मां के सुसाइड ने बना दिया राइटर, 2 बुक लिख चुकी हैं पटना की स्वाति, तीसरे की तैयारी

जिंदगी अगर कुछ देती है तो अक्सर बहुत कुछ छीन भी लेती है. इनकी उम्र तो है बस 27 साल लेकिन इतनी—सी जिंदगी में उसने कुदरत की तमाम चुनौतियों को स्वीकार किया है और जीता भी है. शायद जीना इसी का नाम है. लेकिन आदमी हमेशा जीतता ही है, ऐसा भी नहीं है. कुछ ऐसा हुआ कि इनकी हिम्मत भी जवाब दे गयी. इन्होंने अपनी मां को खो दिया. हमेशा हमेशा के लिए.

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जी हां, यह कहानी है पटना स्थित कंकड़बाग़ की रहनेवाली स्वाति की. उनकी मां ने सुसाइड कर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली थी. इस बात को याद कर अक्सर उनकी टीस और भी बढ़ने लगती थी. लेकिन कहते हैं न कि एक छोटी—सी चिंगारी ही ज्वाला धधकाने के लिए काफी होती है. इसी टीस ने स्वाति को अल्पवय में ही लेखिका बना दिया. आज स्वाति को न सिर्फ इंडिया में बल्कि मलेशिया में भी अलग—अलग विषयों पर प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया जा रहा है.

बेंगालुरु से MBA और फ्रांस से इंटरनेशनल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद स्वाति ने लेखन की तरफ अपने करियर को मोड़ दिया. ‘विद आउट ए गुडबाय’ और ‘अमायरा’ लिखने के बाद इन्होंने सामाजिक मुद्दे पर अब तीसरी बुक लिखनी शुरू कर दी है.

मलेशिया जाने के पहले लाइव सिटीज रिपोर्टर ने लेखिका स्वाति से मुलाकात की और उनके मन को टटोलने की कोशिश भी. स्वाति बताती हैं कि मेरी पहली बुक ‘विथआउट ए गुडबाय’ मेरी मां को डेडीकेटेड है. आखिर क्या है इस बुक की थीम? स्वाति कहती हैं, ‘इस बुक में मैंने सोसाइटी में विमेंस की स्थिति को ध्यान में रख कर लिखा है. आगे वह बताती हैं कि आज के युवा जिंदगी की लड़ाई में बहुत जल्द हार मान लेते हैं और डिफिट, डिप्रेशन और फिर सुसाइड,’ के स्टेज में में चले जाते हैं.

सुसाइड प्रिवेंशन पर आधारित उनकी दूसरी बुक ‘अमायरा’ एक फोटो स्टोरी बुक है. सौरव अनुराज मियाउ स्टूडियो द्वारा बेहतरीन फोटोग्राफी कर स्टोरी क्रिएट किया गया है. इस बुक को रियल लाइफ की घटनाओं से जोड़ते हुए लिखा गया है. सबसे खास बात यह है कि इस बुक में जितने भी कैरेक्टर लिए गए हैं, वे सभी पटना से हैं और इसकी पूरी शूट भी बिहार में ही हुई है. इस बुक को लिखने के पीछे की मंशा बताते हुए स्वाति कहती हैं कि न जाने लोग डिप्रेशन को सीरियसली क्यों नहीं लेते हैं! वह बताती हैं कि WHO के डाटा के अनुसार, हर साल आठ लाख लोगों को मौत डिप्रेशन की वजह से होती है.

इस बुक को लिखने के पीछे एक खास प्रयोजन यह भी था कि लोगों में इसके प्रति अवेयरनेस आए. इस बुक के जरिये वह यंग जेनरेशन को मैसेज देती हैं कि सक्सेस और फेल्योर तो पार्ट ऑफ लाइफ है. पॉजिटिव रहकर और होप रखकर इसपर आसानी से काबू पाया जा सकता है.

आखिर वह अपना Achievement क्या मानती हैं? स्वाति कहती हैं कि Achievement तो वह होता है जिसे देखकर आपके परिवार वालों की आंखें भर आये और वे आपसे कहें कि आपने घर का नाम रोशन किया है. मेरे परिवार ने मुझे एक राइटर के रूप में खुशी—खुशी एक्सेप्ट कर लिया. यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है, मेरा सबसे बड़ा Achievement है.

‘आज से 10 साल पहले जो यह कहा कहते थे कि राइटिंग में कोई स्कोप नहीं, आज वे मुझ पर प्राउड फील कर रहे हैं.’

आपको बता दें कि स्वाति को अभी मलेशिया में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ सुसाइड प्रिवेंनशन में प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया गया है. वह भले कहती हों कि यह मेरे लिए गर्व की बात है लेकिन वास्तव में यह पटना और बिहार के लिए भी गर्व की बात है.