माना सिर आपका ‘पर्सनल’ है लेकिन मर्जी आपकी नहीं चलेगी !

पटना (विमलेंदु सिंह) : सड़क सुरक्षा के लिए बहुत पहले एक विज्ञापन आता था. मर्जी है आपकी आखिर सिर है आपका. ज्यादातर लोगों इस हिदायत का नहीं माना. लोग मनमर्जी करने लगे. मर्जी है तो हेलमेट पहना, वरना सारे कायदे कानून ठेंगे से. ट्रैफिक पुलिस को सख्ती करनी पड़ी. हेलमेट पहनना अनिवार्य करना पड़ा. चालक के लिए तो पहले से था, सवार के लिए भी यह जरूरी हो गया. दरअसल सिर्फ इस लापरवाही से हर रोज काफी संख्या में लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं और अपने पीछे छोड़ जाते हैं रोता—बिलखता परिवार. तमाम परेशानियां. अनिश्चितता. सबकुछ अधर में. आश्रितों के जीवन की नैया डगमगाने लगती है.

ध्यान रखें सिर्फ आपकी सही ड्राइविंग ही आपकी सुरक्षा के लिए काफी नहीं है. दूसरों की ड्राइविंग पर भी सड़क पर दूसरों की जिंदगी तबाह होती है. सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाह लोग हेलमेट की क्वालिटी के प्रति निहायत ही लापरवाह होते हैं. उन्हें पॉकेट फ्रेंडली और फैशनेबल हेलमेट की तलाश रहती है. उन्हें ट्रैफिक पुलिस के चलान काटने से बचने की चिंता होती है न कि अपने जीवन सुरक्षा की. लोगों की इसी प्रवृत्ति को देखकर बैंगलुरू ट्रैफिक पुलिस ने अब अतिरिक्त सख्ती बरतने का फैसला किया है. नॉन—आईएसआई हेलमेट को भूल जाइए. टोपीनुमा फैशनेबल हेलमेट को गुडबॉय आपको कहना ही पड़ेगा.

हेलमेट सिर की सुरक्षा करने के लायक तो हो

बैंगलुरू पुलिस ने ऐसे बाइकर्स के हेलमेट को जब्त कर उसे नष्ट करने का मुहिम छेड़ा है. ऐसे बाइकर्स जो हाफ या ओपन फेस हेलमेट पहनते हैं उसके प्रति बैंगलुरू पुलिस ने बेहद सख्ती भरा रवैया अपनाना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं ऐसे बाइकर्स से जुर्माना की वसूली भी की जा रही है जो नॉन—आईएसआई हेलमेट पहनकर बाइक चलाते पकड़े जाते हैं. पुलिस तत्काल उनके हेलमेट को जब्त कर ले रही है और बाद में उसे डिस्ट्रॉय कर दे रही है. ऐसा नहीं है कि इस मुहिम में सिर्फ बाइकर्स को ही भुगतना पड़ रहा है. ऐसे बगैर काम का दिखावटी लुचुर—पुचुर हेलमेट को बेचने वाले दुकानदार पर भी शिकंजा कसा जा रहा है.

बिना हेलमेट ड्राइविंग खतरनाक है आपकी जिंदगी के लिए

आपको यह पता ही है कि सड़क सुरक्षा की दृष्टि से बाइकर्स के लिए हेलमेट पहनना पूरे देश में अनिवार्य है. हालांकि इसके लिए स्पष्ट गाइड लाइन्स है कि बाइकर्स को केवल और केवल आईएसआई मार्का हेलमेट ही पहनना है बावजूद इसके वे निहायत ही घटिया, दिखावटी और एक झटके में चकनाचूर हो जाने वाला हेलमेट खरीदते और पहनते हैं, बस कुछ पैसे बचा लेने के चक्कर में. ऐसे में कुछ पैसे भले ही बच जाएं लेकिन जिंदगी दांव पर लग जाती है. अपनी भी और दूसरों की भी.

