‘हमनी के भिखारी ठाकुर’ : लोक कलाकार को लोकचित्र शैली में चित्रा सिंह की श्रद्धांजलि

पटना (विमलेन्दु सिंह) : बिहार की धरती को जिन कला विभूतियों ने धन्य किया है उनमें एक नाम भिखारी ठाकुर का है. सारण जिला के कुतुबपुर दियारा में पैदा हुए भिखारी ठाकुर को बिहार की धरती या भोजपुर की माटी का शेक्सपीयर कहकर सम्मान दिया जाता है. भिखारी ठा​कुर को उनके जन्म दिन पर लोक चित्रकार चित्रा सिंह ने अपनी पेंटिंग के जरिये श्रद्धांजलि समर्पित की है. पटना के ललित कला अकादमी की कलादीर्घा में उनकी पेंटिंग प्रदर्शनी चल रही है.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

20 तारीख तक प्रदर्शन कलाप्रेमियों के दर्शनार्थ खुली रहेगी. इस पेंटिंग प्रदर्शनी का शुभारंभ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया और चित्रा​ सिंह को इस अनुपम प्रदर्शनी के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं. कलाकार और उनकी कृतियों पर चर्चा करने से पहले आइए दो बातें भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के बारे में.



हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

भिखारी ठाकुर का जन्म पुराने सारण जिले के कुतुबपुर दियारा में 18 दिसंबर 1887 को हुआ था. ​कभी वह स्कूल नहीं गए. कोई औपचारिक शिक्षा उन्हें प्राप्त नहीं हुई लेकिन भोजपुरी साहित्य, नृत्य, संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में वह समान अधिकार रखते थे. रामलीला और नाटक देखकर वह इन कलाओं की बारीकियों से परिचित होते रहे.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी, मुख्यमंत्री का उद्गार

उस समय की जो गंभीर कुरीतियां जैसे छुआछूत, जातिप्रथा, रूढिवादिता, विवाह के लिए बेटी को बेचने का चलन, या फिर रोजगार के अभाव में पलायन की मजबूरी को उन्होंने आम जन की भाषा और संवाद शैली में अपने गीत, नृत्य और नाटक में अभिव्यक्त किया है. ‘बिदेशिया’, ‘बेटी—बेचवा’, ‘गबर—घिचोर’ और ‘पुत्रवध’ उनकी प्रमुख कृतियां है जिसे लोक—कलाकार चित्रा सिंह ने कैनवास पर रंग से बखूबी उकेरा है.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी, मुख्यमंत्री का उद्गार

एक भोजपुरी महानायक को मिथिला चित्रशैली में प्रस्तुत कर उन्होंने वस्तुत: बिहार की दो लोकभाषाओं के बीच सेतुबंधन का काम किया है और सांस्कृतिक समरसता की दिशा में एक सार्थक कदम बढ़ाया है.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

एक बात और बता दूं कि आपको जब यह जानकारी होगी कि चित्रा​ सिंह अंगिका भाषाभाषी हैं तो उनके इस प्रयास के प्रति आपका स्नेह और भी बढ़ जाएगा. चित्रा सिंह ने ‘हमनी के भिखारी ठाकुर’ चित्र प्रदर्शनी में कुछ खास तस्वीरों के माध्यम से उनकी कलात्मक जीवन यात्रा को प्रभावी तरीके से अभिव्यक्त करने का सराहनीय प्रयास किया है.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

हालांकि उनके इस प्रयास की जहां बहुप्रशंसा हुई है वहीं कुछ लोग अलग—अलग कारणों से इसकी आलोचना करने से भी नहीं चूके. तथाकथित कई शुद्धतावादियों को उनका नवीन प्रयोग नागवार भी गुजरा, लेकिन वह यह मानकर चलती है कि नवीनता को कभी खुले दिल से स्वीकार नहीं किया जाता. इसलिए हताश होकर नवसृजन की गतिविधियां ठप नहीं होनी चाहिए. नवप्रयोग का उनका सिलसिला चलता रहेगा.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

आपको बता दें कि चित्रा सिंह की कलायात्रा रेखांकन या स्केचिंग से आरंभ हुई और जल्द ही इन्होंने मिथिला लोकचित्र शैली को अंगीकार कर लिया. चित्रकला की प्रारंभिक शिक्षा पटना के चित्रकार योगेन्द्र से प्राप्त की एवं मिथिला चित्रकला की बारीकी इन्होंने रेखादास से सीखी. बहन कंटम्परेरी आर्टिस्ट नीता सिंह से भी बहुत कुछ सीखने को इन्हें मिला. चित्रा सिंह मिथिला पेंटिंग के सशक्त हस्ताक्षर भारती दयाल, बुआ देवी और सीता देवी की कृतित्व एवं व्यक्तित्व की मुरीद हैं लेकिन उन्हें अपनी चित्रशैली में नव प्रयोगों को तरजीह दिया और अपनी एक अलग शैली विकसित की.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

प्रसन्नता की बात है कि चित्रा ने मिथिला चित्रकला शैली के परंपरागत विषयों पर काम करने के साथ ही साथ नए विषयों को भी अपनी पेंटिंग में जगह दी और मिथिला शैली को एक व्यापक फलक प्रदान करने का काम किया. समसामयिक विषयों एवं सामाजिक मुद्दों को इन्होंने चित्र के जरिये अभिव्यक्त करने का काम किया.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

उनकी प्रमुख कृतियां जिन विविध विषयों पर केंद्रित हैं उसमें पौराणिक आख्यान, रामायण और महाभारत की कथाएं तो शामिल हैं ही, इसके अलावा दशरथ मांझी, महिला सशक्तीकरण, जर्नलिज्म आॅफ करेज, सिद्धार्थ से गौतम, बेटी बचाओ जैसे विषयों को भी उन्होंने ब्रश और कलर से कैनवाश पर अभिव्यक्त किया है. उन्होंने कई तस्वीरें समर्पण श्रृंखला (Devotion Series) के तहत बनाई हैं जिसमें भरत, हनुमान, केवट, अहिल्या और शबरी की कथाओं पर बनाई गई पेंटिंग प्रमुख हैं.

हमनी के भिखारी ठाकुर: चित्रकला प्रदर्शनी

दीमापुर, नागालैंड में वर्ष 2016 में नागालैंड भोजपुरी समाज के वार्षिक समारोह के लिए मंच को नवीन स्वरूप प्रदान की और स्टेज डिजाइन किया. इसके लिए उस समय के नागालैंड के राज्यपाल पीबी आचार्य के हाथों सम्मानित भी हुईं.