भारत छोड़ो आंदोलन : जिसने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाकर रख दी थी

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लाइव सिटीज डेस्क : आज भारत छोड़ो आंदोलन को 75 साल हो गए हैं. यह आंदोलन महात्मा गांधी की अगुवाई में शुरू हुआ था. जयप्रकाश नारायण और लोहिया जैसे नेताओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया था. 9 अगस्त का दिन इसलिए चुना गया था क्योंकि 1925 में इसी दिन काकोरी कांड हुआ था. आंदोलन की शुरुआत में महात्मा गांधी को नजरबंद और नेहरु को गिरफ्तार कर लिया गया था. 940 लोग मारे गए, 1630 घायल,18 हजार नजरबंद और 60 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए थे.

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डर गई थी अंग्रेजी हुकूमत

भारत छोड़ो आंदोलन के शुरू होते ही अंग्रेजी हुकूमत इतना डर गई थी कि उसने एक भी नेता को नहीं बख्शा. गांधी, नेहरू, पटेल, आजाद समेत कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. दरअसल अंग्रेजों की सोच ये थी कि बड़े नेताओं की गिरफ्तारी से आंदोलन ठंडा पढ़ जाएगा. देश के अलग अलग हिस्सों में राष्ट्रीय सरकारों का गठन हुआ. यूपी का बलिया, महाराष्ट्र का सतारा और बंगाल का हजारा भारत छोड़ो आंदोलन के महत्वपूर्ण केंद्र थे. बलिया में जहां चित्तु पांडे की अगुवाई में राष्ट्रीय सरकार का गठन किया गया. वहीं सतारा की सरकार लंबे समय तक चलती रही.

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आंदोलन की खास बात

महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरु हुआ यह आंदोलन सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था. इस आंदोलन की खास बात ये थी कि इसमें पूरा देश शामिल हुआ. ये ऐसा आंदोलन था जिसने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाकर रख दी थीं. ग्वालिया टैंक मैदान से गांधीजी ने कहा कि वो एक मंत्र देना चाहते हैं जिसे आप सभी लोग अपने दिल में उतार लें और वो वो मंत्र था करो या मरो था. बाद में ग्वालिया टैंक मैदान को अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाने लगा.

आंदोलन का असर

लेकिन आंदोलन के असर को इस तरह से समझा जा सकता है कि बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जनता ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ले ली. हालांकि ये अंहिसक आंदोलन था पर आंदोलन में रेलवे स्टेंशनों, सरकारी भवनों आदि को निशाना बनाया गया. ब्रिटिश सरकार ने हिंसा के लिए कांग्रेस और गांधी जी को उत्तरदायी ठहराया. लेकिन लोग अहिंसक तौर पर भी आंदोलन करते रहे. पूरे देश में ऐसा माहौल बन गया कि भारत छोड़ो आंदोलन अब तक का सबसे विशाल आंदोलन साबित हुआ. भारत छोड़ो आंदोलन का असर ये हुआ कि अंग्रेजों को लगने लगा कि अब उनका सूरज अस्त होने वाला है. पांच साल बाद 15 अगस्त 1947 को वो दिन आया जब अंग्रजों का प्रतीक यूनियन जैक इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है.

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