कोचिंग संस्थान में दाखिला से पहले फैकल्टी टीचर के बारे जानना जरूरी : कुमारी प्रवीणा 

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लाइव सिटीज डेस्क (विनोद कर्ण) : मैट्रिक व इंटर परीक्षा परिणाम आने के बाद छात्र ही नहीं अभिभावकों को चिंता सताने लगी है कि वे तकनीकी शिक्षा (मेडिकल व इंजीनियरिंग) परीक्षा की तैयारी के लिए नामांकन कहां कराएं. बिहार के अभिभावकों की पहली पसंद कोटा में छात्र-छात्राओं के आत्महत्या की बार-बार आ रही खबर उन्हें परेशान कर रही है. दूसरी ओर अभिभावक अपनी सोच को बदल नहीं पा रहे हैं.
प्रतियोगी परीक्षा को लेकर दूसरे प्रांत में बच्चे को भेजने वाले अभिभावक मैट्रिक/इंटर की परीक्षा के बाद परिणाम आने का इंतजार नहीं करते. लेकिन बिहार के किसी भी शहर के कोचिंग संस्थान में नामांकन के लिए वे परीक्षा परिणाम आने का इंतजार करते रहते हैं. इससे छात्र को नुकसान होता है. आखिर क्या है कारण ? इसको लेकर नया टोला, पटना स्थित शिक्षामंदिर कोचिंग संस्थान (ट्रस्ट के अधीन संचालित) की अध्यक्ष कुमारी प्रवीणा का कहना है कि बेहतर परिणाम के लिए अभिभावक व शिक्षण संस्थान दोनों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी.
मैट्रिक हो या इंटर परीक्षा के तुरंत बाद छात्र/छात्रा को कोचिंग सेंटर में नामांकन ले लेना चाहिए. इससे उन्हें अधिक पढ़ने का मौका मिलेगा. हां कोचिंग सेंटर में नामांकन से पहले अभिभावक व छात्र/छात्राओं को फैकल्टी के बारे में जानकारी हासिल करने की जरूरत है. ऐसा नहीं करने पर कोचिंग सेंटर के अलावा खास विषय (फैकल्टी) की पढ़ाई के लिए उन्हें अलग से खर्च करने की नौबत का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि बिहार के छात्र-छात्रा मेधावी होते हैं पर ग्रामीण परिवेश से आने के कारण उन्हें लैंग्वेज की समस्या का सामना करना पड़ता है. यही कारण है कि शिक्षामंदिर में प्रत्येक दिन एक क्लास लैंग्वेज का रखा गया है. साप्ताहिक टेस्ट व परीक्षा की तिथि नजदीक आने पर टेस्ट सीरीज की व्यवस्था किसी भी संस्थान का अहम हिस्सा होना चाहिए. कोचिंग संस्थानों में फाउंडेशन व टारगेट क्लासेज के लिए अलग-अलग नामांकन होते हैं. फाउंडेशन कोर्स में नामांकन लेना ज्यादा लाभदायक है. इसमें पढ़ने व पढ़ाने का वक्त अधिक मिलता है. चूंकि अब इंजीनियरिंग/मेडिकल इंट्रेस इग्जाम में शामिल होने के लिए लिमिटेड चांस मिलता है.
उन्होंने प्रसन्नता जाहिर की कि बिहार के छात्र-छात्रा व उनके अभिभावक में बहुत बदलाव आया है. वे समय को यूंही खोना नहीं चाहते, तो कोचिंग सेंटर भी योग्य शिक्षकों को अपने यहां रख रहे हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार से कम से कम बच्चे बाहर जाये. उनके जरूरतों को हम पटना में पूरा करने के प्रयास में लगे हुए हैं. हमरा ट्रस्ट नो प्राफिट नो लोस के आधार पर काम कर रही है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि मेधावी छात्रों के लिए शिक्षामंदिर में अलग से प्रावधान रखा गया है. वैसे भी बगैर टेस्ट के शिक्षामंदिर में नामांकन संभव नहीं है.
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