500 रु. लेकर माया नगरी आए थे धीरूभाई, 75 हजार करोड़ की कंपनी बनाकर ‘कर ली दुनिया मुट्ठी में’

लाइव सिटीज डेस्क : रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन रहे धीरूभाई अंबानी और जाने माने बिजनेस मैन की कहानी एक ऐसी कहानी है जिसे सुनकर हर किसी ने दुनिया को मुट्ठी में करना चाहा. अंबानी घराने में पैदा होने पर मुकेश और अनिल अंबानी को बचपन में भले ही चांदी की थाली और सोने के चम्मच से लंच-डिनर नसीब हो गया हो मगर उन्हें इस राजशाही ठाठ तक पहुंचाने वाले उनके पिता धीरूभाई का बचपन बहुत तंगहाली में बीता. रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव रखने वाले धीरूभाई अंबानी की आज 85वीं जयंती है.

धीरू के पिता शिक्षक भले थे मगर कमाई इतनी नहीं



धीरू के पिता शिक्षक भले थे मगर कमाई इतनी नहीं कि पूरे परिवार का पेट पाल सकें. गरीबी से कभी-कभी परिवार को आधे पेट खाकर या फिर भूखे ही सोना पड़ जाता था. घर की माली हालत खराब होने पर धीरूभाई को गिरि पहाड़ के पास तीर्थयात्रियों के लिए चाय-पकौड़ी की दुकान चलानी पड़ी.

धीरूभाई अंबानी वो नाम है जिसने खुद सपने देखें और पूरी दुनिया को दिखा दिया

एक आदमी की ऐसी कहानी जिसकी पढ़ाई केवल हाईस्कूल तक भी पूरी नहीं हुई है. और बाद में वो दुनिया के सबसे अमीर आदमी में शुमार हो गया. धीरूभाई अंबानी वो नाम है जिसने खुद सपने देखें और पूरी दुनिया को दिखा दिया कि किस तरह सपनों को हकीकत किया जाता है. धीरूभाई अंबानी के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने पूरी तरह से बिजनेस के तरीकों को बदल डाला.

धीरूभाई अंबानी गुजरात के एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्में

किसे पता था कि भजिया बेचने वाला एक छोटा मामूली सा बिजनेस मैन दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार हो जाएगा. 28 दिसंबर 1932 को धीरजलाल हीरालाल अंबानी उर्फ धीरूभाई अंबानी गुजरात के एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्में थे. वो अपनी हाईस्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए लेकिन अपने बलबूते पर उन्होंने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि कोई काम नामुमकिन नहीं है. वो बिजनेस जगत में सबसे अव्वल हो गए. जब धीरूभाई अंबानी गुजरात के जूनागढ़ में थे उस वक्त वो माउंट गिरनार आने वाले तीर्थयात्रियों को भजिया बेचा करते थे. बाद में वो यमन के एडेन शहर में ‘ए. बेस्सी एंड कंपनी’ के साथ 300 रुपए प्रति माह के वेतन पर काम किया.

मुंबई आए तो उनके पास सिर्फ 500 रुपए थे

धीरूभाई अंबानी जब गुजरात से मुंबई आए तो उनके पास सिर्फ 500 रुपए थे. बाद में उन्होंने अरबों रुपए का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया. 1966 में अंबानी ने गुजरात के नारौदा में पहली टेक्सटाइल मिल स्थापित की और केवल 14 महीनों में ही उन्होंने 10,000 टन पॉलिएस्टर यार्न संयंत्र स्थापित करने में विश्व रिकॉर्ड बनाया. बाद उन्होंने इसे बड़े टेक्सटाइल एम्पायर के रूप में तब्दील किया जिसका नाम ‘विमल’ दिया.

धीरूभाई ने अपनी मेहनत से 2002 में 75,000 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी

1976 में 70 करोड़ रुपए की कंपनी को धीरूभाई ने अपनी मेहनत से 2002 में 75,000 करोड़ की कंपनी बना दी. इतनी जबरदस्त ग्रोथ के बाद रिलायंस दुनिया की सर्वश्रेष्ठ 500 कंपनियों में स्थान हासिल कर पाई. रिलायंस ऐसा करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी है. साल 2006 में फोर्ब्स ने दुनिया के सबसे रईस लोगों की सूची में धीरूभाई को 138वां स्थान दिया था. इस समय उनकी संपत्ति 2.9 बिलियन डॉलर थी. उसी साल 6 जुलाई 2002 को धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया था.