सेक्स सिंबल के तौर पर जानी जाती थी बॉलीवुड की ये एक्ट्रेस, नवाब खानदान की बनी थी बहु

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शर्मिला टैगोर

लाइव सिटीज डेस्कः इस पीढ़ी के ज्यादातर लोग शर्मिला टैगौर को सिर्फ सैफ अली खान की मम्मी के तौर पर जानते होंगे, लेकिन वो अपने जमाने की सबसे बोल्ड अभिनेत्री भी थीं. जब उन्होंने पहली बार बिकिनी पोज दिया तो लोगों के होश उड़ गए थे. उनके बारे में ऐसी कई बातें हैं, जिसे जानना चाहिए. आज (8 दिसंबर) उनके जन्मदिन पर एक नजर ऐसी ही कुछ खास बातों पर-

शर्मिला टैगोर का जन्म 8 दिसबंर 1944 को हुआ था. गुरुवार को वह 73 साल की हो गईं. ‘अराधना’, ‘मौसम’, ‘चुपके-चुपके’, ‘सफर’ जैसी बेहतरीन फिल्मों के जरिये बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाली शर्मिला का  हैदराबाद में हुआ था. 1959 में सत्यजीत रे के निर्देशन में बंगाली फिल्म ‘अपूर संसार’ से उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. शर्मिला को बॉलीवुड में शक्ति सामंत ने बड़ा ब्रेक दिया.



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शम्मी कपूर के साथ उन्हें ‘कश्मीर की कली’ में काम करने का मौका मिला, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. इसके बाद उन्होंने शक्ति सामंत के साथ कई ‘अराधना’ और ‘एन ईवनिंग इन पेरिस’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में भी काम किया. शक्ति सामंत ने राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी बनाई, जिसका जादू आज बरकरार है.

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बिकिनी ने बदल दी इमेज

1967 में शक्ति सामंत की ही फिल्म ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ में जब उन्होंने बिकिनी पहनी, तो उनकी इमेज सेक्स सिंबल के तौर पर सामने आई. कहा जाता है कि ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय एक्ट्रेस थीं. उस दौर में यह आसान बात नहीं थी. यह फिल्म जब रिलीज हुई, तब तक शर्मिला टैगोर की मंसूर अली खान पटौदी से सगाई हो चुकी थी और माना जा रहा था कि नवाब खानदान उनसे रिश्ता तोड़ लेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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शादी के बाद उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया था और अपना नाम आयशा सुल्तान रख लिया था. उन्होंने 1968 में फिल्मफेयर मैगजीन के लिए बिकिनी में फोटोशूट भी करवाया था. हालांकि जब उन्हें सीबीएफसी का चेयरपर्सन बनाया गया था तो उन्होंने फिल्म में बिकिनी के ज्यादा प्रयोग पर चिंता जताई थी.

16 साल बाद मिला नेशनल अवॉर्ड

करियर शुरू करने के 16 साल बाद फिल्म ‘मौसम’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था. इस फिल्म को गुलजार ने डायरेक्ट किया था. हिंदी के अलावा शर्मिला ने बंगाली, मलयालम, मराठी और अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया है.

रवींद्रनाथ टैगोर से कनेक्शन

शर्मिला के नाम से जुड़ा सरनेम टैगोर उन्हें महान लेखक रवींद्रनाथ टैगोर से जोड़ता है. शर्मिला के पिता रवींद्रनाथ टैगोर के पोते के पोते थे. भारतीय सिनेमा में अहम योगदान देने के अलावा वह सन् 2004 से 2011 तक सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. 2013 में उन्हें पद्म भूषण से भी नवाजा गया था.

हाल ही में उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड में बड़ी उम्र के हीरो के लिए तो स्क्रिप्ट लिखी जाती है, लेकिन हीरोइनों के केस में ऐसा नहीं है.

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- बड़े उम्र के हीरो के लिए बहुत सी स्क्रिप्ट्स लिखी जा रही हैं, लेकिन हीरोइनों के लिए नहीं लिखा जाता. लड़कियों को हमेशा यंग रहना होगा, जबकि पुरुषों को हमेशा रोल मिलता रहेगा.