सड़क पर 10 फ्लेवर की चाय बेचते हैं शम्भू, होटल मैनेजमेंट किया है, जल्द लांच करेंगे अपना ब्रांड

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पटना : कहावत पुरानी है, लेकिन असर आज भी रखती है कि शेर, शायर और सपूत अपनी राह खुद बनाते हैं. कुछ लोग आज भी इस दुनिया में ऐसे हैं जिन्होंने अपनी राह खुद चुनी है और अपने को सच करने के लिए दुनिया की बनाए हुए नियमों के खिलाफ जाकर संघर्ष का रास्ता चुना है. कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के सपूत और नालंदा के रहने वाले शम्भू कुमार सिंह की.

अगर आप पटना के गांधी मैदान में सुबह वाॅक करने के लिए जाते हैं तो आपके लिए शम्भू कुमार का नाम नया नहीं होगा. शम्भू कुमार सिंह सुबह पटना के गांधी मैदान में चाय बेचते हैं. आप कहेंगे कि इसमें कौन सी नई बात है. पटना में हर जगह लोग चाय बेचते हैं. लेकिन कहानी में टिवस्ट यही है कि शम्भू कुमार जैसी चाय पटना में तो क्या पूरे बिहार में कोई नहीं बेचता है?

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गांधी मैदान के करीब चाय बेचते शम्भू

जी हां, कुछ ऐसी ही दिलचस्प कहानी है शम्भू कुमार सिंह की. बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखने वाले शम्भू कुमार ने नालंदा से पढ़ाई पूरी करने के बाद होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रुख किया. वहां एक प्रतिष्ठित काॅलेज से क्यूलीनरी आर्ट एंड होटल मैनेजमेंट में दो साल का फुल डिप्लोमा लेने के बाद कई जाने-माने होटलों में काम किया. बकौल शम्भू कुमार उन्होंने दो साल तक नई दिल्ली के होटल आईटीसी में बतौर काॅमी शेफ काम भी किया है. लेकिन उनके मन में अपना काम शुरू करने की ललक थी. दिल्ली के मशहूर चाय रेस्त्रां चायोस में चाय पीने के दौरान उन्होंने वहां से अपनी यूनिक चाय फ्लेवर पर काम करना शुरू किया. फ्लेवर की तलाश उन्हें आयुर्वेद तक खींच ले गई. जहां उन्होंने आयुर्वेद से चाय का आइडिया लिया.

आज शम्भू कुमार करीब दस अलग—अलग फ्लेवर की चाय बेचते हैं. मजे की बात यह है कि उनकी चाय में न तो चाय पत्ती होती है, न चीनी और न ही दूध होता है. फिर भी अलसुबह लोग गांधी मैदान में शम्भू की चाय पीने के लिए जमा होते हैं. दरअसल शम्भू के मुख्य फ्लेवर हैं आम पापड़ चाय, गुलकंद चाय, अदरखी चाय, गुलाबजल चाय, गुड़ बेस्ड चाय, तुलसी चाय, दालचीनी चाय आदि. ये सारे फ्लेवर इतने यूनिक हैं कि लोग इन्हें चखने का मोह संवरण नहीं कर पाते हैं. ये सारे चाय फ्लेवर पूरी तरह से हर्बल हैं और उनमें किसी भी किस्म के आर्टिफिशियल कैमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. उनकी चाय को डायबिटीज के मरीज भी बड़े आराम से पी सकते हैं.

बेहद खास है तरीका

चाय बनाने का तरीका भी बेहद खास और देसी किस्म का है. पतीले पर खौलती सीक्रेट रेसिपी वाली चाय, जिसमें चाय पत्ती नहीं होती है. आम पापड़ का घोल एक चम्मच, तुलसी स्वरस एक चम्मच, दालचीनी, इलायची और तमाम मसालों का कुटा हुआ पाउडर एक चम्मच, गुलाबजल एक चम्मच, शहद एक चम्मच और भी तमाम चीजें, इसके बाद ऊपर से खौलता हुआ सीक्रेट काढ़ा. उसके बाद वह जादुई स्वाद तैयार होता है जिसे सिर्फ पीने वाला ही महसूस कर सकता है, बयां नहीं कर सकता.

लांच करेंगे अपना ब्रांड

गांधी मैदान में जमीन पर बैठकर चाय बेचने के पीछे के कारण का खुलासा करते हुए शम्भू कुमार बताते हैं कि अभी अपने ब्राण्ड को लांच करने से पहले वह लोगों को अपने फ्लेवर टेस्ट करवाना चाहते हैं ताकि जब वह ब्राण्ड लांच करें तो लोगों को उनके जायके की आदत भी हो और तलाश भी. किसी दूकान से शुरूआत करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दुकान पर अपनी चाय को प्रमोट करना मुश्किल होता, लेकिन यहां पर बड़ी संख्या में लोगों से हम बड़ी आसानी से जुड़ भी रहे हैं और लोग हमारी चाय के फ्लेवर को पसंद भी कर रहे हैं.

अपने भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए शम्भू बताते हैं कि हमारा मकसद सबसे पहले देश के बड़े रेस्तरां में मिलने वाली चाय का जायका बेहद कम दाम में आम आदमी तक पहुंचाना है. आम आदमी की पहुंच शायद ही कभी उस जायके तक हो पाती हो. हमारे दाम बेहद कम हैं लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं है. लगभग एक ही महीने में हम अपना खुद का चाय ब्राण्ड लांच करेंगे, जिसमें करीब दस लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था भी की जाएगी.