बागुन सुंबरुई 1967 से 5 बार सांसद और 4 बार विधायक रहे, पहली बार बताया अपनी 58 पत्नियों का राज

लाइव सिटीज डेस्क : देश में एक से बढकर एक सांसद हैं जो ठाट बाट के साथ रहते हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी सांसद हैं जो सांसद तो हैं लेकिन कोई घमंड नहीं करते और लोगों के बीट अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं. हम बात कर रहे हैं बागुन सुंबरुई की जो 1967 से झारखंड के चाईबासा से 5 बार सांसद और 4 बार विधायक रह चुके हैं.



83 साल के बागुन की झारखंड-बिहार से दिल्ली तक दो खास पहचान है- सर्दी, गर्मी हो या बरसात, वे एक धोती लपेटकर रहते हैं और कितनी शादियां की, गिनती याद नहीं. हालांकि, बताया जाता है कि उन्होंने 58 शादियां कीं. बहरहाल पहली बार इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने इतनी शादियां क्यों की?

कई पत्नियां छोड़कर चली गईं

बागुन इतनी शादियों के सवाल पर कहते हैं- “पहले यहां हाट या मेला लगा करते थे. इनमें शामिल होने के लिए आने वाले कारोबारी आदिवासी लड़कियों का हैरेसमेंट करते थे. कई लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती थीं. बहुत झमेला होता था. ऐसी लड़कियों को मैंने अपना नाम देना शुरू किया. उनको सहारा दिया. कई लड़कियों ने मुझे पति बताकर नौकरी की. उनको कोई साथी मिला तो मुझे छोड़कर भी चली गईं. कई लड़कियां जिंदगी में आईं और गईं. कितनों का नाम याद रखें..? न किसी के आने पर एतराज था और न ही किसी के जाने पर.”

रेंजर की बेटी से किया प्रेम विवाह

कोल्हान डिविजन के हेडक्वार्टर चाईबासा के गांधी टोला में रहनेवाले बागुन सुंबरुई की लव स्टोरी ऐसी है कि कई फिल्में बन जाएं. 7वीं पास बागुन और उस वक्त चक्रधरपुर रेलवे स्कूल से मैट्रिक पास दशमती सुंडी की कहानी ‘1946 अ लव’ स्टोरी है.

दशमती करकट्‌टा की रहने वालीं थीं और बागन बुहथा के. दोनों के परिवारों को रिश्ता कबूल नहीं था. दशमती के पिता रेंजर थे. उन्होंने गांव के लोगों को बागुन की पिटाई करने को कहा. बागुन को ग्रामीणों ने घेर लिया, लेकिन दशमती को लेकर बागुन चतुराई से चल दिए. दोनों घरों में हंगामा हुआ, फिर शादी कर ली.

रेंजर ने बागुन के पिता मानकी सुंबरुई पर केस कर दिया. फिर बागुन ने एक केस में ससुरजी को ऐसा फंसाया कि उन्हें पंचायत में 8 बार दामाद- दामाद… कहना पड़ा. इसके बाद दशमती के पिता ने उन्हें दामाद मान लिया. बागुन ने मुक्तिदानी सुंबरुई और अनिता सोय से भी शादी की. अनिता टीचर हैं और अभी वही साथ रहती हैं.

फूलों से प्यार है

बागुन ने कहा कि मेरे नाम का अर्थ सारगर्भित है. हो भाषा में ‘बा’ यानी फूल और ‘गुन’ मतलब गुण. मेरे भीतर भी फूल का गुण है इसलिए नाम है बागुन. मैं भंवरा भी हूं क्योंकि मुझे फूलों से प्यार है. मेरे घर के आंगन में गुलाबी और सफेद गुलाब हैं. इन पौधों को रोपने वाले का नाम भी फूल है. फूलसिंह सोय. वह आज भी मेरे साथ ही रहती है.

बागुन के शरीर पर सालोंभर धोती रहती है. बागुन कहते हैं कि एक धोती पहन गांधीजी ने देश को आजाद करा दिया. बिनोवा भावे भी खुले बदन रहे. मैंने बिहार, छत्तीसगढ़, प. बंगाल, ओडिशा को मिलाकर झारखंड की लड़ाई की थी, तबसे खुला बदन रहने लगा. बाबा रामदेव ने मेरे खुले शरीर का राज पूछा था. उनसे मिलकर यह राज बाबा को बताऊंगा.