लाइव सिटिज डेस्क : भारत में टेलीविजन के इतिहास की कहानी दूरदर्शन के इतिहास से ही शुरू होती है. दूरदर्शन पर आज ही के दिन यानी 15 सितंबर, 1959 को पहला प्रसारण हुआ था. आज भी दूरदर्शन का नाम सुनते ही अतीत की कई गुदगुदाती बातें याद आ जाती हैं. भले ही आज टीवी चैनल्स पर कार्यक्रमों की बाढ़ आ गई हो लेकिन दूरदर्शन की पहुंच को टक्कर दे पाना अभी भी किसी के बस की बात नहीं है. दूरदर्शन ने अकेले हमें इतना कुछ दिया है कि आज के सौ चैनल मिलकर भी नहीं दे सकते.

तरक्की का सफर

इसकी शुरुआत एक अस्थायी स्टूडियो से हुई थी. प्रसारण से संबंधित उपकरण फिलिप ने दिया था. ऑल इंडिया रेडियो ने फ्लोर स्पेस और न्यूज कॉन्टेंट मुहैया कराया था. चैनल के शुरुआती सालों में इसके पास सिर्फ 180 टेलिविजन सेट्स थे. 10 सालों के अंदर टेलिविजन सेट्स की संख्या बढ़कर 1,250 हो गई और 1977 तक यह संख्या करीब 2.5 लाख तक पहुंच गई.

जब दूरदर्शन की शुरुआत हुई थी, उस समय का प्रसारण हफ्ते में सिर्फ तीन दिन आधा-आधा घंटे होता था. पहले इसका नाम ‘टेलीविजन इंडिया’ दिया गया था बाद में 1975 में इसका हिन्दी नामकरण ‘दूरदर्शन’ नाम से किया गया.

1959 में शुरू होने वाले दूरदर्शन का 1965 में रोजाना प्रसारण प्रारंभ हुआ. दूरदर्शन से 15 अगस्त 1965 को प्रथम समाचार बुलेटिन का प्रसारण किया गया था और यह सफर आज भी बदस्तूर जारी है. 1972 तक टीवी सर्विस को मुंबई और अमृतसर तक विस्तार दिया गया. 1975 तक भारत के सिर्फ 7 शहरों में टीवी सर्विस उपलब्ध थी और भारत में टीवी का अकेला दूरदर्शन ही सर्विस प्रोवाइडर था. डीडी इंडिया अभी 146 देशों में मौजूद हैं. दूरदर्शन के 60 से ज्यादा चैनल्स हैं जिनमें डीडी1, डीडी2, डीडी दमन और दिउ, डीडी अरुणाचल प्रदेश, डीडी इंग्लिश, डीडी गोवा आदि.

ऑल इंडिया रेडियो से अलग राह

1 अप्रैल, 1976 को टीवी सर्विसेज को रेडियो से अलग किया गया. इससे पहले यह ऑल इंडिया रेडियो का हिस्सा था. खुद इंदिरा गांधी ने टेलिविजन पर आकर ऑल इंडिया रेडियो से इसके अलग होने की घोषणा की थी. इसके बाद ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के कार्यालय का प्रबंधन दिल्ली में अलग-अलग महानिदेशकों द्वारा किया जाने लगा. 1982 में दूरदर्शन नैशनल ब्रॉडकास्टर के तौर पर सामने आया और देश के हर हिस्से में पहुंच गया. 2014 में दूरदर्शन की नई पिंक और परपल थीम फिर से लॉन्च की गई और नई पंचलाइन
‘देश का अपना चैनल’ पंचलाइन के साथ मार्केट में आया.

दूरदर्शन की विकास यात्रा प्रारंभ में काफी धीमी रही लेकिन 1982 में रंगीन टेलीविजन आने के बाद लोगों का रूझान इस ओर ज्यादा बढ़ा. इसके बाद एशियाई खेलों के प्रसारण ने इस दिशा में क्रांति ही ला दी.

1986 में शुरू हुए ‘रामायण’ और इसके बाद शुरू हुए ‘महाभारत’ के प्रसारण के दौरान हर रविवार को सुबह देश भर की सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता था और लोग सड़कों पर अपनी यात्रा ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के प्रसारण के दौरान नहीं करते थे. कार्यक्रम के दौरान लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करके अगरबत्ती और दीपक जलाकर रामायण का इंतजार करते थे और एपिसोड के खत्म होने पर बकायदा प्रसाद बांटी जाती थी.

​दूरदर्शन पर पहला कार्यक्रम

दूरदर्शन पर जिस कार्यक्रम का सबसे पहले प्रसारण किया गया वह कृषि दर्शन था. उसकी शुरुआत 26 जनवरी, 1967 को हुई और सबसे ज्यादा समय तक चलने वाला टीवी प्रोग्राम था.

दूरदर्शन के कुछ लोकप्रिय टीवी शो थे

हम लोग, ये जो है जिंदगी, बुनियाद, रामायण, महाभारत, शक्तिमान, भारत एक खोज, चित्रहार, करमचंद, ब्योमकेश बख्शी, विक्रम और बेताल, मालगुडी डेज, ओशिन (एक जापानी टीवी सीरीज), जंगल बुक, द पीकॉक कॉल्स और यूनिवर्सिटी गर्ल्स.

जानें और भी प्रमुख बातें…

1. 2 राष्‍ट्रीय और 11 क्षेत्रीय चैनलों के साथ दूरदर्शन के कुल 21 चैनल प्रसारित होते हैं. 14 हजार जमीनी ट्रांसमीटर और 46 स्‍टूडियो के साथ यह देश का सबसे बड़ा प्रसारणकर्ता है.
2. अगर विज्ञापनों की बात करें तो ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ जहां लोगों को एकता का संदेश देने में कामयाब रहा, वहीं बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर-हमारा बजाज से अपनी व्यावसायिक क्षमता का लोहा भी मनवाया.
3. 3 नवंबर 2003 में दूरदर्शन का 24 घंटे चलने वाला समाचार चैनल शुरू हुआ.
4. यूनेस्को ने भारत को दूरदर्शन शुरू करने के लिए 20,000 डॉलर और 180 फिलिप्स टीवी सेट दिए थे. साल 1965 में ऑल इंडिया रेडियो के हिस्से के रूप में नियमित ट्रांसमिशन शुरू हुआ, बाद में 5 मिनट का न्यूज बुलेटिन जोडा गया.