Patna में यहां बनता है ओल का रसगुल्ला, स्वाद ऐसा कि मुंह में पानी आ जाएं

लाइव सिटीज डेस्क : (आदित्य नारायण) मिठाई कड़वाहट को दूर करता है. भारतीय भोजन में मिठाई का विशेष स्थान है. मीठा के बिना भोजन तो पूरा ही नहीं माना जाता. यदि कोई मेहमान घर आये तो उसका पहला स्वागत मीठे से ही किया जाता है. शादी, तीज, त्यौहार हर अवसर पर मिठाई के बिना तो सब कुछ सुना ही लगेगा. बात मिठाई की हो और रसगुल्ले का नाम ना आये यह तो हो ही नहीं सकता. रसगुल्ले को मिठाई का राजा कहा जाता है. इस मिठाई में इतना दम है कि यह दो राज्यों के बीच अपने अधिकार को लेकर जंग भी छिड़वा सकता है.

जी हां, रसगुल्ले के मालिकाना हक़ को लेकर बंगाल और ओडिशा में दिलचस्प लड़ाई भी हो चुकी है. दोनों राज्यों के बीच विवाद इस बात को लेकर था कि रसगुल्ले का आविष्कार कहां हुआ है. खैर आज हम आपको उन दोनों राज्यों के विवाद के बारे में नहीं बल्कि एक खास रसगुल्ले के बारे में बताने जा रहे हैं.


आमतौर पर रसगुल्ले को छेना से बनाया जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि अपने ही शहर में एक ऐसी जगह है जहां ओल का रसगुल्ला मिलता है. जी हां मुजफ्फरपुर के रहने वाले मंगल ने एक नायाब रसगुल्ला तैयार किया है.

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जिसका स्वाद पूरे पटनावसियों ने कुछ दिन पहले आयोजित बिहार दिवस के व्यंजन मेला में चखा. व्यंजन मेला में स्टॉल नंबर 9 पर हर रोज ग्राहकों की भीड़ बस मंगल के हाथों से तैयार ओल के रसगुल्ले को खाने के लिए ही उमड़ती थी. हालांकि इस दुकान पर आपको तमाम तरह की लजीज मिठाइयां मिलेंगी. लेकिन यहां के ओल का रसगुल्ला की तो बात ही अलग है.

मंगल बताते हैं कि आजतक लोगों ने ओल की सब्जी, चटनी और आचार ही खायी है. ये पहली बार है, जब पटना और व्यंजन मेला में आए तमाम बिहारीयों को कुछ नया जायका खाने को मिल रहा है. ओल का रसगुल्ला किसी भी आम मिठाई से अलग है. इसके बनाने की विधि हो या इसमें लगने वाली मेहनत.

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उन्होंने बताया कि सबसे पहसे उन्होंने ने इस मिठाई को बनाने का स्किल बिहार सरकार द्वारा आयोजित स्किल डेवलपमेंट शिविर में ही सीखा था. तब से यह पहला मौका जब मैने इसको सार्वजनिक तौर पर इसे लोगों के सामने प्रस्तुत किया है. और इसका शानदार रिसपॉन्स भी मुझे मिल रहा है. तीन दिवसीय बिहार दिवस में हर रोज इस मिठाई का स्टॉक खत्म हो जाता था.

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