बिहार से खास नाता है भारत रत्न विश्वेश्वरैया का, आज जयंती पर सीएम नीतीश ने किया नमन

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लाइव सिटीज डेस्क: इंजीनियरिंग जगत की महान शख़्सियत भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की आज 157वीं जयंती है. विश्वेश्वरैया की जयंती को इंजीनियर्स-डे के रूप में भी मनाया जाता है. इस मौके पर गूगल ने भी उनके नाम का डूडल बनाया है. भारत के महान सपूत विश्वेश्वरैया को आज पूरा देश याद कर रहा है. बिहार में भी विश्वेश्वरैया के योगदान को लेकर लोगों ने उन्हें याद किया. इस अवसर पर अभियंता दिवस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुभकामनायें दी और भारत रत्न विश्वेश्वरैया जी को जयंती पर नमन किया.

बिहार से है खास नाता

विश्वेश्वरैया का बिहार से खास नाता है. पटना में एक विश्वेश्वरैया भवन भी है. इसके अलावा विश्वेश्वरैया ने बिहार को एक बड़ा योगदान भी दिया है. पटना जिले के हाथीदा के पास बना राजेंद्र सेतु इसका जीता जागता उदाहरण है. 1959 में बेहद कम टेक्नोलॉजी और संसाधनों के अभाव के बावजूद लगभग दो किलोमीटर लंबा शहतीर शैलीनुमा लोहे का पुल उनकी विद्वता की कहानी कहता है. यह दोमंजिला पुल गंगा नदी पर बना बिहार का रेल-सह-सड़क पुल है, जो उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ता है.

राजेंद्र सेतु उनकी प्रतिभा का नायाब उदाहरण

एम विश्वेश्वरैया 92 साल की उम्र में भी साइकल से पुल निर्माण के काम के लिए जाया करते थे. राजेंद्र सेतु का निर्माण एक बड़ी चुनौती थी. पर्याप्त संसाधनों की कमी के बीच उन्होंने इस काम को पूरे कर दिखाया. लगभग 2 किलोमीटर लंबे इस पुल पर दो लेन वाली सड़क और एक लाइन रेलवे ट्रैक है.

भारत के इस डैम बिल्डर का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के चिकबालापुर के पास मुद्देनाहाली में हुआ था. विश्वेश्वरैया का पूरा नाम मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया है. उन्हें सर एमवी के नाम से भी जाना जाता है. आगे चलकर वह भारत के महानतम सिविल इंजीनियर बनकर उभरे. इसके अलावा वह एक महान अर्थशास्त्री, स्टेट्समैन और पिछली शताब्दी के वरिष्ठ राष्ट्रनिर्माता के तौर पर पहचाने गए.

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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में विश्वेश्वरैया को याद किया. उन्होंने कहा आज भी आम लोग कृष्ण राजा सागर डैम से लाभान्वित होते हैं, जिसका निर्माण उन्होंने किया. रेलमंत्री पीयूष गोयल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने ट्विटर पर विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि अर्पित की. मैसूर के विश्वेश्वरैया देश के माने हुए सफल इंजीनियर और विद्वान थे, 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

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