भाई-बहन के अटूट प्यार को दर्शाता त्योहार रक्षाबंधन 

लाइव सिटीज डेस्क : भाई-बहन के प्यार को दर्शाता त्योहार रक्षाबंधन आज है. इसे पूरे देश में मनाया जाता है. राज्य, जाति और धर्म कोई भी हो, हर व्यक्ति इसे मनाता है. भारत के अलावा राखी मॉरीशस और नेपाल में भी मनाई जाती है. रक्षा बंधन भाई-बहन के प्यार का त्योहार है, एक मामूली सा धागा जब भाई की कलाई पर बंधता है, तो भाई भी अपनी बहन की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को तैयार हो जाता है.

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रक्षा बंधन का शाब्दिक अर्थ रक्षा का बंधन होता है. भाई अपनी बहन को हर मुश्किल से रक्षा करने वचन देता है. बहनें अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं. इसे राखी पूर्णिमा के तौर पर भी जाना जाता है. यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के सावन माह में पूर्ण चंद्र के दिन होता है, जिसे पूर्णिमा कहा जाता है.

रक्षाबंधन का इतिहास काफी पुराना है, जो सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा हुआ है. असल में रक्षाबंधन की परंपरा उन बहनों ने डाली थी जो सगी नहीं थीं, भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए ही इस पर्व की शुरुआत क्यों न की हो, लेकिन उसकी बदौलत आज भी इस त्योहार की मान्यता बरकरार है.

इतिहास के पन्नों को देखें तो इस त्योहार की शुरुआत 6 हजार साल पहले माना जाता है. इसके कई साक्ष्य भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं. रक्षाबंधन की शुरुआत का सबसे पहला साक्ष्य रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं का है. मध्यकालीन युग में राजपूत और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था, तब चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख हुमायूं को राखी भेजी थी. तब हुमायू ने उनकी रक्षा कर उन्हें बहन का दर्जा दिया था.

इतिहास का एक दूसरा उदाहरण कृष्ण और द्रोपदी को माना जाता है. कृष्ण भगवान ने राजा शिशुपाल को मारा था. युद्ध के दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की उंगली से खून बह रहा था, इसे देखकर द्रोपदी बेहद दुखी हुईं और उन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा चीरकर कृष्ण की उंगली में बांध दी, जिससे उनका खून बहना बंद हो गया. कहा जाता है तभी से कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था. सालों के बाद जब पांडव द्रोपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था, तब कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाई थी.

त्योहार मनाने के लिए शुभ मुहुर्त-

  • भद्रकाल रहेगा 11.04 बजे तक
  • सूतक शुरू होगा दोपहर 1.53 पर
  • राखी बांधने का समय सुबह 11.05 से लेकर दोपहर 1.52 बजे तक
चंद्रग्रहण 07 अगस्त की रात 10.53 पर लगेगा

चंद्रग्रहण 07 तारीख की रात 10.53 बजे शुरू होगा और 9 घंटे पहले यानि दोपहर 1.53 बजे सूतक लग जाएगा एवं सुबह 11.04 तक भद्र का असर रहेगा. जैसा कि आप सब जानते है भद्र काल और सूतक में कोई भी शुभ काम नहीं करते इसलिए इन दोनों के बीच का समय यानि सुबह 11.05 बजे से लेकर 1.52 मिनट तक आप राखी का त्योहार बना सकते है.

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