‘इंडियन रॉबिन हुड’ हिन्दुस्तान का वो डाकू जिसे कहते थे गरीबों का मसीहा, पुलिस भी खाते थे खौफ

लाइव सिटीज डेस्क : कौन कहता है कि डाकू सिर्फ लूटने वाले होते हैं? हिन्दुस्तान में एक डाकू ऐसा भी हुआ जिसने जितना अमीरों से लूटा उससे कहीं ज्यादा गरीबों में लुटाया, तभी तो इंड़ियन रॉबिनहुड कहलाया. यह बात आजादी के पहले की है. इस समय देश में राजा-रजवाड़ों का शासन चलता था. भारत की संपत्ति व संपदा लूटने में अंग्रेज कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे. इतना ही नहीं, अपने स्वार्थ के लिए देश के कई राजा-रजवाडे भी अंग्रेजों के साथ मिलकर देश को लूट रहे थे और जनता अनकों तरह की यातनाएं भुगतते हुए भूखी-प्यासी मर रही थी. इस समय देश में चारों ओर सिर्फ लूटपाट का ही नगाड़ा बज रहा था.

वडोदरा से लेकर दिल्ली की सरकार तक के नाक में दम कर रखा था



इसी समय वडोदरा के शासक गायकवाड परिवार को एक चिट्ठी मिलती है, जिसमें पूरे परिवार को धमकी लिखी थी..‘महल में काम करने वाले सभी 42 नौकरों को उनकी सेवानिवृत्ति के समय पांच-पांच बीघा जमीन दी जाए और इसकी जाहिर सूचना पूरे शहर में भी दी जाए. अगर आपने ऐसा नहीं किया तो परिवार के सभी सदस्यों की एक-एक कर हत्या कर दी जाएगी.’ इस धमकी भरे पत्र के नीचे नाम लिखा था.. भूपत सिंह चौहाण. यह वही भूपतसिंह था, जिसने वडोदरा से लेकर दिल्ली की सरकार तक के नाक में दम कर रखा था.

भूपतसिंह के कहर से जहां राजे-रजवाड़े और अंग्रेज कांपते थे

भूपतसिंह के कहर से जहां राजे-रजवाड़े और अंग्रेज कांपा करते थे, वहीं गरीबों के दिल में उसके लिए सर्वोच्च स्थान था. यही कारण था कि उसे ‘इंडियन रॉबिनहुड’ कहा जाता था जिसे कभी पुलिस पकड़ नहीं पाई. भूपत की कई क्रूरताभरी कहानियां हैं तो कई उसकी शौर्यगाथाओं और गरीबों के प्रति उसके प्रेम का गुणगान करती हुई भी हैं.

भूपत सिंह राज्य का धाकड़ खिलाड़ी

भूपत सिंह राज्य का धाकड़ खिलाड़ी था. दौड़, घुड़दौड़, गोला फेंक में कोई उसका कोई सानी नहीं था. लेकिन उसकी जिंदगी में ऐसी घटनाएं हुईं कि उसने हथियार उठा लिए. दरअसल, भूपत के जिगरी दोस्त और पारिवारिक रिश्ते से भाई राणा की बहन के साथ उन लोगों ने बलात्कार किया जिनसे राणा की पुरानी दुश्मनी थी. जब इनसे बदला लेने राणा पहुंचा तो उन लोगों ने राणा पर भी हमला कर दिया.

भूपत सिंह ने सैकड़ों बार पुलिस को चकमा दिया

भूपत ने किसी तरह राणा को बचा लिया, लेकिन झूठी शिकायतों के चलते वह खुद इस मामले में फंस गया और उसे काल-कोठरी में डाल दिया गया. बस, यहीं से खिलाड़ी भूपत मर गया और डाकू भूपत पैदा हो गया. भूपत ने जेल से फरार होते ही राजाओं और अंग्रेजों के खिलाफ जंग ही छेड़ दी थी. भूपत सिंह ने सैकड़ों बार पुलिस को चकमा दिया. देश आजाद होने के बाद 1948 में भूपत के कारनामे चरम पर पहुंच गए थे और पुलिस भूपत को रोकने और पकड़ने में पूरी तरह नाकाम हो गई थी.

60 के दशक में डाकू भूपत सिंह पाकिस्तान जा पहुंचा

60 के दशक में डाकू भूपत सिंह अपने तीन खास साथियों के साथ देश छोड़कर गुजरात के सरहदी रास्ते कच्छ से पाकिस्तान जा पहुंचा. कुछ समय बाद उसने वापस भारत आने का इरादा किया, लेकिन भारत-पाक पर मचे घमासान के चलते उसके लिए यह मुमकिन नहीं हुआ.

मुस्लिम रीति-रिवाजों से दफनाया गया

अंतत: पाकिस्तान में उसने मुस्लिम धर्म अंगीकार कर लिया और अब पाकिस्तान में उसे अमीन यूसुफ के नाम से जाना जाता है. धर्म-परिवर्तन के बाद उसने मुस्लिम लड़की से निकाह किया. उसके 4 बेटे और 2 बेटियां हुईं. हालांकि उसने व उसके अन्य साथियों ने भारत आने की कई कोशिशें कीं, लेकिन उसकी यह इच्छा पूर्ण नहीं हो सकी और पाकिस्तान की धरती पर ही 2006 में उसकी मौत हो गई. उसे मुस्लिम रीति-रिवाजों से दफना दिया गया.