देश की शान बढ़ाने चंदन तिवारी गई हैं एमस्टरडम, चल रहा है ‘भूंजल भात’ म्यूजिक फेस्ट

लाइव सिटीज डेस्क : 15 अक्तूबर को नीदरलैंड की राजधानी हेग में ‘भूंजल भात’ नाम से एक खास संगीत महोत्सव हो रहा है. इस आयोजन को लेकर पिछले कई माह से हेग और उसके जुड़वां शहर एमस्टरडम में तैयारी जारी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ होनेवाले इस खास और अनोखे संगीत समारोह में भारत से प्रतिनिधित्व ‘पुरबियातान’ फेम मशहूर युवा लोकगायिका चंदन तिवारी कर रही हैं.

इस आयोजन में भाग लेने के लिए चंदन पिछले एक सप्ताह से एमस्टरडम में हैं और वहां ‘बाईसेको’ जैसे मशहूर बैंड के कलाकारों संग अभ्यास कर फ्यूजन व चटनी गीतों की तैयारी की है. इस आयोजन में मशहूर कलाकारों की प्रस्तुति के साथ ही ‘भूंजल भात’ का खानपान भी होना है. ‘भूंजल भात’ भारत से गिरमिटिया बनकर सुरिनाम व अन्य देश में गये लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय खानपान है, इसीलिए इस संगीत समारोह को उसी नाम पर समर्पित किया गया है.

इस आयोजन को लेकर वहां रहनेवाले भारतीय मूल के लोगों में खासा उत्साह का माहौल है और भारतीयों द्वारा चंदन तिवारी की आवाज में भारत के ठेठ भोजपुरी गीत सुनने के लिए भारी संख्या में टिकट की बिक्री हुई है.

चंदन इस खास सांस्कृतिक आयोजन में बाईसेको बैंड के कलाकारों के संग संगीत की प्रस्तुति देंगी. बाईसेको नीदरलैंड का मशहूर म्यूजिकल बैंड है जिसमें अलग-अलग जगहों के कलाकार शामिल हैं. इस कार्यक्रम में चंदन तिवारी पुरबिया उस्ताद महेंदर मिसिर, भिखारी ठाकुर आदि के गीतों की तो प्रस्तुति करेंगी ही, साथ ही गांव में शादी-ब्याह में गाये जानेवाले ठेठ गीतों की भी प्रस्तुति नये अंदाज में करेंगी. इसके साथ ही गिरमिटिया समुदाय के बीच मशहूर और उनसे जुड़ाव रखनेवाले पलायन की पीड़ा और उससे जुड़े प्रेम के गीत का खास गायन करेंगी.

आयोजन के बारे में चंदन तिवारी का कहना है कि नीदरलैंड आये सप्ताह दिन से ज्यादा हो गये. उन्होंने बताया कि यहां आने से पहले एकदम से अंदाजा नहीं था कि यहां फिलहाल रोजगार या कारोबार के लिए रह रहे भारतीय या वर्षों-पीढ़ियों पहले पलायन कर आये भारतीय मूल के लोग अपने देश की माटी और संस्कृति से इस कदर मोहब्बत करते हैं. चंदन कहती हैं कि यहां आकर ही मालूम हुआ कि भारत के लोकसंगीत में जो कुछ हो रहा है, उसपर यहां के कलाकार भी व श्रोता, दोनों बारीक नजर रखते हैं, इसलिए यहां आते ही फरमाइशी गीतों की लिस्ट भी थमायी गयी.

बकौल चंदन, यह कोशिश होगी कि यहां इस देश में जिस उम्मीद से लोगों ने बुलाया है या पिछले सात दिनों से जिस तरह से प्यार-दुलार-नेह-छोह देकर उम्मीदें बांधे हुए हैं, उन अपेक्षाओं पर खरा उतरूं और अपने देश के लोकसंगीत के प्रति लोगों का प्रेम और बढ़े, गर्व का भाव आये. चंदन कहती हैं कि यह आयोजन मेरे लिए भी एक परीक्षा ही है. एकदम से नये किस्म के सारे वाद्ययंत्र है, वेस्टर्न पैटर्न के हैं. अधिकांश वादक कलाकार ऐसे हैं, जिनकी भाषा न हम जानते हैं ना वे हमारी भाषा वे जानते हैं, फिर भी हम साथ काम कर रहे हैं और साथ प्रस्तुति देंगे. वेस्टर्न म्यूजिक के साथ पारंपरिक और ठेठ गीतों के मिलान की यह पहली कोशिश कामयाब हो और लोगों का अधिक से अधिक जुड़ाव भोजपुरी लोकगीतों से हो, इसके लिए हरसंभव श्रेष्ठ प्रदर्शन की कोशिश होगी.

चंदन कहती हैं कि इस आयोजन का खास महत्व इसलिए भी है, क्योंकि पिछले कई सालों में संघर्ष के कई चरण देखते हुए यहां तक पहुंची हूं. एक-एक गीत गाने के लिए मंच के पीछे पूरी-पूरी रात इंतजार करनेवाले न जाने कितने आयोजनों में गई हूं. घंटों इंतजार के बाद भी गाना गाने का मौका नहीं मिलनेवाले आयोजन में भी गई हूं. उसके बाद इस आयोजन में, सात समंदर पार अपने देश का प्रतिनिधि कलाकार बनकर आने से मनोबल बढ़ा है, उत्साह-उमंग बढ़ा है. इसलिए खुद को साबित करने की भी कोशिश है.

सभी फोटो चंदन तिवारी के फेसबुक वाल से साभार

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