‘ये क्या हो गया बिहार को, नीतीश जी ! आप पर बहुत भरोसा था हमें’

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सीएम नीतीश कुमार, बिहार

लाइव सिटीज ( रजिया अंसारी ) : जब यूपी में थे तो बिहार के बारे में अक्सर सुनते थे, उस समय ज्यादा पोलिटिकल जानकारी नहीं थी. न ही पॉलिटिक्स में उतनी दिलचस्पी. लेकिन लालू यादव का नाम खूब जानते थे, राबड़ी देवी की भी खूब चर्चा होती थी. या ये कहें कि बिहार की पहचान ही लालू यादव से थी. लेकिन इसके साथ ही बिहार में जंगलराज की भी बात खूब होती थी. फिर अचानक से बिहार की छवि बदलने लगी. अचानक से सुशासन बाबू यानि नीतीश कुमार लाइम लाइट में आ गये. पता नहीं उनके टैग (सुशासन बाबू) का असर था या हकीकत में बिहार में सुशासन आ गया. लेकिन ये कह सकते हैं कि बिहार में एक युग बदल गया था. लालू युग से नीतीश युग आ गया था. इसमें बिहार भी बहुत बदला. लोगों की सोच भी बिहार के लिए बदलने लगी.

हमें ‘सुशासन बाबू’ पर पूरा भरोसा था

2 साल पहले जब हमने जॉब के लिए बिहार जाने का फैसला किया तो घर पर कोई तैयार नहीं हुआ. सबके दिमाग में बिहार के ‘जंगलराज’ वाली छवि थी. लेकिन हमें ‘सुशासन बाबू’ पर पूरा भरोसा था. तब यूपी में समाजवादी सरकार थी. अखिलेश भैया सीएम थे. काम अच्छा कर रहे थे. किंतु अपराध पर लगाम उनके बस से भी बाहर था. खैर, अभी बिहार को देखते हैं. नीतीश कुमार की शराबबंदी के फैसले से तो हम उनके फैन ही हो गये थे. मेरा मानना था अगर शराब बंद है तो बहुत सारे अपराध ऐसे भी कम हो जायेंगे. यूपी में शराब के कई दुष्परिणाम देखे थे हम. उस पर स्टोरी भी की थी. हमने सोचा चलो ड्राई स्टेट बिहार ही चलते हैं.

बढ़े अपराध ने नीतीश कुमार से भरोसा उठा दिया

बिहार आये हमें दो साल हो गये. इन दो सालों में बिहार को बदलते हमने अपनी आँखों से देखा है. जब हम बिहार आये थे मेरी आँखों में चमक थी. अब खौफ है. खौफ बढ़ते अपराध का है. बिहार में अचानक से बढ़े अपराध ने नीतीश कुमार से भरोसा उठा दिया. इतने मजबूत इंसान को अपराध के मामले में बेबस देख रहे हैं हम. ऐसा कोई भी दिन नहीं होता जब बिहार के किसी जिले से हत्या की खबर न आती हो. आलम ये है कि राजधानी पटना में ही दिनदहाड़े मर्डर हो रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले पर तबादले हो रहे हैं, लेकिन अपराध पर लगाम नहीं लग रहा है. शराबबंदी भी पूरी तरह फेल दिख रही है. हालांकि राजधानी पटना में विकास के कुछ काम जरुर दिखते हैं. पर बिहार के और जिलों की हालत अभी सही नहीं है. आपके सात निश्चय की योजना में भी भ्रष्टाचार के कीड़े लग रहे हैं. किंतु इन सबों से सबसे जरुरी है अपराध पर लगाम.

बिहार की जनता को सुशासन चाहिए

नीतीश कुमार पलटी मार कर महागठबंधन छोड़ बीजेपी के साथ हो लिए. जबकि इनकी सोच और विचारधारा बीजेपी से बिलकुल अलग है. पता नहीं यह कैसे मैनेज करते हैं. कुर्सी पर तो यह महागठबंधन में भी थे. अब भी हैं, लेकिन अब इनमें पावर कम दिख रही है. महागठबंधन से हटने की उनकी क्या मजबूरी थी, और अब बीजेपी के साथ रहने की क्या मज़बूरी है, हमें इस पर डिस्कस नहीं करना. यह उनके मन की बात है. लेकिन हमें नीतीश कुमार पर भरोसा था, उनके सुशासन पर भरोसा था, जो अब टूट रहा है. वह बीजेपी के साथ रहें या महागठबंधन के साथ, बिहार की जनता को सुशासन चाहिए. अब ज्यादा वक़्त नहीं है. सुशासन वाले नीतीश बाबू अच्छे से विचार कर लीजिये. नहीं तो ‘जंगलराज पार्ट टू’ आ जायेगा.

( डिस्‍क्‍लेमर : आलेख में व्‍यक्‍त विचार स्‍वतंत्र रुप से रजिया अंसारी के हैं . लाइवसिटीज ने आलेख को हू-ब-हू प्रकाशित किया है. )

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बोल की लब आज़ाद हैं तेरे, बोल जबां अब तक तेरी है

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