जानें वाइन और व्हिस्की में क्या है अंतर? बेहतर है व्हिस्की या रम के बजाय वाइन चुनना

लाइव सिटीज डेस्क : शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है. लेकिन ऐसा ज्यादातर घटिया शराब या रम और व्हिस्की के सेवन के कारण होता है लेकिन इनकी जगह वाइन पीना बेहतर है और वाइन पीने के फायदे भी हैं. वाइन के फायदे को जानने से पहले जान लें वाइन और व्हिस्की होता क्या है? दोनों के बीच क्या अंतर है?

व्हिस्की (Whisky)

व्हिस्की अनाज को सड़ाकर बनने वाला एक प्रकार का मादक पेय है. इसके विभिन्न प्रकारों के लिए विभिन्न अनाजों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें शामिल हैं जौ, राई, मॉल्ट राई, गेहूं और मक्का (मकई). अधिकांश व्हिस्की को सामान्यतः लकड़ी के पीपे में पुराना किया जाता है, जो ओक का बना होता है, जिसको अपवाद हैं कुछ मकई शराब. व्हिस्की 40–68 % अल्कोहल की मात्रा होती है.

वाइन (Wine)

वाइन भी एक ऐतिहासिक मदिरा है. इस्राइल, ज्योर्जिया, इरान, चीन, यूनान और मिस्र देशों में 6000 वर्ष ईसा पूर्व भी इसके बनाये जाने के प्रमाण मिले हैं. पुरातत्वकाल से ही वाइन उत्सव, शुभ कार्य और सामूहिक भोज का अटूट अंग रहा है. प्राचीन काल के बहुत से धार्मिक संस्थान (मुख्यतः चर्च) भी वाइन पीने को बढ़ावा देते थे और उन्होंने बियर पीना निषिद्ध कर रखा था क्योंकि ये बर्बर लोगों का पेय माना जाता था जबकि वाइन सभ्य लोगों का.

वाइन मुख्यतः अंगूर के रस के किण्वन से बनाई जाती है. अन्य फलों के रस से बनाई गयी वाइन को सामान्यतया फ़्रूट वाइन, कन्ट्री वाइन या फल के नाम पर वाइन बोला जाता है जैसे एप्पल वाइन, प्लम वाइन इत्यादि.

वाइन में एल्कोहल का प्रतिशत 9 से 30% तक हो सकता है, परन्तु साधारणतः सामान्य वाइन में 12-15% और फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन में 20-25% तक एल्कॉहल होता है. साधारण भाषा में वाइन के रंग के आधार पर इन्हें रेड वाइन रोज वाइन और व्हाइट वाइन में बांटा जाता है. वाइन एक महंगी मदिरा है, भारतीय वाइन की एक बोतल (750 ml) 200 रूपये से 1,000 रुपये तक होती है जबकि आयातित वाइन 600 रुपये से लेकर 5,000 रुपये या उससे भी महंगी हो सकती है.

वाइन पीने के फायदे

वाइन पीने से शरीर में रक्त प्रवाह की गति बढ़ती है. इससे डेड स्किन हट जाती है एवं त्वचा में निखार आता है. यह त्वचा के लिए एन्टीसेप्टिक की तरह कार्य करती है. वाइन पीने से कील, मुँहासे एवं शरीर के दाग-धब्बों से मुक्ति मिलती है. इसके सेवन से त्वचा कोमल, सुन्दर एवं मुलायम हो जाती है. वाइन में उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स, सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है.

वाइन, फ्रूट्स जैसे- अंगूर, आलू बुखारे एवं चेरी या सेबफल आदि से बनाई जाती है. इस कारण से यह शरीर के लिए नुकसानदेय नहीं होती. वाइन में पाया जाने वाला ‘रेसवेराट्रोल’ शरीर में सूजन को कम करने के साथ-साथ दिल की बीमारियों एवं मधुमेह जैसी समस्याओं के लिए भी फायदेमंद है. साथ ही इसमें मौजूद ‘इंसुलिन सेंसीटाइजर’ ब्लड शुगर को कन्ट्रोल करने में अत्यधिक सहायक होता है. वाइन में पाया जाने वाला ‘मेटाबोलिक सिंड्रोम’, शरीर को हृदयाघात एवं मधुमेह जैसी जानलेवा बीमारियों से भी बचाता है. रेड वाइन के सेवन से दिमाग की याद रखने की क्षमता बढ़ती है साथ ही तनाव में भी राहत मिलती है.

रम और व्हिस्की के नुकसान

रम एवं व्हिस्की शरीर के लिए काफी नुकसानदायक होती है. मुँह में जाते ही यह कफ, झिल्ली एवं छोटी आंत द्वारा सोख लिए जाने से यह आसानी से लीवर तक पहुंचकर लीवर को डैमेज कर देती है. इससे हानिकारक पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकल पाते जिससे शरीर में कई तरह की जानलेवा बीमारियां घर बना सकतीं हैं.

इसमें उपस्थित एल्कोहल सीधा व्यक्ति के दिमाग पर असर करता है. इससे सिरदर्द, झुंझलाहट, निराश होना, गुस्सा आना, बेसुध होना, दिमाग पर जोर पड़ना, एवं दिमागी कैंसर जैसी कई बीमारियां जन्म ले लेतीं हैं.

रम एवं व्हिस्की के नित्य सेवन से ब्रेस्ट कैंसर एवं आंत का कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकतीं हैं. इसमें उपस्थित एल्कोहल के शरीर में फैलने से व्यक्ति की जान भी जा सकती है.

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