मुंगेर पहुंच कर एक्साइटेड हैं विकास वैभव, इसी जिले से शुरू किया था कॅरियर

लाइव सिटीज डेस्क : विकास वैभव. बिहार कैडर के सबसे लोकप्रिय आईपीएस अफसर. किसी परिचय के मोहताज नहीं. हाल ही ये डीआईजी बन कर भागलपुर गये थे. अब इन्हें मुंगेर रेंज का भी प्रभारी बना दिया गया है. इनका कार्यक्षेत्र बढ़ गया है. इनका दायित्व बढ़ गया है. इनकी जिम्मेवारी बढ़ गयी है. लेकिन ये हर दायित्व निभाने को तैयार हैं. यह उनकी लेखनी से भी पता चलता है. खास बात कि उनकी फील्ड पुलिसिंग का पहला दिन भी मुंगेर भी बीता था.

studio11

अपने फेसबुक पेज पर डीआईजी विकास वैभव लिखते भी हैं, ‘बिहार सरकार द्वारा कार्यक्षेत्र के दायित्वों में वृद्धि करते हुए भागलपुर के साथ मुंगेर (प्राचीन मोदागिरी) क्षेत्र के भी पुलिस डीआईजी के रूप में पदस्थापित किया गया है. इससे अब राज्य के 9 जिलों यथा भागलपुर, बांका, नवगछिया, मुंगेर, बेगुसराय, खगड़िया, जमुई, लखीसराय एवं शेखपुरा की पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक योगदान का अवसर प्रदान हुआ है. ईश्वर से इस अवसर पर अपने बढ़े दायित्वों के निर्वहन में भी उनकी मार्गदर्शी कृपा हेतु प्रार्थना कर रहा हूं. प्राथमिकताएं पूर्ववर्ती रहेंगी. जनहित में सतत सकारात्मक योगदान हेतु सदैव दृढ़ प्रतिज्ञा एवं प्रतिबद्ध हूं.

बता दें कि कानून को लागू कराने में डीआईजी विकास वैभव जितने कड़े हैं, पब्लिक फ्रेंडली में भी वे उतने ही आगे हैं. महज कुछ ही माह में भागलपुर में भी वे अपनी छाप छोड़ चुके हैं और अब उन्हें मुंगेर का भी प्रभार दे दिया गया है. उनके मुंगेर आने से आम जनता तो खुश है ही, वे भी काफी एक्साइटेड हैं. आईपीएस विकास वैभव मुंगेर का प्रभार लेने गये तो अपने बीते दिनों की यादों में खो गये. उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर इस खुशी को शेयर भी किया है.

विकास वैभव ने लिखा है — ’12 साल पहले फिल्ड पुलिसिंग का मेरा पहला दिन मुंगेर में ही बीता था, जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा राष्ट्रीय हितों के प्रति सर्वोच्च बलिदान दिया गया था. मुंगेर क्षेत्र का प्रभार मिलने पर पुरानी हृदयस्पर्शी स्मृतियां जहां मानस पटल पर उभर रही हैं, वहीं क्षेत्रीय समस्याओं में कुछ साकारात्मक योगदान हेतु मन संकल्पित एवं समर्पित है. उस पहले दिन के अनुभव को पुनः साझा कर रहा हूं. बढ़े दायित्वों में भी पुलिस की भूमिका पर मेरा विशेष ध्यान रहेगा. क्षेत्र की जनता से परिवर्तन में सहयोग की अपेक्षा है. जय हिन्द !’ बता दें कि 5 जनवरी 2005 को ही तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू शहीद हो गये थे. इससे वे काफी शॉक्ड थे.

इतना ही नहीं, पिछले दिनों उन्होंने अपने ब्लॉग में भी फिल्ड पुलिसिंग के पहले दिन की यादों को शेयर किया था. उसमें उन्होंने लिखा कि तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू के शहीद होने से वे शॉक्ड थे. वे अगले दिन 6 जनवरी को खड़गपुर थाने पर मीटिंग भी ली. भीमबांध जंगल का जायजा भी लिया था. उसी भीमबांध जंगल में जब मीटिंग कर केसी सुरेंद्र बाबू लौट रहे थे तो वे माइंस ब्लास्ट के शिकार हो गये थे. खास बात कि इसके पहले विकास वैभव 1992 में पहली बार भीमबांध अपने पैरेंट्स के साथ गये थे. वे कितने दुखी थे, यह उनकी लेखनी से पता चलता है.

इसे भी पढ़ें : विकास वैभव सबसे पॉपुलर IPS अधिकारी बने बिहार में 
11 जिलों के SP बदले, विकास वैभव को डबल चार्ज,सिटी एसपी का भी तबादला 

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*