बिहार से विशेष लगाव है श्रुति को, अब शराब बंदी और दहेज़ उन्मूलन पर बनाना चाहती हैं फिल्म

लाइव सिटीज डेस्क : छोटी सी उम्र से लेखनी की दीवानी श्रुति अनिंदिता वर्मा बिहार को लेकर एक फीचर फिल्‍म बनाना चाहती हैं, जिसमें बिहार की कहानी हो और शूटिंग लोकेशन से लेकर कास्टिंग में भी बिहार की झलक दिखे. ज़ी टीवी के लिए भारत का पहला फ़ूड एंड ट्रेवल शो ज़ायके का सफर कार्यक्रम में निर्देशन से अपनी फिल्‍मी करियर शुरू करने वाली श्रुति इससे पहले कई शॉर्ट फिल्‍म बना चुकी हैं.

महिलाओं के मसलों में ख़ास रूचि रखने वाली श्रुति ने 13 शार्ट फिल्में बनाने का निर्णय लिया. इस श्रृंखला की पहली शार्ट फिल्म है ‘भोर’, जो यौन उत्पीड़न पर आधारित है. ‘भोर’ को मुंबई इंटरनेशनल शार्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म और दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल मेंशन के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. भोर फिल्म को अब तक 100 से भी ज़्यादा स्कूल और कॉलेज के बच्चों को दिखाया जा चुका है. इनकी दूसरी शार्ट फिल्म चाइल्ड ट्रैफिकिंग के ऊपर है जिसका निर्माण शुरू हो चुका है. इस श्रृंखला की तीसरी शार्ट फिल्म दहेज़ उन्मूलन के विषय पर है, जो बिहार सरकार की भी मुहिम है.



मूलतः पटना की रहने वाली श्रुति ने सेंट जोसेफ कान्वेंट से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर पटना विमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. शुरू से ही इनकी रूचि लेखन में थी और छोटी उम्र से ही इन्होने टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स के लिए लिखना शुरू कर दिया. मीडिया में इनकी दिलचस्पी थी इसलिए ग्रेजुएशन के बाद ही इन्होंने दिल्ली का रूख किया और बैग फिल्म्स के साथ अपने काम की शुरुवात की. टीवी के लिए इन्होंने अब तक सा रे गए मा पा, अंताक्षरी, के फॉर किशोर, राज़-पिछले जनम का जैसे कई सफल शो निर्देशित किये.

फिर बालाजी टेलीफिल्म्स, मिडिटेक और एंडेमोल जैसी बड़ी बड़ी मीडिया कंपनी में काम करने के बाद इन्होंने अपने पति अमिताभ वर्मा के साथ अपनी मीडिया कंपनी मी टू फिल्म्स की शुरुवात की और टीवी और फिल्मों के लिए काम करना शुरू किया. इस दौरान इन्होंने यूनाइटेड नेशंस के लिए भारत के प्रमुख 25 नॉन गवर्नमेंट ओर्गनइजेशन्स पर फिल्में बनायीं. बिग मैजिक बिहार के लिए पुलिस फाइल्स नाम का टीवी शो बनाया. भारत सरकार के लिए कश्मीर के शीना जनजाति पे वृत्तचित्र बनाया.

टीवी शो और फिल्मों के अलावा इनकी कंपनी गानों के निर्माण में भी दक्ष है. इन्होंने इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन (आईएलओ) के लिए उनका पहला एंथम तैयार किया, जिसे कैलाश खेर ने गाया था. इसके अलावा तिहाड़ जेल के लिए एक प्रार्थना गीत बनाया, जो अब वहां के 25000 कैदी रोज़ गाते हैं. अमिताभ और श्रुति दोनों ही बिहार के रहने वाले हैं, इसलिए दोनों की ख्वाहिश थी कि वे अपने राज्य बिहार के लिए कुछ कर सकें. इसी मंशा से दोनों ने बिहार का रुख किया और पिछले दो तीन सालों में इन्होंने बिहार में भी कई तरह के काम किये हैं.

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बिहार के विद्युत विभाग की उपलब्धियों पे इन्होंने फिल्म बनायीं. बिहार में महिलाओं के लिए कार्यरत एनजीओ जीविका के लिए फिल्म और गीत बनाये. बिहार में शराब बंदी के समर्थन में बनीं मानव श्रृंखला पर एक नहीं दो-दो फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया. शराब बंदी के लिए 10 गीतों का एल्बम बनाया, जो बिहार की ग्रामीण महिलाओं की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया और नशा मुक्ति आंदोलन में जगह जगह बजाया गया.