कल्पित वीरवाल: कामयाबी है जिनके कदमों की चेरी 

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विमलेन्दु कुमार सिंह

लाइव सिटीज डेस्क : कल्पित वीरवाल!! कल तक यह नाम दुनिया में निहायत ही अनजाना था लेकिन आज यह नाम सबकी जुबां पर है. अचानक यह नाम पूरे देश में चर्चा में आ गया है. और ऐसा हो भी क्यों न, आखिर आज तक इतना बड़ा कारनामा किसी ने किया भी तो नहीं था! देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली कुछ परीक्षाओं में से एक है आईआईटी की मेन्स परीक्षा. देश भर के लाखों बच्चे इसमें शरीक होते हैं. इसमें कामयाबी सबकी चाहत होती है. अगर कोई इसमें टॉप रैंक ले आए तो बहुत बड़ी बात होती है. और अगर कोई पूरे 360 अंकों की परीक्षा में पूरे 360 अंक यानी शत-प्रतिशत अंक लाने का कारनामा कर दिखाए तो आप क्या कहेंगे? मेरी समझ से आपके शब्द होंगे अद्भुत! अविश्वनसनीय !! अकल्पनीय !!!
आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी कि कल्पित वीरवाल ने कभी कोचिंग के कामयाब केंद्र के रूप में विख्यात हो चुके कोटा शहर जाने की जरूरत महसूस नहीं की. वह भी तब जबकि वह राजस्थान के ही निवासी हैं. राजस्थान का कोटा शहर आज पूरे देश के बच्चों को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए लुभाता है और पूरे देश में अपने बच्चों को कोटा भेजने की इच्छा भेड़चाल का रूप ले चुकी है. कल्पित ने परीक्षा की विशेष तैयारी के लिए कोई गैप ईयर भी नहीं किया और करंट सेशन में ही कामयाबी का परचम लहरा दिया. बल्कि सच तो यह है उसने इसकी गंभीरतापूर्वक तैयारी भी महज एक साल पहले ही शुरू की थी. और परिणाम….वह तो सबसे सामने है. एक नया इतिहास लिखा जा चुका है. एक नाम ऐतिहासिक कारनामा इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है. भविष्य में अब कोई भी इस रिकार्ड की बराबरी ही कर सकेगा, तोड़ नहीं पाएगा. शत-प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद आखिर अब बचता भी क्या है!
इस 17 वर्षीय किशोर ने वह कारनामा कर दिखाया है जो जिसे लोग अब तक असंभव मानते रहे हैं. और इसकी वजह भी है. जिस परीक्षा में कामयाबी ही एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर स्वीकार किया जाता रहा हो, उसमें शत-प्रतिशत अंक लाने के बारे में कोई सोचेगा भी तो लोग इसे यही कहेंगे कि लगता है ज्यादा पढ़ने से दिमाग ‘क्रेक’ हो गया है. जी हां ‘क्रेक’ तो हुआ है, लेकिन दिमाग नहीं, बल्कि एक्जा़म ! कहते हैं कि जिस शख्स में जोखिम लेने का माद्दा होता है, इतिहास वही रचता है. आपको शायद पता हो कि इस परीक्षा में गलत उत्तर देने पर अंक काटे जाते हैं. इसलिए होता यूं है कि परीक्षार्थी स्वयं को सुरक्षित रखते हुए, जटिल प्रश्नोंं से बचने और ऋणात्मक अंकों से स्वयं को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं. लेकिन कल्पित की सोच इससे अलग थी. उसने सरल से कठिनतम प्रश्नों की ओर बढ़ते हुए सारे सवाल हल कर डाले. और सिर्फ हल ही नहीं कर डाले, सही हल कर डाले. और फिर जो हुआ, वह तो नजीर बनकर दुनिया के सामने है.
एक मेल नर्स पिता और स्कूली शिक्षिका माता की इस होनहार संतान ने कामयाबी की वह लकीर खींच डाली है जिसकी भविष्य में मुमकिन है कोई बराबरी तो कर ले, लेकिन इस लकीर को छोटा साबित कर पाना तो नामुमकिन ही है. इस अद्भुत कारनामे के साथ कल्पित ने देश के किसी भी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और केंद्र द्वारा वित्त पोषित किसी भी टेक्निकल इंस्टीट्यूट में नामांकन के लिए अपना सीट आरक्षित कर लिया है. इस उपलब्धि की अहमियत को इस बात से समझने की कोशिश कीजिए कि स्वयं सीबीएसई के चेयरपर्सन ने फोन कर कल्पित को इस उपलब्धि की जानकारी और हार्दिक बधाई दी. और इसके तत्काल बाद ही राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आधिकारिक ट्वीटर अकाउंट पर मैसेज फ्लैश हुआ, ‘ Kalpit is the first student to score a perfect 100% in the JEE Mains Competition. Rajasthan is proud of you.’ और सच में सिर्फ राजस्थान ही क्यों, इस होनहार पर तो पूरे देश को नाज है.
