‘जन्नत’ में दहशत के बीच कश्मीरियों को इंजीनियर बना रहे हैं ये बिहारी

लाइव सिटीज डेस्कः जम्मू-कश्मीर, जहां से अक्सर हिंसा की खबरें सुर्खियां बनती हैं. आतंकी हमलों में भारतीय सैनिकों की शहादत हो या फिर पत्थरबाजों का आतंक, या फिर पाकिस्तान के सीज़ फायर के उल्लंघन में तबाह हुए लोग, बस यही सब याद आता है ‘जन्नत’ कहे जाने वाले कश्मीर के बारे में. लेकिन इसी बीच एक अच्छी खबर भी आई है. जहां बिहार के तीन नौजवान आईआईटियन्स ने घाटी के छात्रों को इंजीनियर बनाने का बीड़ा उठाया है.



घाटी के बच्चों को इंजीनियरिंग की तालीम दे रहे बिहारी

जी हां… हम बात कर रहे हैं बिहार के रहने वाले उन तीन इंजीनियर्स की, जिन्होंने घाटी में कुछ अच्छा करने की ठानी है. ये तीनों मिलकर एक कोचिंग सेंटर (द राइज) चलाते हैं. जहां छात्रों को एक अच्छा भविष्य देने की कोशिश की जाती है. श्रीनगर के रहने वाले मुबीन मसूदी ने बिहार के अपने तीन दोस्तों इंबिसात अहमद, सलमान शाहिद और सैफ़ई करीम के साथ मिलकर 2012 में इसकी शुरुआत करने का फ़ैसला किया था.

इंबिसात कहते हैं, “मैं अक्सर छुट्टियों में दोस्तों के साथ कश्मीर आता था. 2012 में भी मैं आया था. कश्मीर में हमने पाया कि यहाँ छात्रों के अंदर काफ़ी हुनर है लेकिन जानकारी की कमी है. बच्चे वहां नहीं जा पाते हैं, जहां उनकी जगह है. इस बात को हमने एक प्रॉब्लम की तरह लिया और मन बनाया कि जब हम ग्रेजुएट हो जाएंगे तो यहाँ हम फुल टाइम क्लासेज़ शुरू करेंगे.”

27 साल के सैफ़ई करीम कहते हैं, “मुझे यहाँ देखने को मिला कि लड़कियां यहां ख़ूब पढ़ती हैं, जबकि हमारे बिहार में लड़कियां अभी काफ़ी पीछे हैं.” 28 वर्ष के सलमान शाहिद कहते हैं कि कश्मीरी बच्चों में पढ़ने का काफ़ी शौक़ है लेकिन उनके लिए यहाँ वह सुविधाएं नहीं हैं जो दूसरे बड़े शहरों में हैं.

मुबीन कहते हैं कि कश्मीर में छात्रों को पढ़ाई के लिए सही राह दिखाने की ज़रुरत है और ये एक मुख्य कारण था कि वह कश्मीर में इस तरह का कुछ करें, जिससे बच्चों को आईआईटी जैसी परीक्षा में दिलचस्पी बढ़े.

छात्र-छात्राओं में खुशी है

श्रीनगर के जवाहर नगर की रहने वाली 20 वर्ष की क़ाज़ी फ़ातिमा ने हाल ही में आईआईटी मेंस की परीक्षा पास की है. लेकिन फ़ातिमा के लिए ये सफ़र तय करना इतना आसान नहीं रहा. फ़ातिमा कहती हैं कि कश्मीर के ख़राब हालात से उन्हें मुश्किलों का सामना तो रहा लेकिन इस दौरान भी उन्होंने वह सब रास्ते खोजे जिनसे उन्हें आगे बढ़ने का मौक़ा मिला. फ़ातिमा फ़िलहाल आईआईटी एडवांस की तैयारी कर रही हैं जो इसी महीने के आख़िर में होने वाला है. श्रीनगर के इंदिरा नगर में रहने वाली 20 साल की महरीन ने भी पिछले महीने अप्रैल में आईआईटी मेंस की परीक्षा पास की है. और वो भी आईआईटी एडवांस की तैयारी कर रही हैं.

फ़ातिमा और महरीन की इस कामयाबी में उन दोनों की मेहनत के अलावा बिहार के तीन लड़कों का भी हाथ हैं. एक कश्मीरी लड़के के साथ मिलकर तीनों मिलकर एक कोचिंग सेंटर (द राइज) चलाते हैं. फ़ातिमा कहती हैं, “बीते साल जब कश्मीर में कई महीनों तक हालात ख़राब रहे तो उस बीच हमारे शिक्षक हमारे लिए उपलब्ध रहते थे और हम फ़ोन पर पूछ सकते थे जब किसी तरह की मुश्किलात का सामना होता था. इस तरह से मैंने अपनी तैयारी का सफ़र जारी रखा.”

कई छात्रों ने IIT में मारी बाजी़

पिछले साल यानी 2016 में भी इस कोचिंग सेंटर से चार छात्रों ने आईआईटी क्लियर किया था जबकि 30 से ज़्यादा छात्रों ने एनआईआईटी में दाख़िला लेने में सफलता पाई थी. इसके अलावा इसी सेंटर से पढ़े एक और छात्र 19 साल के शेख़ मोअज़्ज़िन ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. मोअज़्ज़िन को अमरीका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग से एडमिशन का ऑफ़र मिला है. वो जल्द ही एडमिशन लेने के लिए अमरीका जाने वाले हैं. कोचिंग सेंटर का दावा है कि शेख़ मोअज़्ज़िन कश्मीर घाटी के पहले ऐसे छात्र हैं जिन्हें प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से दाख़िले का ऑफ़र मिला है.

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