टेक टायकून बिल गेट्स कंप्यूटर के बाद अब बना रहे ‘सुपरगाय’, 1 दिन में देगी 40 लीटर से ज्यादा दूध

लाइव सिटीज डेस्क : माइक्रोसॉफ्ट नामक कम्पनी के सह संस्थापक तथा अध्यक्ष बिल गेट्स को लोग टेक टायकून के नाम से भी बुलाते हैं. बिल गेट्स दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अमीर शख्सियत हैं. लेकिन अब वो टेक की दुनिया को गाय से जोड़ने वाले हैं. जी हां, ये सच है…बिल गेट्स गाय की ऐसी नस्ल तैयार करना चाहते हैं जो ज्यादा से ज्यादा दूध दे सके.

दरअसल, बात यह है कि बिल गेट्स ने ब्रिटेन की एक जेनेटिक रिसर्च फर्म में 260 करोड़ रुपये का निवेश किया है. वो एक ऐसी गाय की नस्ल तैयार करने जा रहे हैं जो यूरोपीय गायों की तरह भरपूर दूध तो देगी ही साथ में अफ्रीकी गायों की तरह तेज गर्मी भी सह सकेगी.

‘ब्रिटिश गाय’ और ‘अफ्रीकी गाय’ की नस्ल की जरूरत

इस गाय को तैयार करने के लिए ‘ब्रिटिश गाय’ और ‘अफ्रीकी गाय’ की नस्ल की जरूरत पड़ेगी जिसे आपस में मिलाकर एक खास तरह की नस्ल वाली गाय को बनाया जाएगा. इसके लिए ब्रिटेन की सबसे अच्छी गाय की नस्ल के डीएनए को अफ्रीकी गायों की नस्ल में इंफ्यूज किया जाएगा, ताकि अधिक दूध देने वाली गाय की नई नस्ल तैयार हो सके.

यह नई नस्ल एवरेज टेंपरेचर से ज्यादा का टेंपरेचर भी आसानी से सह सकेंगी. कहा जा रहा है कि इस नई नस्ल की गाय हर परिस्थति के तापमान में आसानी से रह सकेंगी. तेज गर्मी में भी रह सकेगी गाय की यह नई नस्ल

18 लीटर से ज्यादा दूध देगी

गाय की यह नई नस्ल ‘होल्स्टिन फ्राइजियन’ नस्ल से तैयार की जाएगी. ब्रिटेन की होल्स्टिन फ्राइजियन नस्ल की गायें एक बार में 18 लीटर दूध देती हैं. गाय की यह नस्ल उत्तरी हॉलैंड, ब्रिटेन और उत्तरी जर्मनी में पाई जाती है. यह दुनिया की सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय की नस्ल है. वहीं अफ्रीकी गाय की नस्लें 1 लीटर दूध देती हैं. इन दोनों नस्लों से मिलकर तैयार की जाने वाली सुपरकाउ 40 लीटर से ज्यादा दूध देगी.

बिल गेट्स ने फर्म में 40 मिलियन डॉलर का निवेश किया है

गाय की यह नई नस्ल ग्लोबल एलायंस फोर लाइवस्टॉक वेटैनरी मेडिसिन (GALVmed) फर्म करेगी. यह स्कॉटलैंड की नॉन प्रॉफिट पशु टीकाकरण और आनुवांशिकी शोध फर्म है. माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने इसी फर्म में 40 मिलियन डॉलर का निवेश किया है.

बिल गेट्स ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि यह सच है कि गरीब, पोषण और आय दोनों के लिए अपने मवेशियों पर ही निर्भर रहते हैं. ऐसे में यह नई नस्ल उन लोगों के लिये बेहद फायदेमंद साबित होगी.

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