पवित्र स्थलों में से 1 है बिहार का राजगीर,यहां पाताल गंगा में डुबकी लगाने वाले बनते हैं धनवान

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार राज्य का राजगीर एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. यहां टूरिस्ट्स के साथ बिहार के लोगों का आना जाना लगा रहता है. यह जगह ना सिर्फ धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है बल्कि यह एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी काफी लोकप्रिय है. इस जगह पर हिंदू, जैन, और बौद्ध तीनों धर्मों के कई धार्मिक स्थल हैं. बताया जाता है कि बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी.

यहां ब्रह्मकुंड व सप्तधाराओं में स्नान की विशेष महत्ता है

यहां ब्रह्मकुंड व सप्तधाराओं में स्नान की विशेष महत्ता है. साथ ही यहां पर 22 कुंड और 52 धाराएं भी हैं. इन कुंडों में से कुछ गर्म पानी के कुंड हैं. इनमें से सबसे अलग है- ब्रह्मकुंड. इसे पाताल गंगा भी कहा जाता है. इस कुंड में नहाने से सभी बीमारियां खत्म हो जाती है. आप सेहत के धनी बन जाते हैं.

भारत के सबसे पवित्र स्थलों में से एक

पटना के समीप राजगीर को भारत के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है. यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी. राजगीर न सिर्फ एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है, बल्कि एक खूबसूरत हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है.

ब्रह्मा ने यहां 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण कराया था

देव नगरी राजगीर सभी धर्मो की संगमस्थली है. कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक यज्ञ का आयोजन कराया था. इसी दौरान आए सभी देवी-देवताओं को एक ही कुंड में स्नान करने में परेशानी होने लगी. तभी ब्रह्मा ने यहां 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण कराया था.

वैभारगिरी पर्वत की सीढिय़ों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने हैं

वैभारगिरी पर्वत की सीढिय़ों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने हैं, जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है. ऐसी संभावना जताई जाती है कि इसी पर्वत पर स्थित भेलवाडोव तालाब है, जिससे ही जल पर्वत से होते हुए यहां पहुंचता है. इस पर्वत में कई तरह के केमिकल्स जैसे सोडियम, गंधक, सल्फर हैं. इसकी वजह से जल गर्म और रोग को मिटाने वाला होता है. यहां पर आप 22 कुंडों में स्नान कर सकते हैं.

ब्रह्मकुंड सबसे महत्वपूर्ण है

इन कुंडों के नाम अलग-अलग हैं. ब्रह्मकुंड सबसे महत्वपूर्ण है. इसका तापमान 45 डिग्री सेल्सियस होता है. इसे पाताल गंगा भी कहा जाता है. सभी झरनों में स्नान करने के बाद इस कुंड में भी लोग स्नान करते हैं.

एक धारा से ठंडा और दूसरे से गर्म पानी निकलता है

जो सप्तधाराएं बहती हैं, उसके नाम भी ऋषि-मुनियों के नाम पर रखे गए हैं. 22 कुंडों में ब्रह्मकुंड के अलावा मार्कंडेय कुंड, व्यास कुंड, अनंत ऋषि कुंड, गंगा-यमुना कुंड, साक्षी धारा कुंड, सूर्य कुंड, गौरी कुंड, चंद्रमा कुंड, राम-लक्ष्मण कुंड. राम-लक्ष्मण कुंड में एक धारा से ठंडा और दूसरे से गर्म पानी निकलता है.

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