अगर आप नहीं चेते तो झाड़ू में गोबर लगाकर पीटती हैं सीतामढ़ी की मुखिया रितु जायसवाल

-अभिषेक आनंद-

पटना : रितु जायसवाल को सभी जान गए हैं. वैशाली की बेटी है, सीतामढ़ी की बहु. पति अरुण कुमार दिल्ली में 1995 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. रितु जायसवाल को नशा दिल्ली की Page 3 पार्टी का नहीं, गांव में कुछ कर गुजरने का है. इरादे बुलंद हैं, तभी दिल्ली छोड़कर फिर से बिहार आई. ससुराल सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड के सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया का चुनाव लड़ी और जीत गई. अब रितु जायसवाल को आप कभी मोटरसाइकिल से फर्राटे भरते, ट्रेक्टर से खेत जोतते, बाढ़ के पानी में राहत पहुंचाते तो कभी करप्ट सिस्टम से लड़ते देखते हैं.

रितु जायसवाल ने गांव में कुछ करने के इरादे से क्या नहीं किया है. जो ठान लेती है, कर देती है. मुखिया का चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले रितु ने अपने पंचायत को खुले में शौच से मुक्ति दिलाई. राह कठिन थी, लेकिन रितु जायसवाल ने कर दिखाया है. अब भी पंचायत में रितु की स्वच्छता पार्टी के सदस्य सुबह-शाम निगहबानी करते हैं. कोई पकड़ में आया, तो पूरे परिवार का सरकारी दुकान से राशन बंद. कोई मुरौव्वत नहीं. अब तो वह बदमाशों को सरेशाम पीट देने वाली मुखिया रितु जायसवाल के रूप में भी पहचानी जाने लगी है. कई वाकये तो रितु जायसवाल की जुबान पर सदैव रहते हैं.

दिवाली के वक़्त गोबर लगे झाड़ू से पिट गए थे बैंक वाले

मामला ऐसा था कि कहीं से आती-जाती मुखिया रितु जायसवाल को बैंकों के सामने लंबी-लंबी कतार कई दिनों से दिख रही थी. सभी बुजुर्ग लोग लाइन में लगे होते थे. पता नहीं, रितु जायसवाल को क्या सुझा, वह रुकी और लाइन में लगे बुजुर्गों से बातें करने लगी. मालूम हुआ कि  रोज लग रही लाइन वृद्धावस्था पेंशन लेनेवालों की कतार है. बैंक  कह रहा है कि पैसे आये नहीं और सरकार कह रही है कि सभी खातों में पेंशन भेजी जा चुकी है.

रितु जायसवाल को लग गया कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है. सो वह बैंक में घुस गई. साथ में एक-दो पेंशनधारी लोगों को लिया. फिर बैंकवालों से कहा कि इनके अकाउंट का स्टेटमेंट दो. आनाकानी होने लगी. लिंक फेल बताया गया. लिंक आया तो प्रिंटर खराब हो गया. रितु डटी रही. फिर जो मामला आया, वह तो चौंकाने वाला था. पैसा पहले ही आ गया था और बिना निकाले विथड्रा भी हो चुका था. अब तो रितु जायसवाल का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ा. परिणाम, सबों के साथ दोषी बैंक वाले को गोबर लगे झाड़ू से दे दनादन. समस्या का  हल तुरंत निकला. लाइन ख़त्म हुई और लोगों को पैसे मिल गए.

मुखिया रितु ने इंदिरा आवास योजना के भुगतान में भी गड़बड़झाले को सूंघा. आजकल बैंकों ने व्यवस्था की है कि गांव-गांव जाकर खाताधारियों को भुगतान कर देंगे. इसके लिए एजेंसियां काम करने लगी है. पर, इसमें भी कमीशन का खेल शुरू हो गया है. कम पढ़े-लिखे लोगों को मूर्ख बना दिया जा रहा है. इंदिरा आवास योजना के लाभुकों को 55 हजार के बदले कहीं-कहीं 40 हजार ही मिल रहे हैं. ऐसे में, रितु जायसवाल को एक दिन गांव में गड़बड़ करता बैंक का एजेंट मिल गया. देरी कुछ भी नहीं हुई, ठीक से मरम्मती कर दी गई.

पैंट का जिप खोले खड़ा था, रितु जायसवाल ने मुंह पर मारा जूता

अपने पंचायत सिंहवाहिनी को जब रितु जायसवाल खुले में शौच से मुक्त कराने के अभियान में जुटी थी, तो एक दिन जोरदार टक्कर हो गई. ठेकेदार किस्म का एक व्यक्ति शाम को खुले में शौच कर रहा था. गश्त करती पहुँच गई मुखिया रितु जायसवाल. सामने रितु को देख वह आदमी खड़ा तो जरुर हो गया, लेकिन बहस करने लगा.

रितु जायसवाल ने पहले समझाया. पैंट की खुली जिप को बंद करने को कहा. पर उसने कहा – नहीं बंद करेंगे तो आप क्या कर लेंगी, हम ऐसे ही खड़े रहेंगे. इसके बाद रितु को आया जोर का गुस्सा. सामने खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मारने लगी जूता. जूता भी पास खड़े मर्द का था. जब थेथर ने जूता खाया तो भाग खड़ा हुआ.

अब सैकड़ों लोगों के सामने थप्पड़ मार रही थी रितु जायसवाल

सीतामढ़ी में बाढ़ की विपदा थी. सरकारी राहत कम ही पहुंचा था. रितु जायसवाल अपने रिसोर्सेज से सबों के बीच राहत पहुंचाने में लगी थी. कुछ तिरपाल प्रभावितों के बीच बांटने थे. लिस्ट बनी थी. लिस्ट के आधार पर रितु ने अपने सहयोगी अविनाश को जरुरतमंदों तक पहुंचने को कहा था.

अविनाश ने पंचायत के एक गांव में जाकर किसी व्यक्ति से दूसरे का नाम पूछा. पता बताने के बजाय व्यक्ति ने कारण पूछ लिया. अविनाश ने कहा कि तिरपाल देना है. व्यक्ति भड़क गया. उसने यह भी जानने की तकलीफ नहीं की कि लिस्ट में उसका नाम है कि नहीं. सीधे अविनाश की ठुकाई करने लगा. चाकू से प्रहार किया और कट्टा सटा दिया. किसी तरीके से खबर रितु जायसवाल को पहुंची.

रितु ने बगैर कोई देरी किये मोटरसाइकिल से फर्राटा भरा. पानी में कूदती-फांदती पहुंची. पहुंचने के बाद पहले अपने सहयोगी अविनाश को देखा और फिर हमला बोलने वाले शख्स से टकरा गई. देने लगी थप्पड़ पर थप्पड़. भीड़ बढती गई, रितु जायसवाल रुकी नहीं. अब पूरे सीतामढ़ी में इस बात की चर्चा होने लगी है कि रितु जायसवाल के यहां कुछ गड़बड़ी हुई, तो बाप रे बाप बहुत मारेगी. कमीशन कमाने और मांगने वाले दूसरे पंचायतों के लोग अब सामूहिक मीटिंग में रितु जायसवाल को बुलाते भी नहीं हैं.

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