मार्केट में मिल रहा मैंगो मजेदार, मजा लीजिए

लाइव सिटीज डेस्क (शिल्पी सिंह): टीन एजर्स हों या सीनियर सिटीजन्स, किड्स हों या यूथ सभी मैंगो (“Mango”) के स्वाद के मुरीद हैं. गोल—गोल, मीठे—मीठे, सुंदर और खुशबू से भरे स्वाद को कौन दिवाना नहीं होगा. पूरी दुनिया महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिला में पैदा होने वाले अल्फांसों के स्वाद का मुरीद है तो यूपी के लोगों को दशहरी के आगे दुनिया के किसी भी मैंगो (“Mango”) का टेस्ट फीका लगता है.

बात अगर बिहार की करें तो दीघा मालदह से बढ़कर भी कोई आम है भला! जी हां दीघा मालदह तो बिहार में मैंगो (“Mango”) के महाराज हैं. लेकिन बी केयरफुल, दीघा मालदह के नाम पर मार्केट में कुछ भी खपा दिया जा रहा है और  पब्लिक  जेब कटवा कर घर आ जाती है. पुराने लोगों से पूछिए, वे आज भी दीघा मालदह का जिक्र करने मात्र से पुराने दिनों की यादों में खोए नजर आएंगे.  

पटना के फ्रूट मार्केट्स में मैंगो (“Mango”) की आमद जोरों पर है. यूं तो यहां के लोग सबसे पहले दुधिया मालदह की ही तलाश करते नजर आते हैं लेकिन आपको बता दूं कि जर्दालू, बंबईया, दशहरी और लंगड़ा भी स्वाद की सत्ता में अपनी धमक कायम किए हुए है. यहां लोग इसकी भी जमकर खरीदारी कर रहे हैं. 

मैंगो  (“Mango”) एक ऐसा फ्रूट है जो बाजार में आने से पहले ही अपने आगमन की सूचना दे देता है. जब पेड़ पर मंजर आते हैं और छोटी—छोटी अमियां, जिसे लोग टिकोला के नाम से भी जानते हैं, के आते ही इसकी खुशबू लोगों को मदहोश करने लगती है. लोग इसके छोटे टिकोले का स्वाद लेने से भी नहीं चूकते. खट्टे टिकोलों को देखते ही न जाने क्यूं मुंह में पानी आने लगता है और एक छोटा—सा टुकड़ा मुंह में लेते ही अहा! की ​एक्साइटमेंट भरी आवाज निकल पड़ती है. 

बोतलबंद मैंगो  (“Mango”) ड्रिंक्स के बाजार में आ जाने के बाद से तो हम सालों भर मैंगो के टेस्ट का मजा ले पाते हैं लेकिन गर्मियों में मैंगों के टेस्ट लेने का मजा ही कुछ और है. इसके स्वाद के दिवानों से पूछिए वे यही कहेंगे कि इसके सामने तो सब फीका है.

बोतल बंद मैंगो (“Mango”) ड्रिंक के रूप में बेमौसम भी हम इसका स्वाद ले लेते हैं लेकिन गर्मी की छुट्टियों में गांव या नानी गांव जाकर मैंगों का मजा लेने की कल्पना से ही मन रोमांचित हो उठता है. यहां हम फिलहाल गांव या नानी गांव तो नहीं जा रहे, अलबत्ता पटना के मार्केट में आम की वेरायटी जरूर खंगाल रहे हैं. जरा आप भी एक नजर डालिए. पटना में अभी मुख्यत: आम की 10 वैरायटी उपलब्ध हैं.

हम यहां आपको इसकी जानकारी दे रहे हैं और यह भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वेरायटी देश के किस हिस्से से यहां टेस्ट बड्स को ललचाने पहुंचा है—

दुधिया मालदह: दीघा, पटना
मालदह / लंगड़ा: भागलपुर, बेतिया, बेगूसराय
बंबईया : बेतिया, नौगछिया, समस्तीपुर
जर्दालू : भागलपुर और बेतिया
गुलाबखास: बिहार के भागलपुर से और विशेषतौर पर केरल और तमिलनाडु से
सिपिया : हाजीपुर
सुक्कुल:  हाजीपुर से
मिठुआ : बेतिया से
दसहरी : उत्तरप्रदेश के लखनऊ और मलीहाबाद से
चौसा: उत्तरप्रदेश के लखनऊ और मलीहाबाद से

