जयललिताः पढ़ाई में टॉप, फिल्मो में टॉप, राजनीति में टॉप

लाइवसिटीज डेस्क : जयललिता बहुभाषी थीं. तमिल, कन्नड़, मलयालम और अंग्रेजी में वे साधिकार बोलती थीं. लेकिन, यह बात कम लोग जानते हैं कि वे हिन्दी भी बड़ी खूबसूरत बोलती थीं. हिन्दी की दो फिल्में तो उन्होंने खैर की ही थीं.

लेकिन जब हिन्दी बोलने का मौका आया तो वे पीछे नहीं हटीं. 2007 में इलाहाबाद के पास दिया गया उनका भाषण बहुत चर्चा में रहा था. चुनाव का वक्त था और वे समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करने गई थीं. भाषण में उन्होंने क्वात्रोक्की को लेकर सोनिया गांधी की भी खिंचाई की थी. तब कई लोगों ने जयललिता की हिन्दी की तुलना सोनिया की हिन्दी से की थी. जयललिता बताया करती थीं कि वे स्कूल में हिन्दी बोलती थीं. यह उनकी सेकेंड लैंगुएज थी. स्कूल में पढ़ाई भी जाती थी.

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24 फरवरी 1948 में तमिल अय्यंगर ब्राह्मण परिवार में जन्मी जयललिता को यूं तो बचपन से हर सुख-सुविधा प्राप्त रही लेकिन तब भी उन्हें कुछ अभाव हमेशा सालते रहे. पहला तो पिता का था, जो उनके जन्म के दो साल बाद नहीं रहे. बाद में उनका मन उस मां को तलाशता रहा जो फिल्मों की शूटिंग की व्यस्तता के कारण बेटी से बात ही नहीं कर पाती थी.

जयललिता दस साल तक बेंगुलरू के बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ीं. फिर मां बच्चों को साथ लेकर चेन्नई आ गईं. चेन्नई में जया की मौसी अम्बुजावल्ली फिल्म अभिनेत्री थीं. उन्होंने अपनी बहन वेदवल्ली यानी जया की मां को भी काम दिला दिया.

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मां को छोटे-मोटे रोल मिलने लगे और जया का दाखिला सैक्रेड हार्ट मैट्रिकुलेशन स्कूल में करा दिया गया. यही वक्त था जब जया खुद को बड़ा तनहा महसूस करने लगीं. मां बेहद व्यस्त हो चुकी थीं. जया जब स्कूल जातीं तो मां उनसे पहले स्टूडियो जा चुकी होती थीं. मां रात में तब लौटतीं जब बेटी सो चुकी होती थी.

बाप और मां का अभाव झेलती लड़की को अध्ययन में सहारा मिला. वे हर कक्षा में टॉप करने लगीं. उनका लेखन बहुत सुन्दर था. एक इंटरव्यू में जया ने बताया था कि एक मर्तबा उन्होंने अंग्रेजी निबंध प्रतियोगिता जीती थी. इनाम मिला था. वे बताती हैं कि अपनी खुशी को मां से शेयर करने के लिए उन्हें रात देर तक जागना पड़ा था. और, जब मां आईं तो वे सो चुकी थीं. वे अपनी खुशी बात में शेयर कर पाईं पहले उन्हें मां की झिड़की खानी पड़ी कि वे बेडरूम में क्यों नहीं सो रहीं.

