भारत के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में देखा गया लाल कानों वाला दुर्लभ हाथी, देखकर हो जाएंगे हैरान

लाइव सिटीज डेस्क : प्रकृति निर्मित इस दुनिया में इनन को देखने के लिए कई अद्भुत और विचित्र चीजें हैं. एक इंसान जिस चीज के बारे में सोच भी नहीं सकता है, प्रकृति ने उन चीजों को भी बनाया हुआ है. जिस तरह से जमीन पर जीवन संभव हुआ है, ठीक उसी तरह से पानी के अन्दर भी जीवन है. जमीन के पारिस्थितिकी तंत्र की तरह ही जल का भी अपना पारिस्थितिकी तंत्र है. जल के अन्दर कई ऐसे हैरान करने वाले जीव देखने को मिल जायेंगे जो आपने पहले नहीं कभी देखा होगा.

हाथी को सबसे शांत जानवर कहा जाता है



जानकारी के अनुसार जलीय जीवों में सबसे बड़ा जीव ब्लू व्हेल होती है. यह इतनी विशालकाय होती है कि आप सोच भी नहीं सकते हैं. कई व्हेल तो इतनी बड़ी होती हैं कि उनके अन्दर 10 हाथी भी समा सकते हैं. हालांकि व्हेल भी एक मछली ही है. अगर हम बात करें जमीन के सबसे विशाल जानवर की तो वो हाथी है. इसी बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जलीय दुनिया कितनी विचित्र है. हाथी को सबसे शांत जानवर कहा जाता है, लेकिन एक बार जब यह क्रोधित हो जाये तो आपने सामने आने वाले बड़े से बड़े पेड़ को भी उखड फेंकता है.

लाल कानों वाला हाथी

एशिया में हाथियों की संख्या सबसे ज्यादा है. एशियाई हाथी पुरे विश्व में प्रसिद्ध हैं. आपने अपने जीवन में बहुत हाथी देखें होंगे लेकिन आज हम आपको जिस हाथी के बारे में बताने जा रहे हैं, वैसा हाथी आपने शायद ही पहले कभी देखा होगा. यह हाथी अपनी खुबसूरत बनावट की वजह से आजकल चर्चा में बना हुआ है. आपने काले कानों वाले हाथी तो बहुत देखें होंगे लेकिन क्या कभी आपने लाल कानों वाला हाथी देखा है? शायद नहीं देखा होगा. इस साल की शुरुआत में लम्बे समय के बाद लाल कानों वाले हाथी को देखा गया था.

 भारत के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में देखा गया

लाल कानों वाला एशियाई हाथी इस साल की शुरुआत में भारत के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में देखा गया था. इसे एक बैंक कर्मचारी ने अपनी यात्रा के समय देखा था. हालांकि हाथियों के कान लाल नहीं होते हैं. ऐसा प्राकृतिक रंजकता यानि नेचुरल पिगमेंटेशन की वजह से होता है. एशियाई नर हाथी को समूह से अकेले होकर घुमने की आदत होती है. ऐसे लाल कानों वाले हाथी कभी-कभी ही देखने को मिलते हैं. लाल कानों वाले हाथियों की प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है. हाथी के कान लाल होने के लिए जगह और प्रकृति का भी योगदान होता है.