उम्र 115 साल और बिना चश्मा के ही पंडितजी पढ़ जाते हैं धकाधक अखबार

pandit ji

खगड़िया (मनीष कुमार) : यदि किसी बच्चे को अपने वयोवृद्ध दादाजी की नकल करनी हो तो उसके लिए चश्मा व अखबार आवश्यक हो जाता है. हो भी क्यों नहीं, उम्र के इस पड़ाव पर अमूमन दादाजी चश्मे पहन कर ही तो अखबार पढते हैं. यह अलग बात है कि आज के दिनों में बच्चों की आंखों पर भी चश्मे का चढ़ जाना आम बात हो गयी है.

लेकिन, खगड़िया जिले के चौथम प्रखंड अंतर्गत पिपरा पंचायत के पिपरा गांव निवासी वयोवृद्ध पंडित रामजी मिश्र उम्र के अपने 115 वर्षों के पड़ाव पर पहुंच गये है. इसके बाद भी उनकी आंखें बोलती हैं. आज भी वे बगैर चश्मे के अखबार को धकाधक पढ़ जाते हैं.

पंडित रामजी मिश्र का जन्म वर्ष 1903 में हुआ है. स्थानीय लोगों की मानें तो पंडितजी न सिर्फ चौथम प्रखंड, बल्कि जिले के सबसे वयोवृद्ध व्यक्तियों में से एक हैं. वहीं उनके युवा अवस्था में विभिन्न सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की चर्चाएं भी लोगों के जुबान पर आज भी है.

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पंडितजी अपने खान-पान एवं रहन-सहन के प्रति आज भी काफी सतर्क रहते हैं. उनकी अपनी अलग अनुशासित दिनचर्या है. सादा जीवन-उच्च विचार इनके जीवन का मूल मंत्र है. अपनी आंखों के राज के संदर्भ में पंडितजी बताते हैं कि आज की युवा पीढ़ी जीवन के आधारभूत सिद्धांतों से भटक कर महज दिखावे का जीवन जीने में यकीन रखते हैं. साथ ही वो कच्ची उम्र में ही विभिन्न प्रकार के व्यसन के शिकार हो जाते हैं. इसके कारण कम्र उम्र में ही वो विभिन्न शारीरिक समस्याओं से ग्रसित हो जाते हैं. ऐसे में जीवन में सादगी अत्यंत आवश्यक हैं.


पंडितजी के परिजन शिक्षक संतोष कुमार मिश्र कहते हैं कि हालांकि पंडित जी 7वीं पास ही हैं, लेकिन आज के ग्रेजुएट और पीजी होल्डर भी उनकी विद्वता के सामने बौने साबित हो जाते हैं. आज भी वो अंग्रेजों के अत्याचार एवं स्वतंत्रता सेनानियों के किस्से बहुत ही जीवंत तरीके से सुनाते हैं. पठन-पाठन में उनकी रूचि आज भी वही पहले वाली है. नग्न आंखों से समाचार पत्र के छोटे-छोटे अक्षरों को वो आज भी आसानी से पढ़ जाते हैं. बेशक पंडित जी का जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है.

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