IBM ने बनाया है सबसे छोटा कंप्यूटर, किसी भी प्रोडक्ट को देखते ही बता देगा कि असली है या नक़ली

लाइव सिटीज डेस्क :   आईबीएम (इंटरनेशनल बिजनेस मशीन कॉर्पोरेशन) का दावा है कि उसने दुनिया का सबसे छोटा कंप्यूटर बनाया है. कंपनी ने एक प्रोग्राम में इस माइक्रो कंप्यूटर को सबके सामने रखा. कंपनी का कहना है कि ये एक एंटी फ्रॉड डिवाइस है, जिससे डिजिटल फिंगरप्रिंट से रोजमर्रा की वस्तुओं में एम्बेडेड किया जा सकता है. फिलहाल, इसकी उत्पत्ति को सत्यापित किया जा सकता है. इस डिवाइस में एक चिप लगी है. इसके अंदर प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज सहित पूरा कंप्यूटर सिस्टम मौजूद है. कंपनी का दावा है कि अगले 5 साल में यह मार्केट में आ जाएगा और इसकी कीमत सिर्फ 7 रुपए होगी.

जी हां सबसे छोटा कंप्यूटर…

IBM का कहना है कि इस कंप्यूटर में करीब 10 लाख ट्रांजिस्टर हैं, जिनको सूक्ष्म दृष्टि से देखा जा सकता है. ये छोटा कम्प्यूटर डेटा पर निगरानी रखने, विश्लेषण करने, कम्युनिकेशन करने और यहां तक ​​कि कार्य करने में भी सक्षम है. साथ ही इसमें मेमोरी के लिए SRAM दी गयी है, जबकि पावर के लिए Photo-Voltaic Cell लगे होंगे. इसमें LED और Photo Detector लगे होने के कारण ये अपलिंक और डाउनलिंक कम्युनिकेशन के लिए भी सक्षम है.

ये डिवाइस हमारी रिसर्च 5 in 5 प्रोजेक्ट का हिस्सा है. जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है कि हमारी रिसर्च टीम Artificial Intelligence (AI), Block Chain, Encryption and Internet of Things पर आधारित काम कर रही है. ये सभी तकनीकें क्रिप्टो-एन्कर्स से जुड़ी होती हैं जो Block Chain टेक्नोलॉजी पर आधारित है. यही क्रिप्टो-एन्कर्स छोटे कंप्यूटर या ऑप्टिकल कोड का रूप लेते हैं, जो प्रोडक्ट में एम्बेड किए जा सकते हैं.

क्या है क्रिप्टो एंकर तकनीक

अपने ब्लॉग के जरिए आईबीएम के रिसर्चर अरविंद खन्ना ने कहा कि क्रिप्टो एंकर एक ऐसी तकनीक है जो नए समाधानों का मार्ग प्रशस्त करती है. इसके जरिए नकली वस्तुओं की पहचान,  खाद्य सुरक्षा और इनकी प्रामाणिकता का पता लगाया जा सकता है. साथ ही आईबीएम इस तकनीक के अलावा लेटिस क्रिप्टोग्राफिक एंकर, एआई पावर रोबोट माइक्रोस्कोप और क्वांटम कंप्यूटर जैसी दूसरी तकनीक भी ला रहा है. जिससे पर्यावरण प्रदूषण, पानी की कमी और बढ़ते तापमान की समस्याओं को कम किया जा सकता है.

IBM अगले 18 महीनों के अंदर क्रिप्टो-एन्कर्स के पहले मॉडल को तैयार कर लेगा. जबकि अगले पांच सालों के भीतर ये प्रोडक्ट बाजार में भी उपलब्ध हो जाएगा.

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