भारतीय नौसेना के युद्धपोत कर देते हैं दुश्मनों के दांत खट्टे, आइए जानते हैं इन्हें…

लाइव सिटीज डेस्क : किसी भी देश की सुरक्षा उसकी सेना की मजबूती पर टिकी होती है. अगर बात करें भारतीय सेनाओं की तो हमारी थल, वायु और जल सेना दुनिया के ताकतवर देशों में आती है. खासकर भारतीय थल सेना दुनिया की तीसरी सबसे मजबूत सेना है. लेकिन वही हमारी जल यानी नौसेना की ताकत अच्छे-अच्छे देशों के आर्मी के दांत खट्टे करने के लिए काफी है. अगर भारतीय नौसेना की ताकत की बात करें, तो नौसेना के पास एक बेड़े में पेट्रोल चालित पनडुब्बियां, विध्वंसक युद्धपोत, फ्रिगेट जहाज, कॉर्वेट जहाज, प्रशिक्षण पोत, महासागरीय एवं तटीय सुरंग मार्जक पोत (माइनस्वीपर) और अन्य कई प्रकार के पोत हैं.

आइए जानते हैं भारतीय नौसेना के बारे में….



आईएनएस विक्रमादित्य


आईएनएस (INS) विक्रमादित्य पूर्व सोवियत विमान वाहक एडमिरल गोर्शकोव का नया नाम है, जो भारत द्वारा हासिल किया गया है. पहले अनुमान था कि 2012 में इसे भारत को सौंप दिया जाएगा, किंतु काफी विलंब के पश्चात् 16 नवंबर 2013 को इसे भारतीय नौसेना में सेवा के लिए शामिल कर लिया गया. दिसंबर अंत या जनवरी आरंभ में यह भारतीय नौसैनिक अड्डा तक पहुंच जाएगा.

भारतीय नौसेना पोत विराट


भारतीय नौसेना पोत विराट (आईएनएस विराट) भारतीय नौसेना में सेंतौर श्रेणी का एक वायुयान वाहक पोत है. भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति (फ़्लैगशिप) का यह पोत लंबे समय से सेना की सेवा में है. भारतीय नौसेना पोत विक्रांत के सेवामुक्त कर दिए जाने के बाद इसी ने विक्रांत के रिक्त स्थान की पूर्ति की थी. इस समय यह हिंद महासागर में उपस्थित दो वायुयान वाहक पोतों में से एक है.

आईएनएस कोलकाता


आईएनएस कोलकाता– डी-63 को भारत में अब तक तैयार किया गया सर्वाधिक ताकतवर युद्धपोत माना जाता है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16-अगस्त, 2014 को मुंबई स्थित नौसेना गोदी में ‘आईएनएस कोलकाता’ भारतीय नौसेना को सौंपा. इसमें लगी ज्यादातर प्रणालियां स्वदेश निर्मित हैं, जिनमें सीएमएस, एसीएस, एपीएमएस, फोल्डेबल हैंगर डोर, हेलो ट्रैवर्सिंग सिस्टम और एचयूएमएसए एनर्जी प्रणाली प्रमुख हैं. आईएनएस कोलकाता की एक अन्य खासियत है कि यह नाविकगण के लिए अत्यंत आरामदेह है.

आईएनएस कोच्चि


आईएनएस कोच्चि (INS Kochi, D-64) भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत है जिसे 30 सितंबर 2015 को नौसेना में शामिल किया गया. यह आईएनएस कोलकाता के बाद कोलकाता-श्रेणी विध्वंसक श्रृंखला का दूसरा युद्धपोत है.

आईएनएस विशाखापत्तनम


देश में ही बना युद्धपोत आईएनएस विशाखापत्तनम को 20 अप्रैल 2015 को मुबंई के समुद्र में उतारा गया. एक ओर जहां ये अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, वहीं दूसरी ओर ये दुश्मन के मिसाइल को चकमा देने में भी सक्षम है. वजह यह है कि इसे स्टेल्थ तकनीक से बनाया गया है. इतना ही नहीं ये एटमी, जैविक और रासायनिक हमले के हालात में भी चुनौतियों का सामना कर सकता है. प्रोजेक्ट 15-बी के तहत इसे मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में तैयार किया गया है. 7300 टन वजनी ये नौसेना का सबसे बड़ा डिस्ट्रॉयर यानी कि विध्वंसक है, जिसमें आठ ब्रहोम्स मिसाइल लगे हैं.

पनडुब्बियां


सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियां भारतीय नौसेना द्वारा प्रयोग की जाने वाली डीज़ल-बिजली चलित हैं. ये रूस और भारत के मध्य हुए समझौते के तहत बनी हैं. इन पनडुब्बियों की विस्थापन क्षमता 3000 टन है. अधिकतम गहराई 300 मीटर व अधिकतम गति 18 नॉट है. 53 नाविकों के साथ यह 45 दिन तक अकेले ऑपरेट कर सकती है. भारतीय पनडुब्बियों में सिंधुघोष, सिंधुध्वज, सिंधुराज, सिंधुवीर, सिंधुरत्न, सिंधुकेसरी, सिंधुकीर्ति, सिंधुविजय, सिंधुरक्षक, सिंधुराष्ट्र आदि भी प्रमुख हैं.