पटना में 51 युगल जोड़ियों ने खाई साथ जीने-मरने की कसमें

लाइव सिटीज डेस्क (शिल्पी सिंह): रविवार को पूरे पटना में जहां भारत—पाकिस्तान के बीच चले रहे क्रिकेट और हॉकी मैच और इंडोनेशियन ओपेन बैडमिंटन प्रतियोगिता के कारण  सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था, वहीं पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में मंगल ध्वनि  गूंज रही थी. यहाँ कई जोड़े परिणय सूत्र में बंध दांपत्य जीवन की शुरूआत करने जा रहे थे.  मौका माँ वैष्णो देवी सेवा समिति के सौजन्य से सामूहिक विवाह के आयोजन का था.

इस अवसर पर 51 युगलों ने जीवन में साथ—साथ चलने की कसमें खाईं और हमेशा के लिए एक—दूसरे के हो गये.  यहाँ सामूहिक रूप से 51 जोड़े एक दूसरे के जीवन साथी और संगिनी बने.  समिति के सदस्यों की ओर से वर—वधू के परिजनों के स्वागत की भरपूर व्यवस्था की गई थी और नव दंपतियों को हर जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की भी. आशीष एंड ग्रुप ने दुलहन के जोड़े में सजी कन्याओं के मेहन्दी से लेकर मेकअप तक की जिम्मेदारी पूरी की. आपको जानकर यह आश्चय होगा कि यह आयोजन सांप्रदायिक सद्भाव की भी मिसाल कायम कर रहा था. इस आयोजन में सिर्फ हिन्दू समुदाय के लोग ही सक्रिय नहीं थे बल्कि मुस्लिम समुदाय की बेटी फाहिदा, सदमा और नाहिदा ने भी दुल्हन की मेकअप बढ़—चढ़ कर हिस्सा लिया.

बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री शिव चंद्र राम की अगुवाई में बारात 51 घोड़ों पर सवार दूल्हों के साथ निर्धारित 4 बजे महाराणा प्रताप भवन से एसके मेमोरियल हॉल पहुंची. महामहिम राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति में चयनित जोड़ों ने एक दूसरे के गले में पुष्पहार डालकर जयमाल की रस्म पूरी की. महामहिम ने समस्त वर—वधुओं को मंगल आशीष एवं सुखद भावी जीवन की असीस मंगलकामनाएं दीं. संस्था के पूर्व सचिव जितेंद्र कुमार जीतू ने बताया कि ये शादियां समाज में समरसता के जीवंत प्रतीक हैं. उन्होंने इसके भविष्य में आयोजित होते रहने की उम्मीद जतायी. इन सब के बीच संजय सिंह (आज तक) ने कैंसर के प्रति परिचर्चा कर इस रोग के प्रति पूरे समाज में जागरुकता फैलाने की अपील की.


माँ वैष्णो देवी सेवा समिति के प्रेसिडेंट जगजीवन राम ने बताया कि इस विवाह के लिए वर—वधू के चयन एवं उनकी युगल जोड़ी के निर्धारण की लंबी प्रक्रिया है. प्रत्येक बात की पूरी जांच—पड़ताल की जाती है. लंबे प्रोसेस से सबको गुजरना होता है. इसमें समिति के साथ—साथ मीडिया के साथी भी इसमें अपनी ओर से अमूल्य योगदान देते हैं. शादी के बाद जोड़ों को हर जरूरी घरेलू सामान समिति द्वारा भेंट में दी जाती है ताकि दांपत्य जीवन की शुरूआत में उन्हें सहूलियत हो.


इस मौके पर समिति द्वारा बिहार के 6 व्यक्तियों को उनके कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया. सम्मानित होने वालों में कुमार श्वेताभ (आई टी सेक्टर), सुमित सिंह (लोक सभा टीवी), अविनाश दास(पत्रकार, ब्लॉगर सह फिल्म निर्देशक), रवि अग्रवाल (समाज सेवा), पारितोष त्रिपाठी (कलाकार) एवं दीनानाथ यादव (समाजसेवा) शमिल थे.  इस मौके पर विवाह बंधन में बंधने वालों के चेहरे पर खुशियां छिपाएं नहीं छिप रही थी. और कोई खुशियों को छिपाना चाहे भी क्यों. एक नई जिंदगी जो शुरू होने जा रही थी. लाइव सिटीज टीम की मुलाकात इस अवसर पर दुल्हन बनी अन्नू कुमारी की मां से होती है. वह कहती हैं, ‘मैं हृदय से इस सेवा समिति की आभारी रहूंगी. हमेशा हमेशा के लिए मैं इस समिति केे अहसान से दबी रहूंगी. कभी इससे उबर नहीं पाउंगी. हमलोग गरीब हैं. कभी सपना में भी नहीं सोचे थे कि मेरी बेटी की शादी इतनी धूम—धाम से होगी.


वीणा कुमारी नालंदा की रहने वाली हैं और पैर से दिव्यांग हैं. अपनी बात कहते हुए वह भावना में बह जाती हैं. आंखों से आंसू की बूंदें छलक पड़ती हैं. मुश्किल से स्वयं को संभालते हुए वह कहती हैं, ‘मुझे नहीं लगता था कि मुझ जैसी लड़की की शादी कभी किसी अच्छे जगह पर हो पायेगी. मुझे तो यही लगता है कि मैं कितनी खुशकिस्मत हूं. ईश्वर ने मेरे उपर कृपा की है.’ और यह खुशी सिर्फ अन्नू की मां और वीणा के चेहरे पर ही नहीं बल्कि वहां उपस्थित समस्त दंपतियों के चेहरे पर साफ झलक रही थी. उम्मीद करनी चाहिए कि खुशियों से उनके चेहरे हमेशा दमकते रहें.

इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम को सफल करने में समिति के अध्यक्ष जगजीवन राम, सचिव प्रदीप अग्रवाल, श्रवण टिबरेवाल, अरविंद आनंद, मुकेश, गोपी तुलस्यान एवं अन्य कई समाजसेवी सक्रिय रूप से शामिल थे और व्यवस्था में कोई कमी न रह जाए इसके फिक्र करते और आयोजन की सफलता में पूरे मनोयोग से लगे हुए थे.

सामूहिक विवाह कार्यक्रम में गतिविधियों के बीच मंच का संचालन रेडियो जॉकी शशि और तन्वी तेजस्विनी ने किया.