आरजे अंजलि के प्रति ऐसी दीवानगी, देखी नहीं कभी

पटना: आरजे अंजलि ने फेसबुक पर अपनी प्रोफाइल पिक्चर चेंज की है. तस्वीर बेहद खुबसूरत है. स्विट्जरलैंड की मनोरम वादियां और पिंक शिफान की साड़ी में आरजे अंजलि ने आंखों पर सुंदर-सा गॉगल्स लगा रखा है जो उनके रूप-सौंदर्य में और भी चार चांद लगा रहा है. हमेशा की तरह उनके चेहरे पर एक मोहक मुस्कान तैर रही है. ठीक वैसी ही जैसी उनकी उन्मुक्त हंसी और शरारती खिलखिलाहट को सुनने लोग रेडियो मिर्ची ट्यून कर उनका इंतजार कर रहे होते हैं. और हां उनकी बतकही का भी तो इंतजार रहता है. यहां अपनी बतकही उन्होंने तस्वीर के साथ पोस्ट की है. लिखा है, ‘स्विट्जरलैंड की वादियां और शिफॉन की साड़ी. अब इससे ज्यादा फिल्मी क्या हो सकता है!’

studio11

आरजे अंजलि ऐसी पोस्ट करें और उनके चाहने वाले चुपचाप बैठे रहें भला ऐसा कैसे हो सकता है! आखिर उनकी फैन फॉलोइंग भी तो जबर्दस्त है. न सिर्फ तब जबकि वह ऑन एयर होती हैं बल्कि तब भी जब वह सोशल मीडिया पर एक्टिव होती हैं तब भी. अजी लाइक और कमेंट्स की तो छोड़ ही दीजिए. वह तो इतनी है कि कैलकुलेशन में कैलकुलेटर भी हांफने लगे! आपको बता दें कि रेडियो मिर्ची की मशहूर आरजे अंजलि इन दिनों स्विट्जरलैंड गई हुई हैं. उनके लाखों चाहने वाले इन दिनों उन्हें बुरी तरह मिस कर रहे हैं. उनके फेसबुक फ्रेंड्स अपने कमेंट्स में यह इजहार करने से जरा भी नहीं चूक रहे. फेसबुक पर उनके फ्रेंड्स के कमेंट्स में भी उनके प्रति अथाह प्यार और स्नेह झलकता और छलकता है.


तस्वीर: आरजे अंजलि सिंह के फेसबुक पोस्ट से साभार

अब उनके इस एफबी पोस्ट को ही लीजिए. उनके चाहने वालों ने इसपर कमेंट्स की झड़ी-सी लगा दी है. आप खुद देखिए न. प्रभात कुमार सम्राट लिखते हैं, ‘बिहार में मानसून अभी तक नहीं आया है क्योंकि अंजलि सिंह स्विट्जरलैंड जो चली गई हैं.’ अजीत कुमार गुप्ता ने लिखा है, ‘मैडम जी, सुंदर वादियों में आप भी बहुत खुबसूरत लग रही हैं.’ वेद प्रकाश ने लिखा है, ‘स्विट्जरलैंड की वादियों से भी ज्यादा खुबसूरत.’ वहीं भगीरथ कुमार भार्गव लिखते हैं, ‘क्या बात है! पूरा बिहार जैसे स्विट्जरलैंड चला गया!’ वहीं रणधीर यादव का कमेंट्स है, ‘आज तो मौसम भी शर्मा जाएगा.’ पवन वर्णवाल के कमेंट्स पर भी एक नजर डाल ही लीजिए. वह लिखते हैं, ‘बस एक हीरो की कमी है…फिल्मी फ्राईडे पूरा हो जाएगा.’

अरे नहीं पवन वर्णवाल जी, समझ लीजिए उनके फिल्मी फ्राईडे मुकम्मल है. अब इसमें कोई कमी नहीं है. कमी तो बस इतनी है कि हमारे कानों में मिश्री के बोल नहीं घुल पा रहे हैं. हम उन्हें सुन नहीं पा रहे हैं. अब किया भी क्या जा सकता है. बस उनके लौटने का इंतजार है.