भारत का अनोखा गांव जहां माता की कृपा से गांव की गलियों में बहता है देशी घी, आती है घी की बाढ़

लाइव सिटीज डेस्क : गुजरात का नाम आते ही वहां का विकास और खुशहाली याद आ जाती हैं. त्यौहारों में नवरात्रि में गरबा का जिक्र न हो तो गुजरात अधूरा सा लगता है. फाफड़ा, ढोकला के लिए भी गुजरात जाना जाता है. गुजरात में एक और चीज की खास मान्यता है. मान्यता इसलिए क्योंकि ऐसी परंपरा देश के किसी कोने में देखने को नहीं मिलती. गुजरात में नवरात्रि के दौरान शुद्ध घी का उत्सव आकर्षण का केंद्र रहता है. गांधी नगर जिले के छोटे से रुपाल गांव में महाभारत काल से ये परंपरा चली आ रही है. सदियों से मनाए जा रहे उत्सव पर वरदायिनी माता की पल्ली पर हरसाल बड़ी संख्या में भक्त आते हैं, और लाखों किलो घी चढ़ाया जाता है. जिसके बाद पूरे गांव की गलियों में घी बहने लगता है. ऐसा लगता है, जैसे घी की बाढ़ आ गई हो.

माता वरदायिनी करती हैं मनौती पूरी

हिन्दुस्तान में कभी दूध, दही और घी की नदियां बहती थीं. ये लाइन सुनते सुनते कान पक गए लेकिन ऐसी नदी के बारे में आज तक न तो दर्शन प्राप्त हुए, और न ही कहीं किताबों में इसका जिक्र मिला. पर गुजरात का एक ऐसा गांव हैं जहां साल में एक बार घी की बाढ़ आती हैं. जिसको रोकने के लिए कोई साधन नहीं होता. ऐसे में घी गांव की सड़कों में बह जाता है. गुजरात के गांधीनगर में एक छोटा सा गांव है रूपाल यहां हर साल पल्ली उत्सव मनाया जाता है, जिसमें मां वरदायिनी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि यहां आने वाले भक्त अगर घी चढ़ाएंगे तो मनौती पूरी होगी.

गांव में आती है घी की बाढ़

नवरात्र में ब्रम्ह मुहूर्त के पहले वरदायिनी माता की यात्रा यानी पल्ली रुपाल गांव के चौराहे में पहुंचती है. जहां माता वरदायिनी माता का शुद्ध देशी घी से अभिषेक किया जाता है. लाखों की तादात में आए भक्त देशी घी माता पर चढ़ाते हैं. खास बात ये कि परिवार में पैदा हुए नवजात बच्चों को पहले साल इसी तरह माता के दर्शन करवाने की परंपरा है. लोग अपने छोटे बच्चों को लाखों की भीड़ में माता की जलती ज्योति का दर्शन कराते हैं.

नवरात्रि की अष्टमी के दिन होने वाले इस आयोजन के लिए लोगों को पूरे साल इंतजार रहता है. माता की ज्योति यानी पल्ली के साथ पूरे गांव में घुमाया जाता है. माता के दर्शन के लिए आए भक्त बाल्टियों में भरे घी से स्नान कराते हैं. माता के भक्त ड्रमों में भरे घी से माता का अभिषेक करते हैं. लोग अपनी हैसियत के मुताबिक घी चढ़ाते हैं.

करोड़ों में होती है घी की कीमत

एक अनुमान के मुताबिक हर साल यहां करीब 15 लाख भक्त आते हैं, जो पांच से छह लाख लीटर घी चढ़ाते है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताई जाती है. पांच लाख लीटर घी जब बीच चौराहे पर माता पर चढ़ाया जाता है. उस वक्त गांव की हर गली घी से भर जाती है. कुछ लोग इसको भरकर बाद में प्रसाद के रूप में माता के दर्शन करने आए भक्तों को देते है.

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