‘हीलियम केस’ में भरकर रखा हुआ है भारतीय संविधान, जानिये ‘गणतंत्र दिवस’ से जुड़ी रोचक बातें

26 जनवरी 1950 को देश में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन ज्यादातर लोग घर पर छुट्टीयों के साथ सेलिब्रेट करते है. बच्चे स्कूल में तिरंगा फहरा कर, तो सरकारी ऑफिस में भी इस दिन कई तरह के सांसकृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है. वही देश भर के राज्यों में राज्यपाल से और नई दिल्ली में देश के राष्ट्रपति झंडोतोलन कर देश को संबोधित करते हैं. ये दिन हम सबके लिए बहुत ही खास होता है. कड़कड़ाती ठंड में सुबह-सुबह जग कर जलेबी लाने से लेकर दोस्तों के संग राष्ट्रगाण गाने की फीलिंग को शब्दों में डिस्क्राइब नहीं किया जा सकता. गणतंत्र दिवस के दिन का माहौल देखने लायक होता है. हर गली और नुक्कड़ पर आपको देशभक्ति के गीत सुनने को मिल जाएंगे. उन गीतों को सुनकर हमारे अंदर जोश भर जाता था. क्योंकि साल में एकबार आने वाले इस दिन की बात ही कुछ और होती है.

लेकिन इन सबसे हटकर भी यह दिन बहुत ही खास है. क्योंकि गणतंत्र दिवस से जुड़े ऐसी कई चीजें है, जिन्हें शायद ही आप लोग जानते होंगे. आज हम आपको गणतंत्र दिवस से जुड़े ऐसे ही कुछ फैक्ट्स बताने जा रहे है, तो देर किस बात की आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ मजेदार फैक्ट्स…

संविधान लागू होने से पहले डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा ने 2 साल, 11 महीने, 18 दिन में कुल 166 दिन बैठक की थी.

संविधान समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दो साल और 11 महीनों में संविधान का पहला ड्राफ्ट लिखा था.

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है. इसमें अब 450 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं जिन्हें 22 भागों में बांटा गया है. लेकिन जब इसे बनाया गया था

तब इसमें 395 अनुच्छेद हुआ करते थे जो 22 भागों में बांटे गए थे उस वक्त इसमें सिर्फ 8 अनुसूचियां ही शामिल थीं.

भारतीय संविधान की हिंदी और इंग्लिश में दो लिखित प्रतिलिपियाँ हैं जिन्हें संसद में हीलियम से भरे केस में रखा गया है. हमारा संविधान बहुत सुन्दर हैण्डराइटिंग में लिखा गया है. इसे प्रेम बिहारी नारायण नाम के आर्टिस्ट ने लिखा था और यह देहरादून में पब्लिश हुआ था.

हर साल गणतंत्र दिवस पर किसी दूसरे देश की हस्ती भारत आकर शिरकत करती है. क्या आप जानते हैं कि 26 जनवरी 1950 को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्नो पहले मुख्यअतिथि बने थे.

गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान एक क्रिश्चियन गाना Abide with Me बजाया जाता है. यह गाना इसलिए बजाया जाता है क्योंकि यह महात्मा गांधी के पसंदीदा गानों में से एक हुआ करता था.

1950 से 1954 के दौरान गणतंत्र दिवस का सेलिब्रेशन दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर होता था. इसके बाद राजपथ इसकी स्थाई जगह बन गई. अगर इस आर्टिकल को पढ़कर आपकी कुछ पुरानी यादें ताजा हो गईं तो इन्हें अपने करीबियों के साथ शेयर करना ना भूलें.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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