रेडियो का वह दौर, जब आवाज ही पहचान हुआ करती थी !

पटना (विमलेंदु कुमार सिंह):  आज विश्व रेडियो दिवस है. इस मौके पर कुछ पुरानी यादें हैं. कुछ मोहक ‘आवाजें’ जिन्हें शायद हम कभी भूला न पाएं. वे नाम हैं देवकी नंदन पांडेय, भारतेंदु विमल, अमीन सायानी, रिनी साइमन/खन्ना, अखिल मित्तल, जसदेव सिंह, शम्मी नारंग और न जाने कितने नाम. कभी राजपथ से जसदेव सिंह जब ब्रिगेडियर चित्तरंजन सावंत के साथ गणतंत्र दिवस परेड का आँखों देखा हाल सुना रहे होते तो उनकी कमेंट्री के शब्द आँखों के सामने साक्षात राजपथ के दृश्य उपस्थित कर दिया करते थे. उनके शब्द सिर्फ कानों में गूंजा ही नहीं करते थे बल्कि चित्र बन आँखों के सामने तैरा करते थे.

आकाशवाणी रिकार्डिंग रूम फाइल फोटो

और न जाने और कितने नाम हैं. बिहार से प्रसारित प्रादेशिक समाचार की यादें हैं. बचपन में शाम 7.30 के प्रादेशिक समाचारों में अक्सर जिन दो आवाजों को हमसब सुना करते थे, वे आवाजें थीं अनंत कुमार सिंह और रामानुज प्रसाद सिंह जी की.

देवकी नंदन पांडेय

आज भी याद है कि जब रेडियो पर ‘चौपाल कार्यक्रम’ के प्रसारण का वक्त होता, कैसे सारे लोग रेडियो को घेरकर बैठ जाया करते थे. काश! ‘चौपाल’ फिर से सुनने को मिलता. बटुक भाई, मुखिया जी और गीता बहन की बतकही दुबारा सुनने को मिलती, और पुन: सुनने को मिलता ‘लोहा सिंह’ नाटक…..’लोहा सिंह’ नाटक जब रेडियो पर आ रहा होता तो कितने गौर से लोग उसे सुना करते थे! रामेश्वर सिंह कश्यप की कालजयी नाट्य कृति ‘लोहा सिंह’ और इसके लोकप्रिय पात्रों में से एक ‘खदेरन की मदर’…क्या याद है आपको या फिर आपने सुना है इसके बारे में घर के बड़े-बुजुर्गों से?

गणतंत्र दिवस परेड में राजपथ पर आकाशवाणी की झांकी

 

रेडियो पर क्रिकेट कमेंट्री की भी यादें हैं. मुरली मनोहर मंजुल, सुशील दोषी, सुरेश सरैया, नरोत्तम पुरी के शब्द आज भी कानों में गूँजते मालूम पड़ते हैं. शब्दों से जिस तरह मैचों के दृश्य वे उपस्थित किया करते थे, उसकी सिर्फ यादें शेष हैं.

बुलंद आवाज के धनी सरदार जसदेव सिंह

रेडियो सिलोन से बिनाका, बाद में सिबाका, गीत माला की यादें तो पुरानी पीढ़ी के साथ बातकर ही नईपीढ़ी जान पाएगी. लोगों को गानों के काउंट डाउन का इंतजार रहता था. लोग इसकी राह तकते थे कि कौन—सा गाना इस सप्ताह किस पायदान पर है. श्रोता संघों की राय और रिकॉर्ड की बिक्री पर गानों की लोकप्रियता तय होती थी और क्या मजाल कि प्रसारण के वक्त कोई चूं शब्द भी निकाल ले.  लेकिन जो इस कार्यक्रम को दूसरे कार्यक्रमों से अलग करती थी वह थी इसकी प्रस्तुति. अमीन सायानी का नाम उन दिनों हर जुबान पर चढ़ा रहता था. यहां तक कि आॅर्केस्ट्रा वगैरह में भी जो उद्घोषक होते थे अमीन सायानी की आवाज की नकल उतारा करते थे.

अमीन सायानी

इसी तरह बीबीसी का प्रसारण अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता था. कुछ लोग तो प्रसारण का समय होते ही सारा कुछ छोड़कर रेडियो आॅनकर बैठ जाते थे. डिजीटल का जमाना नहीं था. रेडियो सिग्नल कमजोर हुआ करता था लेकिन लोग रेडियो के एं​टीना में तार जोड़कर जुगाड़ टेक्नोलॉजी से प्रसारण को सुनने का प्रयास करते थे.

गणतंत्र दिवस परेड का आंखों देखा हाल सीधे राजपथ से

काश! फिर से लौट आता रेडियो का वह स्वर्णिम दौर. वह दौर जब आवाज ही पहचान हुआ करती थी.

पप्पू यादव ने पटना में खोल दिया है कैंटीन . 20 रुपये में भरपेट खाना, रोज का मेनू चेंज . कहाँ है यह कैंटीन,देख लीजिए वीडियो में…

 

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आकाशवाणी के युववाणी कार्यक्रम से पत्रकारिता का संक्रमण लगा. छात्रजीवन में स्वतंत्र रूप से लेखन. तदुपरांत नवभारत टाइम्स के 'हैलो दिल्ली' और 'शुभागमन' एवं दैनिक जागरण के 'नोयडा सिटी' 'जोश' एवं 'प्रॉपर्टी' के लिए दो वर्षों तक फीचर लेखन. 'विचार सारांश', 'मेरी संगिनी', 'द संडे इंडियन' 'चौथी दुनिया' में सब एडिटर, असिस्टेंट एडिटर, एसोसिएट एडिटर, डिप्टी एडिटर की जिम्मेवारी संभालने के बाद. ढाई वर्षों तक स्वतंत्र रूप से अनुवाद का कार्य. इंटरेस्ट का फील्ड आर्ट, कल्चर, ट्रेवल, फूड, कॅरियर वगैरह. ढाई वर्षों तक 'किलकारी', बिहार बाल भवन, मगध प्रमंडल, गया में प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक. संप्रति विगत एक साल से बिहार के सबसे प्रमुख वेब पोर्टल 'लाइव सिटीज' से जुड़कर कार्य. मुख्य अभिरूचि ट्रैवल, फोटोग्राफी, म्यूजिक, थियेटर

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