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जब जया बचपन से तरुणाई में प्रवेश कर रही थीं, उस वक्त उनके सपनों के दो राजकुमार थे. पहले प्रख्यात क्रिकेटर नरीमन कॉन्ट्रैक्टर और दूसरे शम्मी कपूर. कॉन्ट्रैक्टर के लिए वे टेस्ट मैच देखने स्टेडियम पहुंच जाती थी. बालपन के अपने इन दोनों क्रश का जिक्र जया ने सिमी गरेवाल के प्रोग्राम रॉन्दवू विद सिमी में किया है. इस कार्यक्रम में वे खुद को शम्मी का बिगेस्ट फैन बताती हैं और कहती हैं कि जंगली उनकी फेवरिट फिल्म है और याहू उनका फेवरिट गाना. यहीं पर सिमी के अनुरोध पर वे आजा सनम मधुर चांदनी में हम …गीत भी गा कर सुनाती हैं.whatsapp-image-2016-12-06-at-10-31-28

हिन्दी फिल्मों से जया रिश्ता नन्हा सा रहा. 1968 में धर्मेंद्र के साथ इज्जत नाम की फिल्म के बाद उन्होंने फिर बॉलीवुड का रुख नहीं किया. लेकिन यह बात कम लोग जानते हैं कि इज्जत उनकी इकलौती हिन्दी फिल्म नहीं थी. उन्होंने 1962 में मनमौजी नाम की फिल्म में बालकलाकार के रूप में एक नन्हा सा रोल किया था.

जया फिल्मों में काम नहीं करना चाहती थीं. स्कूल में टॉप करने के बाद उन्हें सरकारी स्कॉलरशिप मिली थी. वे उच्चशिक्षा पाना चाहती थीं लेकिन उनकी मां ने उनकी महत्वाकांक्षा पर यह कह कर पानी फेर दिया कि उन्हें खुद अब काम मिलना बंद हो गया है. ऐसे में परिवार के खर्च और भाई की अच्छी पढ़ाई के लिए काम करना जरूरी है. इस तरह परिवार पालने के लिए एक ब्रिलिएंट स्टूडेंट को एक्टिंग के पेशे को अपनाना पड़ा.

एमजीआर से उनका क्या रिश्ता था? सिमी ने यह कठिन सवाल भी जयललिता से पूछा था. जया ने बड़े सहज भाव से कहा थाः वे मेरी मां थे, पिता थे, गुरु थे और मित्र थे. इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जीवन में कभी मुफ्त का प्यार नहीं मिला.

जया का बचपन का एक नाम कोमलवल्ली भी था. वैसे उनका पूरा नाम था जयरामन जयललिता. जयरामन उनके पिता का नाम था. लेकिन पिता के नाम में शामिल जय शब्द परिवार को मैसूर के शाही परिवार से जोड़ता था. यह जय शब्द मैसूर के महाराजा जयरामचंद्र वोड्यार से मिला था. मतलब यह कि एक तरह की राजकुमारी भी थीं जया.

वीडियो कैसेट की दुकान चलाने वाली शशिकला से दोस्ती

जयललिता की मित्र शशिकला को कौन नहीं जानता. कहा जाता है कि अगर जयललिता की विस्तृत जीवन कथा कोई लिख सकता है तो वह शशिकला ही हैं. दोनों की मैत्री बहुत पुरानी है. एक वक्त था जब शशिकला वीडियो कैसेट शाप चलाती थीं और जयललिता उनसे किराए में कैसेट ले जाता करती थीं.

कभी किसी ने इस दोस्ती पर जयललिता को कोमल और विशाल हृदय कहा था तो जया ने ऐतराज जताया था कि दोस्ती-दोस्ती होती है. और दोनों दोस्त विशाल हृदय होते हैं.

और जहां तक हृदय की कोमलता की बात तो इस बारे में जया ने एक अन्य साक्षात्कार में बहुत खुल कर कहा हैः हां, मैं कोमल हृदय थी. स्कूल में बड़े घरों की कई लड़कियां चिढ़ाती थीं कि मेरी मां फिल्मों में काम करती है. मुझे बहुत बुरा लगता था. पर अपने संस्कारों की वजह से उनका जवाब नहीं देती थी…. लेकिन अब राजनीति में इतने साल बिताने के बाद स्थिति बदल गई है. मैं अपने तंग करने वाले को बराबर का जवाब देती हूं. कई बार तो उससे भी ज्यादा.

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