कल्पित अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं और इस श्रेणी के अंतर्गत ही उन्होंने परीक्षा में शामिल होने का आवेदन दिया था. लेकिन जब परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो वह न केवल ओवरऑल टॉपर हुए, बल्कि उनका निशाना परफेक्ट 100 प्रतिशत के लक्ष्य को भेद चुका था. आखिर उनकी इस कामयाबी पर उनके मातापिता को तो बेहद आश्चर्य हुआ होगा? जी नहीं, हरगिज नहीं!! पर क्यों ? ऐसा इसलिए कि कल्पित इससे पूर्व भी वर्ष 2013 में Indian Junior Science Olympiad और वर्ष 2014 में National Talent Search Examination में पूरे देश में अव्वल आ चुके थे. यानी हालिया हासिल कामयाबी का स्वाद उनके लिए कोई नई बात नहीं थी. वह पहले भी ऐसी कामयाबी का रसास्वादन कर चुके थे.
कल्पित के पिता पुष्पेंद्र वीरवाल मेल नर्स हैं और माताजी पुष्पा वीरवाल एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका. उन्हें अपने सपूत की सफलता पर हैरानी भले न हुई हो लेकिन गर्व और गौरव का अहसास तो बखूबी है और वे इसे अपने पुत्र की लगन और मेहनत का नतीजा बताते हैं. वे कहते हैं, ‘ सुबह 6 बजे जगकर बिना थके अनवरत स्कूल और कोचिंग से पढाई कर शाम 5 बजे तक घर लौटकर आता है कल्पित, और फिर थोड़ा विश्राम कर सेल्फस्टडी में मगन हो जाता है. यह उसकी रोज की दिनचर्या है.’ आखिर इतना मेहनत करने के बाद कल्पित अपने ब्रेन को तरोताजा कैसे रख पाते हैं? कोई गेम या मूवी वगैरह? कल्पित कहते हैं, ‘नहीं..नहीं..क्रिकेट और बैडमिंटन मुझे पसंद तो है लेकिन इसके लिए मेरे पास वक्त कहां है. हां, इस दौरान पसंदीदा संगीत का जरूर लुत्फ उठाता हूं.’ आखिर कौन हैं इस ब्रिलिएंट के फेवरिट म्यूजिशियन?  कल्पित कहते हैं, ‘कोल्ड प्लेट, लिंकेन पार्क और ऐड शीरन.’
 जब आठवीं कक्षा में कल्पित थे, तभी उनके पिता ने उनका नामांकन एक कोचिंग संस्थान में करवा दिया था. आखिर उन्हें इसकी इतनी जल्दी जरूरत क्यों महसूस हुई? उनका जवाब है, ‘मैंने ऐसा इस परीक्षा के स्वरूप को समझने और इसमें कामयाब होने के लिए कितनी कोशिश करने की जरूरत है, यह अंदाजा लगाने के लिए किया था. लेकिन सच तो यह है कि इस परीक्षा के लिए गंभीरतापूर्वक तैयारी मैंने 11 वीं क्लास में आने के बाद ही शुरू की थी.’
आपके मन में यह बात जरूर कौंध रही होगी कि राजस्थान का उदयपुर शहर भारत के कोचिंग केंद्र के रूप में विख्यात हो चुके कोटा के करीब ही है, फिर भी कल्पित के मन में कोटा जाने का ख्याल आखिर क्यों नहीं आया? कल्पित कहते हैं, ‘घर पर रहकर परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय मैंने काफी सोच-समझ कर लिया था. दरअसल, कोटा में स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का जो एक प्रेशर बन जाता है, मैं उससे स्वयं को दूर रखना चाहता था और खुद को बिल्कुल कूल रखना चाहता था. दूसरी बात यह कि मैं उदयपुर में जिस कोचिंग संस्थायन का छात्र हूं, उसके परीक्षा परिणाम का रिकार्ड भी शानदार रहा है. इसलिए कोटा जाना जरूरी नहीं समझा. और सबसे बड़ी बात यह कि घर में माता-पिता के साथ रहकर पढाई करने का अपना एक अलग फायदा तो है ही.’
राजस्थान के लेक सिटी उदयपुर में M.D.S. Senior Secondary School के छात्र कल्पित की 12th  परीक्षा के परिणाम अभी घोषित नहीं हुए हैं. जाहिर है उन्हें इस परिणाम का भी बेसब्री से इंतजार है. लेकिन इससे भी कहीं ज्यादा बेसब्री से उन्हें  आगामी 21 मई को आयोजित होने वाली परीक्षा का इंतजार है. आखिर देश के प्रतिष्ठित प्रौ़द्योगिकी संस्थान Indian Institute of Technology में नामांकन एवं अध्ययन का सपना तो इस परीक्षा में प्रदर्शन और परिणाम पर ही टिका है. कल्पित की निगाहें एक बार फिर से लक्ष्य पर केंद्रित हो चुकी हैं. और आईआईटी प्रवेश परीक्षा का लक्ष्य भेदन से नीचे कुछ भी स्वीकार्य नहीं. शाबास कल्पित !! लाइव सिटीज मीडिया पूरे बिहार की ओर से आपको इस कामयाबी पर बधाई और आगामी परीक्षा के लिए असीम शुभकामनाएं देता है. कीप इट अप…ऑल द बेस्ट!!!

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