छोटे भाई ने अपने दिव्यांग भाई की बदली किस्मत, अब खुद भी कर रहा है इंजीनियरिंग

लाइव सिटीज डेस्क : यदि हम दूसरों की सफलता के रास्ते तैयार करते हैं तो यकीन मानें खुद सफल होने की राह पर हम आगे बढ़ रहे हैं. शायद ही कभी ऐसा सुनने को मिलता है कि छोटा भाई पहले बड़े भाई को आगे बढ़ाता है और फिर उसी राह पर वह चलता है. लेकिन ऐसी ही मिसाल पेश की है कोटा में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले बिहार के छात्र बसंत कुमार पंडित ने.

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बिहार के समस्तीपुर जिला स्थित परोरिया गांव के रहनेवाले छात्र बसंत ने इस साल एनआइटी में सफलता हासिल की और उसने देश के टॉप एनआइटी इलाहाबाद में नामांकन लिया. लेकिन यह सफलता इस मायने में बहुत बड़ी है कि इसके पहले बसंत ने अपने बड़े भाई दिव्यांग कृष्ण कुमार की दिन-रात सेवा करते हुए उन्हें एनआइटी पास कराया. इसके बाद बड़े भाई का अगरतला में एडमिशन दिलवाया. इससे प्रभावित होकर अब बसंत का छोटा भाई प्रियतम भी कोटा में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है.

खास बात कि बसंत चलने में असमर्थ अपने बड़े भाई को कृष्ण कुमार को अपनी पीठ पर डेली उठाकर कोचिंग पहुंचाता था. फिर घर पर भी हर कार्य में मदद करता था. इसके अलावा वह बड़े भाई की पढ़ाई करने में भी काफी मदद करता था. इसकी वजह से गत वर्ष जेईई-मेन में बसंत की रैंक काफी पीछे रही और उसे अच्छा काॅलेज में नहीं मिल सका. इससे बसंत ने फिर फिर से परीक्षा की तैयारी की. इस तरह अब दोनों भाई एनआइटी में पढ़ाई कर रहे हैं.

बता दें कि समस्तीपुर के परोरिया गांव में 400 परिवार रहते हैं. गांव के किसान मदन पंडित करीब 5 बीघा जमीन की खेती पर आश्रित हैं. मदन पंडित के छह पुत्र हैं. दो बड़े पुत्र श्रवण व राजेश मुंबई में गैराज में काम करते हैं. तीसरे नंबर के भाई राजीव पटना में रहकर नौकरी की तलाश में हैं. वहीं बसंत की मेहनत से दिव्यांग कृष्ण एनआइटी में पढ़ाई कर रहे हैं. दोनों भाइयों की इस सफलता से पूरा समस्तीपुर खुश है. परोरिया गांव में तो खुशी की लहर है. दोनों भाइयों से प्रभावित होकर अब उनका छोटा भाई प्रियतम कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है.

बसंत बताते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. पापा छोटा किसान थे और परिवार बड़ा था. किसी तरह पापा ने इंजीनियरिंग करने के लिए कोटा भेजे, लेकिन एक साल परीक्षा में अच्छी रैंक नहीं आने के बाद पापा ने आर्थिक तंगी के चलते वापस गांव आने के लिए कह दिया. लेकिन तब हमें एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट की मदद मिली. दोनों भाइयों को फीस में 75 परसेंट की स्काॅलरशिप दे दी. यही हमलोगों के लिए टर्निंग प्वाइंट रहा. और आज हमें सफलता मिली है. वहीं निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी प्रतिभाओं पर हमें गर्व है.

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