पुण्यतिथि विशेष : जानें महान वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई की संक्षिप्त जीवनी

डॉ विक्रम साराभाई

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : डॉ विक्रम साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे. साराभाई ने अंतरीक्ष क्षेत्र में भारत को एक नई ऊचाई दी. वे भारत को बहुत कुछ देने वाले थे लेकिन विमान दुर्घटना में होमी भाभा के अकालिक मृत्यु दिसंबर 31, 1971 हो गई. इस दिन को भारत ने एक महान वैज्ञानिक को खो दिया. जानें डॉ विक्रम साराभाई का संक्षिप्त परिचय.

विक्रम अंबालाल साराभाई का जन्म अगस्त 12, 1919 को अहमदाबाद के प्रगतिशील उद्योगपति के संपन्न परिवार में हुआ था. डॉ विक्रम साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे. वे अंबालाल व सरला देवी के आठ बच्चों में से एक थे. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा मोंटेसरी लाइन के निजी स्कुल ‘रिट्रीट’ से प्राप्त की, जो उनके मातापिता चला रहे थे.

विक्रम साराभाई मेट्रिक्युलेशन के बाद, कालेज शिक्षण, के लिए केब्रिडज चले गये तथा वर्ष 1940 में सेंट जान कालेज से प्राकृतिक विज्ञान में ट्राइपोस किया. द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में वे घर वापस आये तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलूरु में सर सी.वी. रमन के अधीन अनुसंधान छात्र के रुप में कार्य ग्रहण किया. उनके सौर भौतिकशास्त्र व कास्मिक किरण में रुचि के कारण, उन्होंने देश में कई प्रेक्षण स्टेशनों को स्थापित किया. उन्होंने आवश्यक उपकरणों का निर्माण किया तथा बैंगलूरु, पुणे व हिमालयों में मापन किया. वे 1945 में केब्रिडज वापस गए तथा 1947 में उन्होंने Phd की शिक्षा पूर्ण की.

डॉ विक्रम साराभाई 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले. इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

महान संस्थान निर्माता थे साराभाई

डॉ॰ साराभाई एक महान संस्थान निर्माता थे. उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में संस्थान स्थापित करने में अपना सहयोग दिया. साराभाई ने सबसे पहले अहमदाबाद वस्त्र उद्योग की अनुसंधान एसोसिएशन (एटीआईआरए) के गठन में अपना सहयोग प्रदान किया. डॉ॰ साराभाई ने भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) अहमदाबाद, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र, तिरूवनंतपुरम, स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर, अहमदाबाद जैसी कई संस्थानों का स्थापना किया.

वर्ष 1957-1958 को अंतर्राष्ट्रीय भू-भौतिकी वर्ष (IGW) के रुप में देखा जाता है. साराभाई द्वारा IGW के लिए भारतीय कार्यक्रम एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा. 1957 में स्पुटनिक-1 के प्रमोचन ने उनको अंतरिक्ष विज्ञान के नये परिदृश्यों से अवगत कराया. जिसके बाद उनकी अध्यक्षता में अंतरिक्ष अनुसंधान हेतु भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR) का गठन किया गया.

विमान दुर्घटना में हुई थी मौत

विमान दुर्घटना में होमी भाभा के अकालिक मृत्यु के बाद, विक्रम साराभाई ने मई 1966 में परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष पद को संभाला. वे हमेशा से यह चाहते थे कि विज्ञान के प्रायोगिक उपयोग आम आदमी तक पहुँचे. उन्होंने राष्ट्र के वास्तविक संसाधन की तकनीकी तथा आर्थिक मूल्यांकन के आधार पर देश की समस्याओं के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी में सक्षमता प्राप्त करने की दिशा में कार्य किया. उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत की, जो आज पूरे विश्व में विख्यात है. विक्रम साराभाई की मृत्यु दिसंबर 31, 1971 को निद्रावस्था में हुई थी.

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