78 सालों से 10,000 कमरों वाला ये आलीशान होटल पड़ा है वीरान, आजतक एक भी गेस्ट नहीं ठहरा

लाइव सिटीज डेस्क : दुनिया में हर किसी का सपना होता है कि वो दुनिया की फेमस जगहों पर घूमने जाएं और आनंद उठाएं. एक शानदार होटल में ठहरें और वहां के सभी जगहों पर आराम से घूमे-फिरे. इस बीच जर्मनी में एक बहुत ही भव्य और सुंदर होटल है जिसमें 10 हजार कमरें हैं लेकिन अफसोस वहां कोई रहने को तैयार ही नहीं होता है. जर्मनी के रियूगेन आइलैंड में बाल्टिक सागर के किनारे बना नाजी होटल अब लग्जरी रिजॉर्ट और अपार्टमेंट में तब्दील हो गए हैं.

10 हजार कमरों वाले इस होटल में अब कोई गेस्ट रहने नहीं आता, लेकिन ये बाकि कई कामों में इस्तेमाल हुआ है. इसमें बने लग्जरी से 95 फीसदी अपार्टमेंट्स पूरी तरह बनने से पहले ही बिक चुके हैं. इसके लग्जरी अपार्टमेंट के 8 ब्लॉक ओपन भी हो गए हैं जबकि बांकि अभी खुलने की तैयारी में हैं साथ ही इसमें बना स्पा रिजॉर्ट और ट्रेंडी रेस्टोरेंट्स पहले हॉलिडे मेकर्स के लिए तैयार हैं.

इस होटल को 1936 से 1939 के बीच नाजियों ने बनवाया था, ताकि वो यहां जिंदगी का मजा लेने के साथ ही अपनी ताकत भी बढ़ा सकें. होटल को बनवाने के पीछे उनका यहां जर्मन के कर्मचारियों को खाली वक्त बिताने का मौका देना और इस बहाने अपनी नाजी विचारधारा का प्रचार – प्रसार करना था.

इस कॉम्प्लेक्स में 8 अलग अलग इमारतें हैं जो करीब साढ़े 4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हैं. बीच से इसकी दूरी 150 मीटर है. 8 हाउसिंग ब्लॉक के साथ ही थिएटर, सिनेमा, स्विमिंग पूल और फेस्टिवल हॉल हमेशा खाली हो रहे हैं.

युद्ध के दौरान हैम्बर्ग के कई लोग यहां के ब्लॉक में रुक गए थे. युद्ध के बाद प्रोरा को ईस्ट जर्मन आर्मी ने मिलिट्री आउटपोस्ट की तरह इस्तेमाल किया.

1990 में जर्मनी के एकीकरण के बाद से ये इमारतें वैसी ही खाली पड़ी हैं. इस प्रोजेक्ट के कन्स्ट्रक्शन में देश की सभी बड़ी कंपनियां शामिल थी. करीब 9 हजार मजदूरों ने इस पर काम किया था.

सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान प्रोरा का कन्स्ट्रक्शन रोककर सभी मजदूरों को हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों में भेज दिया गया था और ये प्रोजेक्ट कभी पूरा ही नहीं हुआ. समुद्र के सामने वाली प्रॉमिनेंट लोकेशन को देखते हुए डेवलपर्स यहां होलिडे अपार्टमेंट्स बनाने की सोच रहे हैं.

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