीफ पोस्ट मास्टर अरुण कुमार झा ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि 100 साल होते—होते यह पूर्ण रूप से डिजिटल हो गया है और इंडियन CBS से जुड़ गया है. इसकी हमें खुशी है लेकिन सरकारी रिकॉर्ड न मिलने के कारण फंड रिलीज होने में दिक्कत आ रही है.

 

इसलिए ऊपर से किसी प्रकार का कोई समारोह का आर्डर नहीं है. हालांकि कर्मचारियों के उत्साह को देखते हुए उन्होंने कैंटीन में उनके लिए पूरी सब्जी और जलेबी के नाश्ते की व्यवस्था करवाई है. खुशी के इस मौके पर इतनी व्यवस्था तो होनी ही चाहिए.

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