नामी-गिरामी कोचिंग सेंटर के बावजूद फैकल्टी संस्थानों का रुतबा है कायम 

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लाइवसिटिज डेस्क (बिनोद कर्ण) : राजधानी पटना में देश के चोटी के कोचिंग सेंटर ने सीधे या फ्रैंचाइजी के माध्यम से अपने सेंटर खोल रखे हैं. बावजूद इसके फैकल्टी यानी खास विषय की पढ़ाई के शिक्षण संस्थान अपना रुतबा कायम रखने में कामयाब दिख रहा है. जबकि फैकल्टी संस्थान I IT/ JEE/ NEET के परिणाम आने पर अपने सेंटर के सफल छात्र-छात्राओं का विज्ञापन भी नहीं नहीं कर पाते हैं. उनका विज्ञापन होर्डिंग तक सीमित रहता है. बावजूद इसके फैकल्टी वालों के यहां छात्र-छात्राओं की कमी नहीं रहती है.
इसके अलावा बिहार के बच्चे अब पहले की तुलना में कोचिंग के लिए दूसरे प्रदेशों में कम जा रहे हैं. ऐसे कई सवाल हैं जिस पर ER S. MISHRA PHYSICS CLASSES, PATNA के ई. सुतीक्ष्ण मिश्रा से लंबी बातचीत हुई. श्री मिश्रा की पुस्तक PRACTICE PROBLEMS IN PHYSICS  ( FOR ENGINEERING & MEDICAL COLLAGE ENTERENECE EXAMINATION – S. MISHRA ) 2009 में प्रकाशित हो चुकी है.
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ई. सुतीक्ष्ण मिश्रा
श्री मिश्रा ने कहा कि बिहार में कभी भी योग्य शिक्षकों की कमी नहीं रही है. उनका कहना है कि पहले राजधानी पटना समेत बिहार में विधि-व्यवस्था की समस्या थी, जिस डर से अभिभावक अपने बच्चे को दूसरे प्रांत में भेजकर निश्चित रहते थे. हाल के वर्षों में बिहार में विधि-व्यवस्था की स्थिति सुधरी तो अभिभावक राजधानी पटना में बच्चों को रखने लगे हैं. उनका कहना है कि बिहार के छात्र-छात्रा मेधावी होते हैं. इसे देखते हुए बड़े कोचिंग सेंटर अब तेजी से बिहार की ओर रुख कर रहे हैं. उन्होंने  बताया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम ने भी कोचिंग सेंटर को आकर्षित किया है. साथ ही पहले की तुलना में बिहार के छात्र जब दूसरे प्रांत में जाना कम किया तो स्वाभाविक रूप से कोचिंग सेंटर यहां अपना पांव जमाने के प्रयास में लग गए.
जब कोचिंग सेंटर में सभी विषय की पढ़ाई एक ही जगह हो जाती है तो फिर फैकल्टी वाले के समक्ष चुनौती के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी कोचिंग सेंटर का हर फैकल्टी मजबूत हो यह जरूरी नहीं है. ऐसे में जब कोई छात्र खास विषय की पढ़ाई से संतुष्ट नहीं होता है तो वह फैकल्टी सेंटर की ओर रुख करता है. यही कारण है कि फैकल्टी सेंटर की मांग बरकरार है. खास विषय के विशेषज्ञ ने ही फिजिक्स/केमिस्ट्री/ मैथ/बायो के फैकल्टी खोल रखे है. जिन कोचिंग सेंटर में सभी विषय के योग्य शिक्षक हैं उनके बच्चे फैकल्टी संस्थान की ओर रुख नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि अब यहां के बच्चे पहले की तुलना में दूसरे प्रांत कम जा रहे हैं.
ध्यान देने योग्य बातें 
1. कोचिंग संस्थान में अनेक शिक्षक होते हैं और आप को उनके बारे में पहले से जानकारी नहीं होती है, परन्तु फैकल्टी सेंटर या ट्यूटोरियल में आप किसी शिक्षक के नाम से जाते हैं जिनकी योग्यता जगजाहिर होती है.
2. कोचिंग संस्थान के शिक्षक अक्सर अधिक वेतन के लिए राजनीति में लगे रहते हैं और इसका बुरा असर शिक्षण पर पड़ता है. लेकिन फैकल्टी सेंटर मे शिक्षकों को अपने नाम की चिंता होती है इसलिए वो बेहतर से बेहतर पढ़ाने की कोशिश करते हैं.
3. कोचिंग संस्थान में मैनेजमेंट का नियंत्रण शिक्षण पर होता है और शिक्षकों को खुलकर या मन माफिक पढ़ाने की आजादी नहीं होती है जबकि फैकल्टी सेंटर में टीचर छात्रों का सही आंकलन कर अपने शिक्षण की दिशा तय करते हैं.
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