मरने से पहले 9 ख्वाहिशों को जीने की कहानी है फिल्म ‘नाइन’

पटना (नियाज आलम) : पटना शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन लघु फिल्म ‘नाइन’ का प्रदर्शन किया गया. बगैर किसी संवाद के 22 मिनट की इस फिल्म में दो युवा कलाकारों के संबंधों को दिखाया गया है. फिल्म के नायक विक्रांत चौहान के मुताबिक नाइन की कहानी लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े एक युवा जोड़े की है. फिल्म में नायिका की भूमिका निफ्ट की छात्रा हिमानी शर्मा ने निभाई है. हिमानी की यह पहली फिल्म है. फिल्म के संबंध में विक्रांत ने लाइव सिटीज से अनुभव साझा किए. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश…

रिपोर्टर- सबसे पहला सवाल यह है कि फिल्म का शीर्षक काफी अलग है, यह किस तरह की फिल्म है?
विक्रांत- यह फिल्म ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े दो बॉडी पेन्ट आर्टिस्ट की कहानी है, जो लीव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. एक दिन अचानक पता चलता है कि फिल्म की नायिका को थैलिसीमिया (ब्लड कैंसर) है. डॉक्टरों के मुताबिक उसके पास केवल चौबीस घंटे का समय है. इस बात से घबराए बिना नायिका अपने बचपन से लेकर अब तक की नौ अधूरी ख्वाहिशों को जीना चाहती है. फिल्म का शीर्षक इसी नौ ख्वाहिशों को लेकर ‘नाइन’ रखा गया है.

रिपोर्टर- फिल्म में नौ ख्वाहिशों को पूरा करते दिखाया गया है. आपको कौन सा दृश्य सबसे अच्छा लगा?
विक्रांत- इसमें कई अलग-अलग तरह के दृश्य हैं. जैसे एक दृश्य में नायिका को फ्रिज में से निकलता हुआ दिखाया गया. इसके पीछे कारण है कि उसे ठंडक बहुत पसन्द है और गर्मी के कारण वह एक बार कुछ देर के लिए फ्रिज में रहना चाहती थी. इसी तरह दूसरे दृश्य में कुछ परिन्दों को पिंजड़े से आज़ाद करते हुए दिखाया गया है, इसमें यह दिखाने की कोशिश है कि नायिका जीवन मुक्त होने से पहले परिन्दों को कैद मुक्त करना चाहती है. फिल्म में मुझे जो सबसे अच्छा दृश्य लगा वह यह है कि नायिका मोज़ार्ट की धुन पर नायक और नायिका डांस करते हैं. उनके पूरे शरीर पर लाइट लपेटी गई है. यह दृश्य काफी मोहक है.

रिपोर्टर- इस फिल्म की विशेषता क्या है?
विक्रांत- फिल्म का कंटेंट काफी अलग है. इसके अलावा फिल्म का ट्रीटमेंट काफी अलग है. इसमें जिस तरह से लाइटिंग और कलर टोन का इस्तेमाल किया गया है, वह फ्रेन्च फिल्मों की तरह है. बिहार में इस तरह का प्रयोग अब तक नहीं हुआ है.

रिपोर्टर- इतना गंभीर और संवेदनशील मुद्दा, उस पर से फिल्म का टोन फ्रेन्च स्टाइल का, आपको नहीं लगता के बिहार के दर्शक फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं?
विक्रांत-
बिल्कुल सही, बिहार के दर्शक फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन उन्हें तैयार करना है. आज मुख्य धारा की फिल्में भी बदल रही हैं. ऐसे में दर्शकों को हर तरह की फिल्मों के लिए तैयार करने की जरूरत है.

रिपोर्टर- 22 मिनट की फिल्म और कोई संवाद नहीं, आम दर्शक को आप कैसे फिल्म से जोड़ पाएंगे?
विक्रांत- यह फिल्म दृश्यात्मक रूप से इतनी मजबूत है कि 22 मिनट तक आप इससे अलग नहीं हो पाएंगे. जब हमने इसकी स्क्रीनिंग की तो तो इसे उम्मीद से ज्यादा प्रतिक्रिया मिली थी. यह फिल्म काफी शानदार है और इसमें संगीत का भी काफी अच्छा तालमेल है.

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