‘सस्ती हुई शराब, अब मस्ती-मस्ती पिया करो…’

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प्रतीकात्मक फोटो

पटना : आज से करीब तीन महीने पहले 17 मई 2017 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रांची के मोरहाबादी मैदान में कहा था – आनेवाले दिनों में झारखंड में भी शराबबंदी लागू करनी पड़ेगी. वो तब आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से आयोजित ‘सरकार गिराओ, झारखंड बचाओ’ महारैली को संबोधित कर रहे थे. झारखंड में अभी भाजपा की ही सरकार है और नीतीश कुमार पिछले 26 जुलाई को एक बार फिर भाजपा के साथ ही गठबंधन कर बिहार में सरकार बना चुके हैं. खैर ये तो नेताओं की आपस की राजनीति है लेकिन मुख्य बात यह है कि अब झारखंड में शराब पहले से भी सस्ती हो गई है.

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बता दें कि झारखंड सरकार ने जुलाई के बाद से शराब बिक्री को अपने हाथों में ले लिया है. इस काम के लिए सरकार ने झारखंड बिवरेज कॉपोरेशन की स्थापना की है. 1 अगस्त से अब जगह-जगह खुली सरकारी दुकानों पर पहले से कम कीमतों पर शराब मिल रही है.

कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि झारखंड में शराब की कीमतें कम होने से वहां ‘पर्यटन’ पहले से भी अधिक बढ़ गया है. खासकर बिहार के लोग पहले के मुकाबले ज्यादा आने लगे हैं. बताते हैं कि जमुई से जसीडीह को जानेवाली एक एक्सप्रेस का नाम लोगों ने ‘मस्तानी एक्सप्रेस’ रख दिया है. सुबह निकलो तो घंटे भर में जसीडीह, दिनभर ‘मजे’ लें, और फिर शाम को उसी ट्रेन से वापस आ जायें. सोचिये, झारखंड की अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा योगदान अब कर रहा है बिहार.

बताया जा रहा है कि अब झारखंड में विभिन्न ब्रांड के बियर 61 रुपए से 101 तक में मिल रहे हैं. यही बियर पहले 120-150 रुपए तक में मिलती थी. विभिन्न ब्रांड के व्हिस्की, रम, वोदका भी पहले से कम दाम में मिल रहे हैं. सरकार की यह नई शराब नीति 1 अगस्त से लागू हुई है.  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले  दिन कम ही दुकानें खुली, लेकिन जो भी खुली, उनमें जमकर भीड़ देखी गई. धनबाद में तो उस रात शराब की दुकानों के बाहर की कतार सड़क तक पहुंच गई. मौके पर पुलिस के आला अधिकारियों को पहुंचकर स्थिति को संभालना पड़ा.

ऐसा नहीं है कि झारखंड में शराबबंदी की बातें नहीं हो रही. गाहे-बगाहे मांग तो अभी भी उठ रही है. खासकर महिला संगठनों की ओर से. लेकिन देखना होगा कि वो भाजपा, जिसने कभी बिहार में शराबबंदी का समर्थन किया था, क्या उसी तर्ज पर झारखंड में रघुवर दास कभी आगे बढ़ पायेंगे. फिलहाल तो ऐसा नहीं दिखता.

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