कश्मीरी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है 16 वर्षीय जियान शफीक़

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लाइव सिटीज डेस्क : 26 अप्रैल को कश्मीर में 22 सोशल साइट पर एक महीने का बैन लगा दिया गया था. जिसमें फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर भी शामिल थे. भारत में एक बड़ी जनसंख्या इन ऐप का इस्तेमाल करती है. व्हाट्सऐप के आंकड़ो के अनुसार भारत में 200 मिलियन से अधिक व्हाट्सऐप यूज़र्स हैं, वहीं फेसबुक के अनुसार पूरे विश्व में भारत 213 मिलियन यूज़र्स के साथ दुसरे स्थान पर है.

बैन का कारण भारत विरोधी तत्वों द्वारा इनका यूज़ बताया था, जिसका असर कश्मीरी छात्रों,  पत्रकारों, मरीजों और कर्मचारियों पर साफ दिखायी देने लगा था. लोगों के बीच का संपर्क बहुत बड़ी संख्या में टूट गया था. आपसी जरुरी सूचनाओं को पहुंचाने में परेशानी आने लगी थी. पर कहते है ना ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है…’ ऐसे में समस्या का हल निकालने के लिए 16 वर्षीय जियान शफीक़ ने एक अनोखा उपाय खोजा और उन्होने कश्मीरियों के लिए एक अलग फेसबुक बना डाला जिसको उन्होंने ‘कैशबुक’ नाम दिया.

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जियान की उम्र अभी सिर्फ 16 साल ही है. जियान कश्मीर का रहने वाला है. कैशबुक नाम कश्मीर से बहुत जुड़ा हुआ लगता है. कैशबुक का आइडिया नया है, पर जियान और उनके मित्र ने इसे वर्ष 2013 में ही बना दिया था. तब जियान मात्र 13 साल के थे और उनके साथी उजेर 17 साल के. जियान के पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं जिसका प्रभाव जियान के जीवन पर साफ दिखाई पड़ता है. बचपन से ही जियान अपने पिता के लैपटॉप पर काम किया करते थे. जियान ने जब एचटीएमएल टैग्स लिखने शुरू किए तो उसकी कोडिंग में भी रुचि बढ़ी. जियान अब कम्प्यूटर की भाषा C++ और जावा भी सीखना चाहते हैं.

हाल ही में दसवीं पास करने वाले जियान का कहना है, कि ‘शुरू में कैशबुक चलन में नहीं आया, पर ऐसा नहीं है कि कोई इसका इस्तेमाल नहीं करता था. बहुत लंबे समय से कुछ लोग ही इसका इस्तेमाल कर रहे थे.’ बैन के दौरान जियान को लगने लगा कि लोगों के मन में बहुत कुछ है, जो वो आपस में सबसे बांटना चाहते हैं. किसी माध्यम के ना होने के कारण लोग बेजुबान-सा मेहसूस करने लगे थे. जियान ने लोगों की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए के लिए उजेर के साथ फिर से काम शुरू किया और परिणाम सामने है कैशबुक के रूप में. जिससे कश्मीर के आम लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिला. सोशल नेटवर्क को फिर से शुरू करने के बाद इसके यूजर्स तेजी से बढ़े हैं. अब जियान और उजेर वेबसाइट बंद नहीं करेंगे.

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जियान जैसे युवा उन लोगों के लिए जवाब हैं, जो कश्मीर के युवाओं को शक की निगाह से देखते है. जियान और जियान जैसे कई ऐसे काबिल लोग कश्मीर में हैं, जो बढ़ना चाहते हैं… कुछ करना चाहते हैं…, बस जरुरत है उन्हें नई दिशा दिखाने की. सुविधाओं को उन तक पहुंचाने की. ताकि जियान और जियान जैसी कबिलियत लोग भारत की प्रगति में सभी युवाओं के साथ कंधा से कंधा मिलाकर साथ चलें.