आज गूगल मना रहा इस महान हस्ती का जन्मदिन

google-doodle

लाइव सिटीज डेस्क : महान साहसी फ्रिडजॉफ नानसेन का जश्न आज 10 अक्टूबर को पूरी दुनियां मना रही है. गूगल भी अपने डूडल के जरिये आज फ्रिडजॉफ नानसेन का 156वां जन्मदिन मना रहा है. क्या आप इस महान हस्ती के बारे में जानते हैं. नानसेन ने दुनिया के अज्ञात इलाके का पता लगाया और एक अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी के रूप में खुद को दुनियां के सामने प्रस्तुत किया. उनके कामों को देखते हुए गूगल ने एक डूडल बनाया है जिसमें उनकी क्रियाएं और खोज का वर्णन किया गया है. नानसेन ने नार्वेजियन ध्रुवीय इलाके की खोज की थी और उन्हें शर्णार्थियों का पहला हाई कमीश्नर बनाया गया था जो कि नानसेन पास्पोर्ट के साथ आए थे.

खोजकर्ता होने के अलावा नानसेन एक वैज्ञानिक, राजनयिक और एक राजनैतिक कार्यकर्ता थे. नानसेन का जन्म 1861 में हुआ था. नानसेन एक समृद्ध अधिवक्ता होने के साथ-साथ अच्छे एथलीट भी थे. उनकी मां ने ही नानसेन को प्रोत्साहित किया था कि वे एथलीट बने और अपने शारीरिक कौशल का विकास करें.

नानसेन ने अपनी मां की बात मानी और वे बहुत ही जल्द शारीरिक गतिविधियों के एक्सपर्ट बन गए जिनमें स्कैटिंग, टम्बलिंग, स्वीमिंग और स्कींग जैसे खेल शामिल थे. स्कूल के दिनों में उनकी विज्ञान और कला में रुचि रही थी और विश्वविद्यालय में आने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वे जूलॉजी में कुछ बड़ा करेंगे. नानसेन ग्रीनलैंड के बर्फ से ढ़के इंटीरयर के पार एक अभियान का नेतृत्व करने वाले पहले व्यक्ति थे. इसकी खोज उन्होंने ही की थी. इस पर उन्होंने एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम ‘द फर्सट कॉसिंग ऑफ ग्रीनलैंड’ था.1861 में ओस्लो, नॉर्वे में जन्मे, नानसेन को युवावस्था से रोमांच की भावना भरी थी.

वे खूब दौड़ लगाते थे. कभी- कभी वे अपने कुत्तों के साथ खूब दूर तक दौड़ जाते. दौड़ की वजह से उन्हें सड़को और पहाड़ों से बहुत प्यार हो गया था. सड़क प्रेम ने रॉयल फ़्रेडरिक विश्वविद्यालय में जूलॉजी का अध्ययन करने के लिए उन्हें प्रेरित करता था. 1888 में, वह ग्रीनलैंड के बर्फ से ढंके हुए इंटीरियर के पार एक अभियान का नेतृत्व करने वाले पहले व्यक्ति बन गए थे. कुछ साल बाद, नानसेन ने उत्तर ध्रुव तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बनने का प्रयास किया. हालांकि यह अभियान असफल रहा था. 1914 में विश्व युद्ध की वजह से नानसेन को अपने शोधों के लिए घर में ही रहना पड़ा.

हालांकि,1920 तक, उनके हितों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए दुनिया के परिदृश्य को समझने में बदलाव किया. नानसेन युद्ध और प्रवासी शरणार्थियों के हजारों कैदियों को मुक्त करने के लिए काम किया. उन्होंने नानसेन पासपोर्ट बनाया. ऐसा यात्रा दस्तावेज जिसमें स्थाई शरणार्थियों को रहने और उनके विकास में सहायता के लिए अनुमति दी गई. नॉनसेन को 1922 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. फ्रिडजॉफ नानसेन ने अपना सारा जीवन दूसरों के लिए समर्पित कर दिया. 1905 में फ्रिडजॉफ नानसेन ने नॉर्वे की स्वीडन से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी और संघ भंग होने के बाद, ब्रिटेन के देश के मंत्री के रूप में सेवा की. 1920 में लीग ऑफ नेशंस ने उन्हें युद्ध के कैदियों को पुनर्वास के साथ सौंप दिया. नानसेन अपने कार्य में शानदार ढंग से सफल हुए.

रेड क्रॉस ने उन्हें 1921-1922 के अकाल में मरने वाले लाखों रूसी लोगों के लिए राहत देने के लिए कहा. रूस के लिए बहुत कम समर्थन के बावजूद और जुर्माने के लिए मुश्किल में मदद करने के लिए, नानसेन ने अपने काम को शक्ति और ऊर्जा के साथ अपनाई. बड़ी संख्या में लोगों को बचाने के लिए नानसेन ने पर्याप्त आपूर्ति बांट ली और वितरण किया.

1922 में, ग्रीस और तुर्की के बीच युद्ध के बाद, उन्होंने ग्रीस में रहने वाले लगभग 500,000 तुर्की लोगों के लिए तुर्की मिट्टी पर रहने वाले 1,250,000 यूनानियों के आदान-प्रदान को आसान बना दिया. साहसिक,शोध और मानवतावाद के जनक माने जाने वाले फ्रिडजॉफ नानसेन की का निधन 13 मई 1930 को हुआ.

यह भी पढ़ें – स्मार्ट बनिए आ रही DIWALI में, अपने Love Bird को दीजिए Diamond Jewelry
अभी फैशन में है Indo-Western लुक की जूलरी, नया कलेक्शन लाए हैं चांद बिहारी ज्वैलर्स
PUJA का सबसे HOT OFFER, यहां कुछ भी खरीदें, मुफ्त में मिलेगा GOLD COIN
मौका है : AIIMS के पास 6 लाख में मिलेगा प्लॉट, घर बनाने को PM से 2.67 लाख मिलेगी ​सब्सिडी
RING और EARRINGS की सबसे लेटेस्ट रेंज लीजिए चांद​ बिहारी ज्वैलर्स में, प्राइस 8000 से शुरू
चांद बिहारी अग्रवाल : कभी बेचते थे पकौड़े, आज इनकी जूलरी पर है बिहार को भरोसा

(लाइव सिटीज मीडिया के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)