सावन के आते ही सज गया है मेहंदी का बाजार

सावन में मेहंदी की भीनी खुशबू से घर-आंगन तो महकता ही है, महिलाओं की हथेलियों की सुंदरता में भी चार चांद लग जाता है. इसलिए कहा भी गया है कि मेहंदी के बिना नारी का सौंदर्य अधूरा होता है. सावन में कलाइयों में सजी हरी—हरी चूड़ियां और मेहंदी से सजे हाथ को देखकर किसका मन न गदगद हो जाए. इसलिए तो सावन की शुरूआत से पहले ही महिलाओं और लड़कियों का मेंहदी की दुकान पर आना—जाना शुरू हो जाता है.

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सावन में मेहंदी लगाना एक परंपरा भी है. लोग इस परंपरा को निभाते हैं. मान्यता है कि जिसके हाथ की मेहंदी जितनी रंग लाती है, उसे उतना ही अपने पति और ससुराल का प्यार मिलता है. पहले लोग घरों में भी मेहंदी से अपने हाथ सजा लिया करते थे. लेकिन अब बहतु कम लोग ही घरों में यह जहमत उठाना पसंद करते हैं. इसकी वजह भी है. दरअसल बाजार में मेहंदी लगानेे वालों की भर है. एक से एक हुनरमंद हाथ. पलक झपकते ही आपकी हाथों में मेहंदी रचाकर तैयार. और डिजायन ऐसी कि आप अपलक निहारते रह जाएं.

यूं तो पटना ही क्या किसी भी शहर में सालो भर मेहंदी लगाने वाले उपलब्ध रहते हैं. लेकिन तीज—त्योहार और सावन में तो इसकी तादाद कई गुनी हो जाती है. सावन में पटना का कोई भी ऐसा मार्केट कांप्लेक्स नहीं होगा जहां मेहंदी लगाने वाले नहीं होंगे. मेहंदी लगाने वाले डिजाइन के अनुसार अपनी-अपनी रेट निर्धारित करते हैं. इसे इस तरह भी समझें कि जितनी जटिल डिजायन, उतना ही ज्यादा वक्त उसे तैयार करने में लगता है. जाहिर है, इसके लिए थोड़ा खर्च तो करना ही पड़ेगा.

इस सावन के मौके पर लाइव सिटीज ने पटना के अलग—अलग इलाकों में मेहंदी स्टाल पर जाकर सावन स्पेशल मेहंदी और उसका रेट जानने की कोशिश की. पता चला कि इन दिनों महिलाएं 50 रुपये से लेकर 400 रुपये (प्रति हाथ) तक मेहंदी रचा रही हैं. रेट मौके पर कम या ज्यादा हो सकता है. कस्टमर्स कम हों तो रेट कम करने की गुंजाइश बनी रहती है. वरना कई बार ज्यादा भी खर्च करना पड़ता है.

राजस्थानी और अरेबिक मेहंदी की डिमांड

चुन्नीलाल मेगा मार्ट के बाहर मेहंदी लगाने वाले रमेश राय बताते हैं कि यहां हर उम्र की महिलाएं मेहंदी लगवाने आती हैं. विभिन्न डिजायन में राजस्थानी, अरेबिक, बांबे गोल्ड, सिल्वर और ब्लैक मेहंदी लगवाते हैं. शनिवार और रविवार होने के कारण मेहंदी लगवाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ गयी है. छुट्टियों के दिन आउटिंग ज्यादा होती है और इसका असर मेहंदी स्टॉल पर भी नजर आ रहा है.

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पटना के डाक बंगला चौराहे के पास ही है मौर्यालोक कांप्लैक्स. यहां मेहंदी स्टॉल की भरमार है. सभी एक से बढ़कर एक हुनरमंद आर्टिस्ट. सबसे ज्यादा यहीं भीड़ नजर आ रही है मेहंदी लगवाने वालों की. यहां ‘अपना मेहंदी वाला,’ ‘ओम साईं मेहंदी आर्ट और ‘राजा मेहंदी वाले’ सहित कई दुकाने सजी हैं. यही हाल खेतान मार्केट, पटना मार्केट और हथुआ मार्केट में भी नजर आ रहा है. बेली रोड के केशव पैलेस में ‘सुरेश मेहंदी वाले’ और ‘क्लासिक मेहंदी वाले’ पूरी तल्लीनता के साथ मेहंदी लगाने में जुटे हुए हैं और कई महिलाएं उन्हें गौर से निहार रही हैं. शायद परख रही हैं कि किससे मेहंदी रचवाना सही रहेगा.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाएं ही मेहंदी लगवाने आई हैं. लड़कियों में के बीच भी इसका आकर्षण है. लड़कियों को बेल डिजाइन, अरेबिक, बैंगल डिजाइन, चूड़ी डिजाइन ज्यादा आकर्षित करता है. मेहंदी लगवाने आईं सोनाक्षी कहती हैं कि सावन में मेहंदी लगवाने में लड़कियां भी पीछे नहीं रहतीं. वह कहती हैं, “लड़कियां बेल डिजाइन, अरेबिक, बैंगल डिजाइन, चूड़ी डिजाइन ज्यादा पसंद कर रही हैं, जबकि विवाहिताएं राजस्थानी और दुल्हन डिजाइन पसंद कर रही हैं.”

एक और महिला अनामिका कहती हैं कि पंडितों का कहना है कि सावन में हाथ सूना नहीं रखना चाहिए, यही कारण है कि मैं सावन में मेहंदी लगाना नहीं भूलती. वह मानती हैं कि इधर कुछ वर्षों से इसका चलन काफी बढ़ गया है. बहरहाल, सावन के महीने में जहां महिलाएं अपनी खूबसूरती को बढ़ाने के लिए मेहंदी रचा रही हैं, वहीं मेहंदी लगाने वाले भी अपनी कमाई बढ़ने से खूब खुश हैं.

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