जान लें इन विधायकों को… इनकी कमाई देख आप भी हैरान रह जाएंगे…

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार और यूपी में जब भी किसी का झगड़ा होता है, तो आपने भी उन्हें ये कहते सुना होगा कि जानते हो बे “हमारे चाचा विधायक हैं!”. ये डायलॉग इतना आम है कि आपको हर कोई इसकी धौंस देता दिख जाएगा. यूपी-बिहार में बच्चों से लेकर बड़े तक सबके चाचा विधायक ही होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि बिहार और यूपी के नेताओं को हमेशा से ही दबंग छवि के लिए जाना जाता है. देश में नेताओं को ज्यादातर लोग यही समझते है कि वो बहुत पॉवरफुल होते है. वैसे भी अगर आप नेता बन गए, तो कई ऐसी चीजें होती है जो आपको आम आदमी से अलग करती है. और सिर्फ आप ही नहीं बल्कि आपके रिश्तेदारों से लेकर नेताओं के साथ रहने वाले लोग भी स्वैग में ही जीते है. ऐसी मानसिकता आपको सिर्फ भारत में ही देखने को मिलेगी. खासकर बिहार और यूपी में ज्यादा.

इसी वजह से अगर आपके भी “चाचा विधायक हैं”, तो बेपरवाह धमकाते रहिए. लेकिन इससे पहले चाचा विधायक की सैलरी भी जान लीजिए. क्योंकि आपके मन में भी ये सवाल तो आते ही होंगे कि पॉवरफुल विधायक जी की तन्खवाह कितनी है ? अगर हां, तो आज हम आपको भारत के उन सभी विधायकों से मिलवाते है, जो लाखों नहीं करोड़ों में कमाते हैं.

तीन राज्यों में एक समान मिलती है सैलरी

देश के तीन राज्यों में विधायकों की सैलरी एक जैसी है. जिनमें उत्तर प्रदेश के विधायक चाचा को 1.87 लाख रुपए, महाराष्ट्र के विधायकों को 1.70 लाख रुपए और उत्तराखंड के विधायकों को 1.60 लाख रुपए सैलरी दी जाती है.

बिहार के विधायक भी नहीं किसी से कम


अब आते है बिहार के विधायकों पर. क्योंकि दबंगई और रूतबे में हमारे यहां के विधायक भी किसी से कम नहीं. बिहार के विधायकों को 1.14 लाख की सैलरी मिलती है. वहीं कार्यकाल पूरा होने के बाद भी इन्हें कई सुविधाएं दी जाती है. जिनमें पेंशन, अस्पताल का खर्च और भारतीय रेल में रिजर्वेशन में छूट.

सबसे अमीर विधायक


तेलंगाना के विधायकों पर लक्ष्मी माता बहुत मेहरबान रहती हैं. उन्हें 20 हजार रुपये सैलरी, 2 लाख तीस हजार रुपये विधानसभा क्षेत्र भत्ता और 25 हजार रुपये अन्य भत्ता दिया जाता है. साथ ही साथ उन्हें 1000 रुपये दैनिक भत्ता भी दिया जाता है.

सबसे गरीब विधायक


विधायकों में भी गरीबी होती है. जी हां, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि भारत में अगल-अलग स्टेट में विधायकों की सैलरी अलग होती है. जहां तेलांगना के विधायकों की सैलरी देश में सबसे अधिक है. वही नॉर्थ इस्ट का त्रिपुरा राज्य में विधायक की सैलरी सबसे कम है. त्रिपुरा के विधायकों मासिक सैलरी 34 हजार रुपए है.

दिल्ली के विधायक


अगर आप न्यूज से अपडेट रहते है, तो आपको याद होगा दिल्ली के विधायकों की मांग. जिसमें उन्होंने मांग रखी थी कि उनकी सैलर में 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएं. इसके लिए बिल भी पास करवा दिया गया था. लेकिन केंद्र ने मंजूरी नहीं दी. अभी दिल्ली के विधायकों की सैलरी 20 हजार रुपए सैलरी, 18 हजार रुपये विधान सभा क्षेत्र भत्ता, 1000 रुपये दैनिक भत्ता सहित  सुविधाएं दी जाती हैं.

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य

पश्चिम बंगाल में 1.13 लाख रुपए, तमिलनाडू में 1.05 लाख रुपए, कर्नाटक में 98 हजार रुपए, सिक्किम में 86.5 हजार रूपए, केरल में 70 हजार रुपए, गुजरात में 65 हजार रुपए, ओडिशा में 62 हजार रुपये सैलरी दी जाती है.

उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश


उत्तराखंड के विधायकों को 1.60 लाख रुपए और आंध्र प्रदेश के विधायकों को 1.30 लाख रुपये सैलरी दी जाती है.

हिमाचल और अन्य राज्य


हिमाचल प्रदेश के विधायक 1.25 लाख रुपए, राजस्थान के विधायक 1.25 लाख रुपए, गोवा के विधायक 1.17 लाख रुपए, हरियाणा के विधायक 1.15 लाख रुपए और पंजाब के विधायक 1.14 लाख रुपए सैलरी कमाते हैं.

मध्यप्रदेश और अन्य राज्य


झारखंड में विधायकों को 1.11 लाख रुपए, मध्य प्रदेश में 1.10 लाख रुपए, छत्तीसगढ़ में 1.10 लाख रुपए सैलरी दी जाती है.

मेघालय और अन्य राज्य


अगर सबसे कम सैलरी पाने वाले विधायकों की लिस्ट बनाई जाए तो उसमें त्रिपुरा के विधायकों के बाद नागालैंड में 36 हजार रुपए, मणिपुर में 37 हजार रुपए, असम में 42 हजार रुपए, मिजोरम में 47 हजार रुपए, अरुणाचल प्रदेश में 49 हजार रुपए, पुडुचेरी में 50 हजार रुपये और मेघालय में 59 हजार रुपए बतौर सैलरी विधायकों को दिए जाते हैं.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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