इतनी सारी वैरायटी में अगर कोई किंग आॅफ मैंगो (“Mango”) के खिताबी दौड़ में सबसे आगे है तो वह निस्सदंह दुधिया मालदह है. हालांकि यहां जर्दालू के भी चाहने वाले कम नहीं हैं. फिर बंबईया, लंगड़ा, दसहरी और चौसा की भी डिमांड कुछ कम नहीं है. मालदह की न केवल लोकल मार्केट में बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी इसकी जबर्दस्त मांग है.

मैंगो (“Mango”) मर्चेंट में लगे लोगों ने बताया कि दुधिया मालदह की पहली आपूर्ति बाजार में जून के पहले सप्ताह में हो जाती है. दीघा मालदह की बात करें तो इसके लिए आप दीघा की ही राह पकड़ें तो आपको आॅरिजनल दीघा मालदह का टेस्ट मिल सकता है. बाजार में दीघा मालदह के नाम पर दूसरे मालदह को खपा दिया जाता है और लोग इस झांसे में आ भी जाते हैं. अभी लोकल मार्केट में आम 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर उपलब्ध है.

मालदह / लंगड़ा की कीमत 50-60 रुपये प्रतिकिलो अभी है. हालांकि अभी यहां  दक्षिण भारतीय आमों की किस्में भी खूब दिखाई दे रही हैं. बाजारों में अभी उपलब्ध मैंगों (“Mango”) की जो वेराइटी नजर आ रही है वे दूसरे राज्यों से मंगाए गए हैं. जिन राज्यों से बिहार में मैंगों की आपूर्ति की जाती है उनमें केरल, वेस्ट बंगाल, यूपी, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं. बिहार की अगर बात करें तो भागलपुर, बेतिया और हाजीपुर जैसे स्थान मुख्य हैं जहां से आम की पैदावार पटना पहुंचती है.

कुछ स्थानों पर अभी भी भागलपुरी आमों की बिक्री ज़ोरों पर है. जहां तक वेरायटी की बात है तो गुलाबखास 70 रुपये प्रतिकिलो पर उपलब्ध है जबकि मिठुआ की कीमत 60 रुपये प्रतिकिलो देखने को मिल रहा है. ये दोनों ही आम ज्यादातर एक ही राज्य केरल से आते हैं. भागलपुर से आने वाला मालदह और बंबईया की कीमत 120 रुपये से 160 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच देखने को मिल रहा है. इसकी यह कीमत इसकी बेहतरीन क्वालिटी और आपूर्ति बहुत सीमित होने की वजह से है. सुक्कुल आम की खरीदारी ज्यादातर लोग अचार बनाने के लिए करते हैं. वैसे पका सुक्कुल आम तो सीजन के अंत में आता है.

लोगों को इसके फाइबर से परेशानी होती है लेकिन इसके जूस से तो किसी की तुलना ही नहीं की जा सकती है. इसलिए इसे काटकर नहीं बल्कि चूसकर स्वाद लिया जाता है. आम के उत्पादक संजय कुमार बताते हैं कि बाज़ार में आम दो किस्म के बेचे जा रहे है. असली दुधिया मालदह आम का गूदा ज्यादा और बीज बहुत पतला होता है. बता दें कि बाजार समिति, राजेंद्रनगर और दीघा के आसपास का इलाका पटना में आम के लिए काफी फेमस है. लोकल मार्केट में भी ज्यादातर यहां से ही आम की सप्लाई की जाती है. बोरिंग रोड चौराहा के निकट एक फल विक्रेता मोहम्मद रिज़वान कहते हैं कि मुझे प्रतिदिन 30 ग्राहक ऐसे मिलते हैं जो सिर्फ मालदह आम ही खरीदते हैं. उनमें से कुछ तो प्रतिदिन 5 किलोग्राम तक आम की खरीदारी करते हैं.”

आपको यह बता दूं कि एरिया और लोकलिटी के लिहाज से कीमत में अंतर आ सकता है. बिहार में मानसून की बरसात के बाद लोकल आम की आमद और तेज होने की उम्मीद है.

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