सिर की सुरक्षा के नाकाबिल

इतना ही नहीं, सड़क दुर्घटना में हर साल भारी संख्या में होने वाली मौत के बावजूद नॉन—आईएसआई हेलमेट पहनने या बेचने वालों के लिए कोई सख्त कानून नहीं है. थोड़े जुर्माने भरने मात्र से उन्हें मुक्ति मिल जाती है. ज्यादातर लोग ले—देकर मामला मैनेज भी कर लेते हैं. इससे जिंदगी की सुरक्षा नहीं होती है. बिक्री होती है इसलिए दुकानदार ऐसे हेलमेट का स्टॉक रखते भी हैं. महज 60 से 100 रुपये तक में हेलमेट आपके सिर को सुशोभित करने लगता है. यह जान लीजिए कि ऐसे हेलमेट को कुछ वजह से ही आईएसआई सर्टिफाइड नहीं किया जाता है.
उन सबके लिए जिन्हें यह मालूम नहीं है कि आईएसआई इंडियन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट प्रमाणीकरण चिह्न है जो भारतीय मानक ब्यूरो —ब्यूरो आॅफ इंडियन स्टैंडर्ड— द्वारा स्वीकृत होता है.

गुणवत्ता की निशानी

ISI का मार्का सिर्फ वैसे ही प्रोडक्ट को प्रदान किया जाता है जो कुछ खास दिशा—निर्देश के अनुरूप सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है. यह चिह्न इस बात को सत्यापित करता है और कंज्यूमर्स को भरोसा दिलाता है कि आप जो सामान खरीद रहे हैं उसपर आप भरोसा कर सकते हैं और वह आपकी सुरक्षा कर पाने में सक्षम है. ऐसे हेलमेट का वैसी ही परिस्थितियों में परीक्षण कर परख लिया जाता है. अगर वह मानक पर खरा उतरता है तो उसे आईएसआई मार्क प्रदान किया जाता है. कहने की जरूरत नहीं कि किसी प्रोडक्ट के लिए आईएसआई मानक हासिल करना कोई बच्चों का खेल नहीं है. इसका कई चरणों में परीक्षण होता है. अगर इसमें जरा भी त्रुटि का पता चलता है तो समझिए कि खेल बिगड़ा.

हेलमेट ऐसा हो जो मानकीकृत हो

यह हमेशा ध्यान में रखें कि फैशनेबल लुक या सस्ता होने के कारण हेलमेट की खरीदारी सुसाइडल है. यह मानकर चलिए कि दुर्घटना की स्थिति में ऐसा हेलमेट अपनी रक्षा ही नहीं कर पाएगा तो आपके सिर को क्या बचाएगा! ऐसे हेलमेट के निर्माण में घटिया क्वालिटी का प्लास्टिक इस्तेमाल होता है. वह बहुत टफ नहीं होता है. इसकी फिटिंग भी सही नहीं होती. एक हल्के झटके से भी हेलमेट आपके सिर से और जिंदगी आपसे जुदा हो सकता है. कहने की जरूरत नहीं कि बैंगलुरू पुलिस की यह मुहिम प्रशंसनीय है और आमलोगों की सुरक्षा के लिए है और दूसरे राज्यों को भी ऐसी मुहिम की शुरूआत करना चाहिए.

लाइव सिटीज भी लोगों से आईएसआई मार्का हेलमेट पहनकर ही बाइक चलाने का अनुरोध करता है, कंपनी चाहे कोई भी हो. हमेशा याद रखें कि घर पर आपका कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा है. आप उनसे यूं ही जुदा न हों.

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आकाशवाणी के युववाणी कार्यक्रम से पत्रकारिता का संक्रमण लगा. छात्रजीवन में स्वतंत्र रूप से लेखन. तदुपरांत नवभारत टाइम्स के 'हैलो दिल्ली' और 'शुभागमन' एवं दैनिक जागरण के 'नोयडा सिटी' 'जोश' एवं 'प्रॉपर्टी' के लिए दो वर्षों तक फीचर लेखन. 'विचार सारांश', 'मेरी संगिनी', 'द संडे इंडियन' 'चौथी दुनिया' में सब एडिटर, असिस्टेंट एडिटर, एसोसिएट एडिटर, डिप्टी एडिटर की जिम्मेवारी संभालने के बाद. ढाई वर्षों तक स्वतंत्र रूप से अनुवाद का कार्य. इंटरेस्ट का फील्ड आर्ट, कल्चर, ट्रेवल, फूड, कॅरियर वगैरह. ढाई वर्षों तक 'किलकारी', बिहार बाल भवन, मगध प्रमंडल, गया में प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक. संप्रति विगत एक साल से बिहार के सबसे प्रमुख वेब पोर्टल 'लाइव सिटीज' से जुड़कर कार्य. मुख्य अभिरूचि ट्रैवल, फोटोग्राफी, म्यूजिक, थियेटर

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